अमेरिका-इजराइल तनाव पर नई रिपोर्ट से बढ़ी हलचल, जासूसी के दावों ने खड़े किए सवाल
दुनिया में अमेरिका और इजराइल को सबसे करीबी सहयोगियों में गिना जाता है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। अमेरिका-इजराइल तनाव को लेकर आई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों को अपने ही सहयोगी देश इजराइल से खुफिया खतरा महसूस हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी रक्षा मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों ने इजराइल से जुड़े संभावित जासूसी खतरों का नया आकलन तैयार किया है। हालांकि अमेरिका और इजराइल दोनों ने इन दावों को खारिज किया है, लेकिन रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
आखिर क्यों बढ़ी अमेरिका-इजराइल तनाव की चर्चा?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) ने इजराइल से जुड़े खतरे के स्तर को बढ़ाकर “क्रिटिकल” श्रेणी में रखा है। एजेंसी का मानना है कि इजराइल अमेरिका और ईरान से जुड़ी संवेदनशील रणनीतिक चर्चाओं की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है। बताया गया है कि इस विषय पर सात पन्नों का एक दस्तावेज भी तैयार किया गया है, जिसमें कई घटनाओं का उल्लेख है। इन्हीं घटनाओं के आधार पर अमेरिका-इजराइल तनाव को लेकर नई बहस शुरू हुई है। हालांकि व्हाइट हाउस और इजराइल के अधिकारियों ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।
अमेरिकी अधिकारी क्यों अपनाते हैं अतिरिक्त सुरक्षा उपाय?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल दौरे पर जाने वाले कई अमेरिकी अधिकारी विशेष सुरक्षा उपाय अपनाते हैं। इनमें बर्नर फोन और क्लीन लैपटॉप का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा संवेदनशील बातचीत होटल के कमरों में करने से भी बचा जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि खुफिया जानकारी जुटाने के मामले में इजराइल काफी सक्रिय माना जाता है। इसी वजह से अमेरिका-इजराइल तनाव से जुड़ी चिंताओं के बीच अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर दोनों देशों ने अपने संबंधों को मजबूत और भरोसेमंद बताया है।
ईरान संघर्ष ने क्यों बढ़ाई चिंताएं?
रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र के पास ईरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया है। CENTCOM के मुताबिक पहले ईरान के चार अटैक ड्रोन मार गिराए गए और उसके बाद संभावित हमलों को रोकने के लिए रडार साइट्स पर कार्रवाई की गई। जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी मिसाइल हमलों का दावा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को लेकर चल रही रणनीतिक चर्चाओं ने अमेरिका-इजराइल तनाव से जुड़े सवालों को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

मिसाइल क्षमता को लेकर अमेरिका और खुफिया एजेंसियों में मतभेद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि हालिया हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता काफी कमजोर हो गई है और उसके पास सीमित मिसाइलें बची हैं। लेकिन दूसरी ओर कुछ अमेरिकी खुफिया आकलनों में कहा गया है कि ईरान ने अपनी अधिकांश मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसके पास अब भी पर्याप्त मिसाइल भंडार मौजूद है। इन अलग-अलग दावों ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इसी कारण अमेरिका-इजराइल तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर लगातार निगरानी में हैं।
पिछले 24 घंटे में सामने आए बड़े घटनाक्रम
मध्य पूर्व से जुड़े हालिया घटनाक्रमों में कई महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भविष्य में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत संभव हो सकती है। वहीं ईरान ने दो हजार से अधिक कैदियों को राहत देने का फैसला किया है। दूसरी तरफ दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमले जारी रहने की खबरें भी सामने आई हैं। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान के तेल निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं आयरलैंड ने इजराइल के दो मंत्रियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है। इन सभी घटनाओं ने क्षेत्रीय राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
आगे क्या असर पड़ सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल अमेरिका और इजराइल के रणनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं। हालांकि जासूसी से जुड़े दावों और ईरान को लेकर बढ़ते तनाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में अमेरिका-इजराइल तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम वैश्विक राजनीति के केंद्र में बने रह सकते हैं। फिलहाल सभी पक्ष आधिकारिक तौर पर सहयोग और कूटनीतिक संवाद पर जोर दे रहे हैं।