नई दिल्ली/कैलिफोर्निया:भारत की टॉप टेक कंपनियों में शुमार जोहो कॉर्पोरेशन (Zoho Corporation) के फाउंडर श्रीधर वेम्बु (Sridhar Vembu) एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई कारोबारी उपलब्धि नहीं, बल्कि 30 साल पुरानी शादी का हाई-प्रोफाइल तलाक विवाद है। अमेरिका में चल रही इस कानूनी लड़ाई ने उस वक्त सनसनी मचा दी, जब एक अमेरिकी अदालत द्वारा कथित तौर पर वेम्बु को $1.7 बिलियन (करीब ₹15,000 करोड़) का बॉन्ड जमा करने के आदेश की खबर सामने आई।हालांकि, वेम्बु के वकीलों ने इस दावे को अपील के दायरे में बताया है और कहा है कि मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है।
अमेरिका से शुरू हुई कहानी
श्रीधर वेम्बु वर्ष 1989 में पीएचडी करने के लिए अमेरिका पहुंचे थे। पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात प्रमिला श्रीनिवासन से हुई। प्रमिला खुद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी हैं और अमेरिका में पली-बढ़ी हैं। दोनों ने वर्ष 1993 में शादी की और कैलिफोर्निया में अपना परिवार बसाया।
Zoho की नींव और पारिवारिक जीवन
शादी के कुछ साल बाद, 1996 में श्रीधर वेम्बु ने अपने भाइयों और मित्र टोनी थॉमस के साथ मिलकर AdventNet नाम की कंपनी की स्थापना की, जो आगे चलकर Zoho Corporation बनी। आज Zoho दुनिया की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिनी जाती है और इसका वैल्यूएशन अरबों डॉलर में है।इसी दौरान दंपती के एक बेटे का जन्म हुआ, जिसे आगे चलकर ऑटिज्म (Autism) होने का पता चला। इसके बाद प्रमिला श्रीनिवासन ने ऑटिज्म रिसर्च और जागरूकता के लिए दा ब्रेन फाउंडेशन (The Brain Foundation) की शुरुआत की। यह संस्था ऑटिज्म और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से जुड़े शोध पर काम करती है।
2020 के बाद बिगड़े रिश्ते
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2020 के आसपास श्रीधर वेम्बु और प्रमिला श्रीनिवासन के वैवाहिक संबंधों में दरारें गहरी होने लगीं। इसके बाद मामला अमेरिकी अदालत तक पहुंचा और तलाक की प्रक्रिया शुरू हुई। यहीं से यह विवाद हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया।हाल के दिनों में खबर आई कि एक यूएस कोर्ट ने वेम्बु को $1.7 बिलियन का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। यह राशि उनकी संपत्ति और Zoho से जुड़ी हिस्सेदारी को लेकर बताई जा रही है। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

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