लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस समर्थक वोटरों के नाम योजनाबद्ध तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है और प्रभावित लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है।

कलबुर्गी का उदाहरण
राहुल गांधी ने कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ कांग्रेस समर्थकों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों के नाम हटाने की कोशिश की गई, उन्हें खुद इस बात का कोई अंदाजा नहीं था। राहुल ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया।
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मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र की हत्या करने वालों और “वोट चोरों” की रक्षा कर रहे हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि वह एक हफ्ते के अंदर कर्नाटक CID के साथ पूरी जानकारी साझा करे, वरना यह मामला और बड़ा हो सकता है।
“अभी तो शुरुआत है”
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह तो बस शुरुआत है, असली धमाका अभी बाकी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने देश, संविधान और लोकतंत्र से बहुत प्यार करते हैं। बिना तथ्यों और सबूतों के वह कोई बयान नहीं देते। इसलिए, उनका यह आरोप सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि तथ्य आधारित है।
लोकतंत्र पर सवाल
राहुल गांधी के आरोप ने भारतीय लोकतंत्र और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर वाकई कांग्रेस समर्थकों के वोट लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा हमला होगा। वहीं, बीजेपी और चुनाव आयोग ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जनता की राय क्या?
यह आरोप राजनीतिक हलचल तो मचाता है, लेकिन असली सवाल जनता के बीच है – क्या सच में वोट चोरी हो रही है, या यह सिर्फ एक राजनीतिक चाल है? राहुल गांधी ने जो दावा किया है, उसके सबूत आने बाकी हैं। लेकिन इस बयान से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विपक्ष सरकार व चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठा रहा है।

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