August 29, 2026

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UP Election 2027: ओवैसी का ‘ब्राह्मण कार्ड, AIMIM क्यों बदल रही है अपनी सियासी रणनीति?

UP Election 2027

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UP Election 2027:  हैदराबाद से सांसद और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नई सियासी रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। पार्टी ने एक ब्राह्मण चेहरे को टिकट देने का ऐलान किया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में ‘ब्राह्मण कार्ड’ की चर्चा तेज हो गई है। AIMIM को लंबे समय से मुस्लिम राजनीति से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अब पार्टी अन्य सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

2022 में साहिबाबाद से उतारा था ब्राह्मण उम्मीदवार

AIMIM ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में पहली बार एक हिंदू ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा सीट से पंडित मनमोहन झा उर्फ गामा को टिकट दिया गया था, जो इससे पहले करीब 24 वर्षों तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे थे। AIMIM की उस चुनावी सूची में 66 उम्मीदवारों में 11 हिंदू समुदाय से थे। मनमोहन झा को चुनाव में 4,305 वोट मिले थे। पार्टी ने इस कदम को सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की अपनी राजनीतिक नीति के रूप में पेश किया था।

यूपी में ब्राह्मण वोट का गणित क्यों अहम?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनकी आबादी करीब 10 से 12 प्रतिशत बताई जाती है, लेकिन कई क्षेत्रों में उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव अधिक है। भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस समेत विभिन्न दल इस वर्ग को साधने की कोशिश कर रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी ब्राह्मण समाज को अपने राजनीतिक एजेंडे से जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में AIMIM की रणनीति को मुस्लिम और ब्राह्मण समेत अन्य सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सिर्फ ब्राह्मण नहीं, व्यापक सामाजिक समीकरण पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, AIMIM केवल मुस्लिम वोटों पर निर्भर रहने के बजाय पिछड़ी जातियों और सवर्ण समुदायों के बीच भी अपना आधार मजबूत करना चाहती है। ओवैसी इससे पहले अन्य सामाजिक समुदायों के नेताओं और मुद्दों को भी अपनी राजनीति में महत्व देते रहे हैं। पार्टी महाराष्ट्र और बिहार के सीमांचल क्षेत्र में अपने प्रदर्शन के जरिए भी राजनीतिक विस्तार की कोशिश कर चुकी है। 2027 के चुनाव के लिए ओवैसी ने बहराइच के मटेरा से अपने अभियान की शुरुआत करते हुए राजनीतिक हिस्सेदारी और बराबरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

‘मुस्लिम पार्टी’ से ‘सबकी पार्टी’ बनने की कोशिश?

ओवैसी का ‘ब्राह्मण कार्ड’ केवल एक उम्मीदवार तक सीमित है या व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा, यह आने वाले समय में साफ होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण मतदाताओं को AIMIM के पक्ष में आकर्षित करना पार्टी के लिए आसान चुनौती नहीं होगी, क्योंकि इस समुदाय का झुकाव परंपरागत रूप से भाजपा और कांग्रेस जैसे दलों की ओर रहा है। दूसरी ओर, ओवैसी समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में भी अपनी राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 2027 से पहले AIMIM की यह रणनीति उत्तर प्रदेश के बदलते सामाजिक और चुनावी समीकरणों में कितना असर डालती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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