चिन्मय कृष्ण दास की मां का निधन, 5 घंटे की पैरोल में अंतिम संस्कार में पहुंचे संत
चिन्मय कृष्ण दास
चिन्मय कृष्ण दास : बांग्लादेश में हिंदू अधिकारों की आवाज उठाने वाले और इस्कॉन से जुड़े संत चिन्मय कृष्ण दास इन दिनों जेल में बंद हैं। इसी बीच उनकी मां संध्या रानी धर का निधन हो गया। मां के अंतिम समय में चिन्मय कृष्ण दास उनके साथ नहीं रह सके। बांग्लादेश के अधिकारियों ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए केवल पांच घंटे की पैरोल दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में चिन्मय कृष्ण दास को फूट-फूटकर रोते हुए देखा जा सकता है, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।
कैंसर से जूझ रही थीं चिन्मय कृष्ण दास की मां
जानकारी के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास की 70 वर्षीय मां संध्या रानी धर लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं। उनका इलाज हथजारी स्थित एक अस्पताल में चल रहा था। बताया गया कि उन्होंने जीवन के अंतिम दिन अस्पताल में नहीं, बल्कि अपने बेटे के आश्रम के माहौल में बिताने की इच्छा जताई थी। हालांकि परिस्थितियों के चलते मां और बेटे की यह आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उनकी मौत के बाद सामने आए वीडियो ने लोगों को भावुक कर दिया है।
चिन्मय कृष्ण दास को सिर्फ 5 घंटे की पैरोल
‘द डेली स्टार’ की खबर के अनुसार, चटगांव के जिला उपायुक्त मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने परिवार की ओर से दिए गए आवेदन के बाद चिन्मय कृष्ण दास को पांच घंटे की पैरोल पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया। संध्या रानी धर का गुरुवार सुबह अस्पताल में निधन हुआ था। इसके बाद चिन्मय दास के भाई की ओर से आवेदन दिया गया। जिला उपायुक्त ने कहा कि मां के निधन के बाद कानून के अनुसार उन्हें पांच घंटे के लिए पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया गया।
देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हुए थे चिन्मय कृष्ण दास
चिन्मय कृष्ण दास को नवंबर 2024 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप लगाया गया था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन हुए और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी थी। जेल में बंद रहने के दौरान मां के निधन की खबर ने इस पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्हें मां के निधन पर रोते हुए देखा जा सकता है।
चिन्मय कृष्ण दास की मां से मिलने की अनुमति पर सवाल
चिन्मय कृष्ण दास की मां लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर बांग्लादेश की न्यायिक व्यवस्था और वहां हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि गंभीर बीमारी से जूझ रही मां से मिलने के लिए चिन्मय कृष्ण दास को समय रहते अनुमति क्यों नहीं दी गई। पांच घंटे की पैरोल में अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
