नवरात्रि का दूसरा दिन समर्पित है तप की देवी माँ ब्रह्मचारिणी को‘ब्रह्म’ का अर्थ है परम सत्य और ‘चारिणी’ का अर्थ है चलने वाली। अर्थात् वह देवी जो आत्मिक और परमशक्ति की राह पर चलती हैं।माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप शांत, सरल और तेजस्वी माना जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल होता है, जो साधना और त्याग के प्रतीक हैं।कहते हैं कि जब माँ पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया, तो उन्होंने वर्षों तक केवल बेलपत्र, निर्जल और निराहार रहकर तपस्या की। इसी तपस्विनी रूप को हम ‘माँ ब्रह्मचारिणी’ के नाम से पूजते हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से लाभ
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को मिलता है साधना की शक्तिआत्मविश्वासजीवन में स्थिरताइसके अलावा, मानसिक तनाव दूर होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत होती है।
भोग और शुभ रंग
माँ को मिश्री और चीनी मिला हुआ दूध अति प्रिय है। यह भोग न केवल देवी को प्रसन्न करता है, बल्कि साधक को मीठा और मधुर फल भी देता है।आज का शुभ रंग है सफेद, जो शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है।इसलिए पूजा के समय सफेद साड़ी, कुर्ता या दुपट्टा पहनें और स्वयं को माँ की दिव्यता से जोड़ें।
पूजा का सही तरीका और मंत्र
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें:
- शांत मन से पूजा करें
- कमंडल और जपमाला का चित्र या प्रतिमा रखें
- मंत्र का जाप करें: ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’
यदि आप साधना की राह पर हैं या जीवन में स्थिरता चाहते हैं, तो माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा आपके लिए वरदान साबित हो सकती है।

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