Brij Bhushan Sharan Singh
Brij Bhushan Sharan Singh: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास, घटनाओं की रिपोर्ट करने में बिना संतोषजनक कारण के हुई देरी और घटना के बाद का आचरण अभियोजन पक्ष के दावों को विश्वसनीय नहीं बनाता। अदालत ने इन आधारों पर दोनों आरोपियों को सम्मानपूर्वक बरी करने का आदेश दिया।
2023 में पहलवानों का देशव्यापी आंदोलन बना था चर्चा का केंद्र
यह मामला वर्ष 2023 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और संगीता फोगाट समेत कई नामी पहलवानों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों तक धरना दिया था। पहलवानों ने आरोप लगाया था कि बृजभूषण शरण सिंह ने वर्ष 2016 से 2019 के बीच भारतीय कुश्ती महासंघ के कार्यालय, अपने आधिकारिक आवास और विदेश दौरों के दौरान कई महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया। आरोपों में एक नाबालिग पहलवान का मामला भी शामिल था, जिसने इस विवाद को और गंभीर बना दिया था।
Read More: Datia by election result: कांटे की टक्कर में बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने, हर राउंड में बदल रहे समीकरण
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक निगरानी समिति (ओवरसाइट कमेटी) का गठन किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मई 2023 में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसके बाद जून 2023 में पुलिस ने लगभग 1,000 पन्नों की चार्जशीट राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने और आपराधिक धमकी से जुड़े आरोप तय किए थे। हालांकि, बृजभूषण शरण सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से झूठा फंसाया गया है तथा जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई।
नाबालिग पहलवान के मामले में पहले ही बंद हो चुकी थी जांच
इस पूरे विवाद में नाबालिग पहलवान से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी। पुलिस का कहना था कि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस या पुष्ट साक्ष्य नहीं मिला। मई 2025 में दिल्ली की अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी और उस मामले को बंद कर दिया गया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उपलब्ध साक्ष्य शिकायत का समर्थन नहीं करते और आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद नहीं हैं।
फैसले के बाद फिर शुरू हुई कानूनी और राजनीतिक बहस
दिल्ली कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर Brij Bhushan Sharan Singh के समर्थक इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता और कानून की जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिला अधिकारों और खेल जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि इस फैसले पर व्यापक चर्चा होगी। यह मामला भारतीय खेल प्रशासन, खिलाड़ियों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ी बहस का अहम हिस्सा बना रहेगा। अदालत के फैसले ने फिलहाल बृजभूषण शरण सिंह को कानूनी राहत जरूर दी है, लेकिन इस पूरे विवाद ने खेल संगठनों में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और विश्वास को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े किए हैं।