Kuldeep Singh Sengar: दिल्ली हाईकोर्ट से उन्नाव रेप केस के दोषी और पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने रेप पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ मामले में उनकी सज़ा निलंबित करने की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट का साफ संदेश है कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रविंदर दुडेजा ने कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका को नामंज़ूर कर दिया, जिसमें उन्होंने 10 साल की सज़ा को सस्पेंड करने की मांग की थी। यह सज़ा उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में दी गई है।
Kuldeep Singh Sengar: जाने क्या है पूरा मामला
कुलदीप सिंह सेंगर अप्रैल 2018 से जेल में बंद हैं। एक तरफ जहां नाबालिग रेप केस में उन्हें उम्रकैद की सज़ा मिली है, तो वहीं दूसरी ओर कस्टोडियल डेथ केस में वे 10 साल की सज़ा काट रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 23 दिसंबर 2025 को उन्हें रेप केस में ज़मानत मिली थी, लेकिन 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उस ज़मानत पर रोक लगा दी। पीड़िता की ओर से पेश हुए वकील मेहमूद प्राचा ने कोर्ट में साफ कहा कि सेंगर की रिहाई से पीड़िता और उसके परिवार को गंभीर खतरा है। उन्होंने बताया कि आज भी पीड़िता को सोशल मीडिया पर लगातार परेशान और बदनाम किया जा रहा है।
सेंगर के तरफ से दी गई ये दलील
वहीं Kuldeep Singh Sengar की तरफ से दलील दी गई कि उन्होंने इस मामले में लगभग 9 साल जेल में बिता लिए हैं और सिर्फ करीब 11 महीने की सज़ा बाकी है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना के वक्त सेंगर मौके पर मौजूद नहीं थे और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के आधार पर उन्हें फंसाया गया है। लेकिन ट्रायल कोर्ट पहले ही कह चुका है. पीड़िता के परिवार के इकलौते कमाने वाले की मौत पर कोई नरमी नहीं दिखाई जा सकती। यही नहीं, इस मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य दोषियों को भी 10-10 साल की सज़ा सुनाई गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ एक बार फिर न्यायपालिका का सख्त रुख साफ हो गया है. कानून से ऊपर कोई नहीं। उन्नाव केस, जो पूरे देश को झकझोर कर रख गया था, आज भी इंसाफ और सुरक्षा पर बड़ा सवाल बना हुआ है।

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