January 23, 2026
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BJPअध्यक्ष चुनाव : आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी को मंगलवार, 20 जनवरी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने जा रहा है। लेकिन इससे पहले पार्टी के इतिहास में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। BJP के संस्थापक सदस्य और दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। BJP के इतिहास में यह पहली बार है जब पार्टी के ये दोनों वरिष्ठतम नेता अध्यक्ष चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया से बाहर हुए हैं।

BJP अध्यक्ष चुनाव कैसे मतदाता सूची से बाहर हुए आडवाणी और जोशी?

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का मतदाता सूची से बाहर होना किसी राजनीतिक फैसले का नतीजा नहीं, बल्कि संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़ा मामला है। BJP के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनावों का पूरा होना अनिवार्य होता है। इस बार दिल्ली प्रदेश में संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन अटक गया। चूंकि आडवाणी और जोशी दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य थे, इसलिए वे इस बार निर्वाचन मंडल का हिस्सा नहीं बन पाए।

आम सहमति से होता है BJP अध्यक्ष चुनाव का चयन

BJP अध्यक्ष चुनाव मे आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर, जानिए क्या है पूरा मामला में कुल 5708 निर्वाचक हिस्सा लेंगे। पार्टी की परंपरा के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन आम तौर पर आम सहमति से किया जाता है। इस बार अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह फिलहाल बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यह चुनाव औपचारिकता भर होगा।

मार्गदर्शक मंडल में बने रहेंगे आडवाणी और जोशी

हालांकि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस बार मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, लेकिन पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में उनकी भूमिका बनी रहेगी। वे संगठन को वैचारिक और रणनीतिक दिशा देने में पहले की तरह सक्रिय रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम BJP में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत देता है, जहां संगठनात्मक नियमों और प्रक्रियाओं को सख्ती से लागू किया जा रहा है, चाहे वह कितने ही वरिष्ठ नेता क्यों न हों।

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