भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा नीति में एक नया युग शुरू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 दिसंबर 2025 को सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल, 2025 को मंजूरी दे दी। संसद के शीतकालीन सत्र में पारित यह विधेयक अब कानून बन चुका है। यह बिल देश की क्लीन एनर्जी महत्वाकांक्षाओं को नई गति देगा और परमाणु क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलेगा। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना है, जो वर्तमान 8.78 गीगावॉट से कई गुना अधिक है।
मुख्य बदलाव क्या हैं?
SHANTI बिल सबसे बड़ा सुधार यह लाता है कि यह एटॉमिक एनर्जी एक्ट 1962 और सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट 2010 को पूरी तरह निरस्त कर देता है। ये पुराने कानून न्यूक्लियर क्षेत्र की प्रगति में बड़ी बाधा माने जाते थे। अब एक एकीकृत और आधुनिक कानूनी ढांचा लागू होगा।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव निजी क्षेत्र की भागीदारी है। अब प्राइवेट कंपनियां और जॉइंट वेंचर्स सरकारी लाइसेंस लेकर न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और डीकमीशनिंग कर सकेंगी। विदेशी कंपनियां भी भारतीय भागीदारों के साथ मिलकर इसमें शामिल हो सकती हैं। यह कदम निवेश को आकर्षित करेगा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा, जैसे स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) का विकास।
हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ क्षेत्र पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहेंगे। यूरेनियम खनन, थोरियम प्रसंस्करण, ईंधन संवर्धन, स्पेंट फ्यूल रीप्रोसेसिंग और हाई-लेवल रेडियोएक्टिव वेस्ट मैनेजमेंट केवल केंद्र सरकार या सरकारी संस्थानों के पास रहेगा। इससे सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा।
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क्यों जरूरी था यह सुधार?
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग, क्लाइमेट चेंज लक्ष्य और नेट-जीरो 2070 की प्रतिबद्धता को देखते हुए न्यूक्लियर एनर्जी महत्वपूर्ण है। यह क्लीन, बेसलोड पावर प्रदान करती है, जो सोलर-विंड जैसी अंतराल वाली ऊर्जा का पूरक है। पुराने कानूनों में सप्लायर लायबिलिटी की सख्त शर्तें विदेशी निवेश को रोक रही थीं। SHANTI बिल लायबिलिटी को ऑपरेटर तक सीमित करता है और ग्रेडेड स्ट्रक्चर लाता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल खाता है। इससे वेस्टिंगहाउस, EDF और रोसाटॉम जैसी कंपनियां भारत में प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ा सकेंगी।
प्रभाव और भविष्य
यह कानून न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन, AI डेटा सेंटर्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसी उभरती जरूरतों को पूरा करेगा। निजी भागीदारी से प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे और करीब 200-214 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित हो सकता है। कंपनियां जैसे रिलायंस, अडानी, टाटा पावर और L&T इसमें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
विपक्ष ने सुरक्षा और लायबिलिटी कम होने की चिंता जताई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानक अटल रहेंगे और एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड को मजबूत किया जाएगा।
SHANTI बिल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और क्लीन फ्यूचर का घोषणा-पत्र है। यह देश को वैश्विक न्यूक्लियर लीडर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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