हरियाणा के बेटे ने रचा इतिहास, एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीत कर देश का सीना किया चौड़ा।
खेलों की दुनिया से भारत के लिए एक और गौरवशाली खबर आई है। एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के हिमांशु जाखड़ ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का झंडा ऊंचा कर दिया। उत्तर भारत खासकर हरियाणा के लिए यह पल गर्व और प्रेरणा से भरा हुआ है।
हिमांशु ने पुरुषों की डिस्कस थ्रो (चक्का फेंक) स्पर्धा में अव्वल स्थान हासिल करते हुए एशिया के कई मजबूत खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। उनकी यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह देश की एथलेटिक्स क्षमताओं को दर्शाने वाला एक मजबूत संकेत भी है।
कौन हैं हिमांशु जाखड़?
हरियाणा के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु जाखड़ ने बहुत कम उम्र में एथलेटिक्स की दुनिया में कदम रखा था। कठिन अभ्यास, दृढ़ निश्चय और अनुशासन के बल पर उन्होंने खुद को उस मुकाम तक पहुंचाया जहाँ आज पूरा देश उनकी तारीफ कर रहा है।
उनका परिवार एक साधारण किसान परिवार है, लेकिन उनकी मेहनत ने उन्हें असाधारण बना दिया। उत्तर भारत की मिट्टी से उगले ये सितारे आज पूरी दुनिया में भारत की ताकत का उदाहरण बन रहे हैं।
स्वर्ण पदक का सफर
इस साल की एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो मुकाबला बेहद कठिन था। चीन, ईरान और जापान जैसे देशों के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा जबरदस्त थी। लेकिन हिमांशु ने एक के बाद एक प्रयासों में संतुलन, ताकत और तकनीक का ऐसा संगम दिखाया कि मैदान में तालियों की गूंज सुनाई दी।
उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 62.15 मीटर दूर चक्का फेंक कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह प्रदर्शन न केवल उनका व्यक्तिगत बेस्ट रहा, बल्कि इस साल एशियन स्तर पर सबसे बेहतरीन थ्रो में से एक था।
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पूरा देश हुआ गर्वित, बधाइयों की बौछार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर खेल मंत्री और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ तक—सभी ने हिमांशु जाखड़ को उनके स्वर्ण पदक के लिए बधाई दी। सोशल मीडिया पर #HimanshuJakhar ट्रेंड करने लगा और लाखों लोगों ने उन्हें अपना प्यार और समर्थन दिया।
हरियाणा सरकार ने भी उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को सम्मानित करने की घोषणा की है। कई स्पोर्ट्स आइकन और पूर्व खिलाड़ियों ने हिमांशु की इस जीत को “नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा” बताया है।
उत्तर भारत से एक और सितारा
उत्तर भारत, खासकर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, हमेशा से देश को कुश्ती, कबड्डी और एथलेटिक्स में बेहतरीन खिलाड़ी देता रहा है। हिमांशु जाखड़ ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है और यह साबित किया है कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
उनकी यह जीत देश के छोटे गांवों और कस्बों में खेल की भावना को और मज़बूती देगी।
हिमांशु का संदेश: “सपनों को जीना सीखो”
गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीडिया से बातचीत में हिमांशु ने कहा:
“यह जीत सिर्फ मेरी नहीं है, यह मेरे कोच, मेरे माता-पिता और पूरे भारत की जीत है। मैंने हमेशा अपने सपनों पर विश्वास किया और आज वही सपना साकार हुआ है।”
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हार से डरने की ज़रूरत नहीं, बल्कि हर हार से कुछ सीखकर आगे बढ़ना ही असली जीत होती है।
भविष्य की उम्मीदें
हिमांशु अब अगले साल होने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक क्वालिफायर्स की तैयारी में जुट जाएंगे। उनके गोल्ड मेडल ने उन्हें विश्व स्तर पर भारत का मजबूत दावेदार बना दिया है।
भारतीय खेल मंत्रालय और एथलेटिक्स फेडरेशन अब उन्हें उच्च स्तरीय ट्रेनिंग, न्यूट्रिशन और सपोर्ट देने की तैयारी में है ताकि वे आने वाले टूर्नामेंट्स में देश के लिए और पदक ला सकें।
हिमांशु जाखड़ की जीत सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवा खिलाड़ियों की कहानी है जो सीमित संसाधनों में भी अपने सपनों को पंख दे रहे हैं। उत्तर भारत से निकला यह सितारा आज भारत के खेल आकाश में चमक रहा है।

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