Viral Video
Viral Video : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का एक बाढ़ और जलभराव से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद शहर की बुनियादी सुविधाओं, खासकर ड्रेनेज सिस्टम और बरसाती जल निकासी व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि लगातार हो रही मानसूनी बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या अब भी बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर उस वादे की याद दिला दी, जिसमें वाराणसी को जापान के क्योटो शहर की तर्ज पर विश्वस्तरीय शहर बनाने की बात कही गई थी।
12 साल बाद भी ड्रेनेज व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधित्व के 12 वर्षों बाद भी वाराणसी के कई इलाकों में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि अधूरी स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज परियोजनाएं, नालों की नियमित सफाई में कमी और नगर निकाय की रखरखाव व्यवस्था इस समस्या की बड़ी वजह हैं। हर मानसून में सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होता है। उनका मानना है कि बड़े विकास कार्यों के साथ-साथ शहर की मूलभूत नागरिक सुविधाओं पर भी समान रूप से ध्यान देने की जरूरत है।
समर्थकों ने गिनाईं केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धियां
दूसरी ओर, सरकार के समर्थकों का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद देश में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। उनके अनुसार, भारत की लगभग 98 प्रतिशत सौर ऊर्जा क्षमता इसी अवधि में विकसित हुई है। इसके अलावा देश के लगभग 85 प्रतिशत एक्सप्रेसवे भी इसी दौरान बने हैं। सड़क नेटवर्क में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और राष्ट्रीय स्तर पर सड़कों की कुल लंबाई 2014 से पहले लगभग 3.86 लाख किलोमीटर से बढ़कर वर्ष 2026 तक 4.11 लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है। समर्थकों का तर्क है कि इन बड़े प्रोजेक्ट्स ने देश के आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी को नई गति दी है।
राष्ट्रीय विकास और स्थानीय चुनौतियों के बीच संतुलन की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स महत्वपूर्ण हैं, लेकिन शहरों की स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान भी उतना ही आवश्यक है। वाराणसी का हालिया बाढ़ वीडियो इसी अंतर को उजागर करता है, जहां व्यापक विकास के बावजूद स्थानीय स्तर पर जल निकासी, नगर रखरखाव और शहरी प्रबंधन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। जानकारों का कहना है कि यदि स्टॉर्म वाटर सिस्टम, ड्रेनेज नेटवर्क और नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली को और मजबूत किया जाए, तो भविष्य में मानसून के दौरान ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।