अंतरिक्ष में ISRO की बड़ी छलांग, अब खुद का space station बनाएगा भारत

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इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना ‘गगनयान मिशन’ का विस्तार होगी। सिवन ने दिल्ली में कहा, “हमें मानव अंतरिक्ष मिशन (human space mission) के लॉन्च के बाद गगनयान (Gaganyaan) कार्यक्रम को बनाए रखना है। इस संदर्भ में, भारत की अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना है।

वहीं, जुलाई में चंद्रमा पर भारत का तिरंगा लहराएगा। ISRO ने चंद्रयान-2 मिशन की पहली तस्वीरें जारी की हैं। चंद्रयान-2 को 9 से 16 जुलाई के बीच छोड़ा जाएगा। चंद्रयान-2 में एक भी पेलोड विदेशी नहीं है। इसके सभी हिस्से पूरी तरह से स्वदेशी हैं, जबकि, चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर में 3 यूरोप और 2 अमेरिका के पेलोड्स थे।

ISRO

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो 11 साल बाद एक बार फिर चंद्रमा की सतह को खंगालने के लिए तैयार है। इसरो ने उम्मीद जताई है कि चंद्रयान-2 चंद्रमा पर 6 सितंबर को दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं, जिनके नाम ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं।

इस प्रोजेक्ट की लागत 800 करोड़ रुपए है। 9 से 16 जुलाई के बीच चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी 384400 किलोमीटर रहेगी। अगर मिशन सफल हुआ तो अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत चांद पर रोवर उतारने वाला चौथा देश होगा।

नवंबर 2007 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट में साथ काम करेगा। वह इसरो को लैंडर देगा। 2008 में इस मिशन को सरकार से अनुमति मिली। 2009 में चंद्रयान-2 का डिजाइन तैयार कर लिया गया।

जनवरी 2013 में लॉन्चिंग तय थी, लेकिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस लैंडर नहीं दे पाई। फिर इसकी लॉन्चिंग 2016 में तय की गई। हालांकि, 2015 में ही रॉसकॉसमॉस ने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए।

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