Delhi Private University Bill
Delhi Private University Bill: दिल्ली मे प्राइवोट युनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन के लिए अलग कानूनी व्यवस्था का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली कैैबिनेट ने शुक्रवार को दिल्ली प्राइवेट युनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राजधानी में उच्च शिक्षा के आवसर का विस्तार करना और छात्रो के पढ़ाई के लिए दुसरे राज्यों या विदेश जाने की जरुरत कम करना है। हालांकि, बिल को कानून का रुप देने से पहले इसे दिल्ली विधानसभा मे विधायी प्रक्रिया से गुजारना होगा। सरकार का दावा है की इस कानून के जरिए दिल्ली में गुणवत्तपूर्ण उच्च शिक्षा के लिए नए संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा।
हर कोर्स में दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित
प्रस्तावित Delhi Private University Bill की सवसे अहम विशेषता दिल्ली के छात्रों के लिए सीटों का आरक्षण है। बिल के तहत प्राइवेट युनिवर्सिटी के हर कोर्स में 25 फीसदी सीटें दिल्ली के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। इन सीटो पर दाखिला दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीती के अनुसार होगा। सरकार का मानना है कि दिल्ली में स्थापित होने वाली निजी यूनिवर्सिटीज का लाभ स्थानीय छात्रों को भी मिलना चाहिए। इस प्रावधान से दिल्ली के विद्यार्थियो के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
मेरिट-कम-मीन्स के आधार पर फीस में राहत
बिल में दिल्ली के छात्रों के लिए मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति के आधार पर छात्रों को फीस में अलग-अलग स्तर पर छूट मिलेगी। प्रस्ताव के अनुसार, 5 फीसदी दिल्ली के छात्रों को पूरी फीस में छूट, 10 फीसदी छात्रों को 50 फीसदी फीस माफी और 10 फीसदी छात्रों को 25 फीसदी फीस में छूट देने का प्रावधान है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का अवसर मिलने की उम्मीद है।
सरकार की निगरानी में काम करेंगी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज
प्रस्तावित कानून के अनुसार दिल्ली सरकार को नोटिफिकेशन के जरिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने की शक्ति मिलेगी। हालांकि, सभी विश्वविद्यालयों को UGC और संबंधित वैधानिक नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करना होगा। यूनिवर्सिटीज के लिए यूनिटरी मॉडल प्रस्तावित है, यानी उन्हें अपने मुख्य कैंपस के जरिए संचालित किया जाएगा और संबद्ध कॉलेज चलाने की अनुमति नहीं होगी। वहीं दिल्ली में अतिरिक्त कैंपस, रीजनल सेंटर और स्टडी सेंटर स्थापित किए जा सकेंगे। यूनिवर्सिटी स्थापित करने वाली संस्था के पास कम से कम 30 साल के लिए जमीन का स्वामित्व या लीज अधिकार होना भी जरूरी होगा।
उच्च शिक्षा मंत्री होंगे यूनिवर्सिटी के विजिटर
बिल में दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री को प्रत्येक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का विजिटर बनाए जाने का प्रस्ताव है। विजिटर को यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगने, निरीक्षण करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जरूरी निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक, अकादमिक और वित्तीय मामलों की जांच भी कराई जा सकेगी। यूनिवर्सिटी में चांसलर, वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन जैसे पद होंगे। इसके अलावा अकादमिक काउंसिल और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट जैसी संस्थाएं प्रशासनिक और शैक्षणिक फैसलों में भूमिका निभाएंगी।