भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारत अब न सिर्फ हर आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा, बल्कि उसे रोकने की पूरी तैयारी भी कर चुका है। डीजीएमओ स्तर की बातचीत के साथ-साथ तीनों सेनाओं ने मिलकर एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया—”भय बिन होई न प्रीति”।
सेना के डीजी ऑपरेशंस एके भारती ने तुलसीदास की चौपाई “विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।” पढ़कर पाकिस्तान को चेताया कि भारत की शांति की अपील को कमजोरी समझने की भूल न करे। जैसे श्रीराम ने विनय के बाद युद्ध का मार्ग चुना, वैसे ही भारत भी अब रणनीतिक संयम के बाद निर्णायक जवाब देने में सक्षम है।
भारतीय नौसेना के डीजीएमओ वाइस एडमिरल ए एन प्रसाद ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए नौसेना ने मल्टीलेयर सुरक्षा व्यवस्था की थी। अत्याधुनिक राडार, लड़ाकू विमान और टोही तंत्र ने पाकिस्तान के किसी भी हमले को नाकाम कर दिया। एयर डिफेंस तैयार था और किसी भी दुश्मन विमान को सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही रोक दिया गया।
भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की चीनी मिसाइल PL-15 को मार गिराया और उसके ड्रोन सिस्टम को निष्क्रिय किया। स्वदेशी ‘आकाश सिस्टम’ और काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी की मदद से नूरखान एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह किया गया। डीजीएओ भारती ने कहा कि हमारी एयर डिफेंस सिस्टम एक अजेय दीवार है, जिसे भेदना दुश्मन के लिए असंभव है।
सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की लड़ाई पाकिस्तान से नहीं, बल्कि आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले तत्वों से है। 7 मई को भारत ने केवल आतंकी ठिकानों पर निशाना साधा। लेकिन पाकिस्तान ने जब उन आतंकियों का साथ दिया, तो उसे जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। सेना ने कहा कि पाकिस्तान ने इसे अपनी लड़ाई बना ली, जबकि भारत केवल आतंकी संगठनों पर हमला कर रहा था।
सेनाओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत ‘याचना नहीं, अब रण होगा’ गाने से हुई, जो पूरे अभियान की भावना को दर्शाता है। एयर मार्शल एके भारती ने दोहराया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगा।
भारत का स्पष्ट संदेश है—अब हम न तो सिर्फ प्रतिक्रिया देंगे, बल्कि आतंक के हर स्रोत को जड़ से खत्म करने की नीति पर चलेंगे। दुश्मन को न सिर्फ जवाब मिलेगा, बल्कि वह ऐसा सबक सीखेगा जिसे भूलना नामुमकिन होगा।
इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने संयम के साथ ताकत का प्रदर्शन किया है। दुनिया को भारत की सैन्य तैयारी, तकनीकी श्रेष्ठता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए उसकी प्रतिबद्धता एक बार फिर साफ दिखाई दी है।

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