जी-20 सम्मेलन में मोदी-ट्रंप की बैठक के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री जून में कर सकते हैं भारत दौरा

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जी-20 सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मेजबान शहर ओसाका जाएंगे।

नई दिल्ली: जी-20 सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मेजबान शहर ओसाका जाएंगे। इसके बाद वो भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर सकते हैं। इनकी मुलाकात के बाद ओसाका में ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बैठक होने की उम्मीद है। जिसमें दोनों देश मिलकर भारतीय निर्यात और अन्य आसन्न उपायों के लिए अमेरिका की ड्यूटी रियायतें हैं जो द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।

बता दें कि पीएम मोदी और ट्रंप आखिरी बार नवंबर में अर्जेंटीना में मिले थे। जिस मुलाकात में दोनो के बीच व्यापार के मुद्दों, ईरान और रूस से रक्षा खरीद पर द्विपक्षीय में बढ़ रहे मतभेद को लेकर बात हुई थी। वहीं पिछले महीने डोनाल्ड ने पीेएम मोदी को उनकी शानदार जीत के लिए बधाई दी थी। भारत में पोम्पओ की यात्रा एस जयशंकर के लिए एक बड़ी सफलता होगी क्योंकि उनके विदेश मंत्री के रूप में पोम्पओ की ये पहली यात्रा होगी। वहीं उनके फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन के साथ अगस्त में फ्रांस में जी -7 की बैठक में जाने की उम्मीद है, जहां भारत को ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के साथ पर्यवेक्षक के रूप में आमंत्रित किया गया है।

 वहीं डेटा स्थानीयकरण और प्रस्तावित ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए संशोधित में सामने आया है कि विदेशी निवेश मानदंडों के अलावा, डेयरी उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों के प्रस्तावित अमेरिकी निर्यात पर प्रतिबंधों पर पिछले एक साल से भारत-अमेरिका व्यापार संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। पिछले हफ्ते, अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने वाले किसी भी देश के खिलाफ प्रतिबंधों की धमकी दी और रूस के एस -400 मिसाइल रक्षा प्रणाली को खरीदने के खिलाफ चेतावनी दी। भारत और रूस ने पिछले साल एस -400 प्रणाली की खरीद के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए  और अगले साल से  इन मिसाइल की डिलीवरी शुरू हो जाएगी।

वहीं सरकार ने कहा कि भारत और अमेरिका, जनरल सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंस के तहत शुल्क रियायतें वापस लेने के वाशिंगटन के फैसले के बाद संबंधों को सुधारने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। “भारत, हमारे द्विपक्षीय व्यापार चर्चा के हिस्से के रूप में, आगे पारस्परिक रूप से स्वीकार्य रास्ता खोजने के प्रयास में महत्वपूर्ण अमेरिकी अनुरोधों पर प्रस्ताव पेश किया था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसे अमेरिका द्वारा स्वीकृति नहीं मिली, ”सरकार ने एक बयान में कहा।

सरकार ने बताया कि जीएसपी अमेरिका जैसे विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को दिए गए लाभ और “एकतरफा, गैर-पारस्परिक और गैर-भेदभावपूर्ण” हैं। वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने जोर देकर कहा था कि इस कदम का “न्यूनतम और मध्यम प्रभाव” राशि होगी। जीएसपी श्रेणी में आने वाले अमेरिका के 5.6 बिलियन डॉलर के निर्यात पर 190 मिलियन डॉलर है।

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