सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में 23 जनवरी को होने वाली बसंत पंचमी पूजा और जुमे की नमाज के आयोजन को लेकर विशेष इंतजाम करने का आदेश दिया है। गुरुवार (22 जनवरी, 2025) को हुई सुनवाई में Supreme Court ने स्पष्ट किया कि दोनों समुदायों के कार्यक्रमों में किसी तरह का टकराव न हो। इसके लिए पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग स्थान और अलग रास्तों की व्यवस्था की जाएगी।
Supreme Court: सुनवाई में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि परिसर में दोनों धर्मों के अनुयायियों की आवागमन व्यवस्था सुरक्षित और अलग-अलग होनी चाहिए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक संस्था ने याचिका दाखिल की थी जिसमें मांग की गई थी कि बसंत पंचमी के दिन मुसलमानों को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति न दी जाए। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने कहा कि बसंत पंचमी की पूजा सूर्य उदय से सूर्यास्त तक होती है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने Supreme Court को बताया कि जुमे की नमाज का समय दोपहर 1 से 3 बजे तक निर्धारित है और इसे शिफ्ट नहीं किया जा सकता।
Supreme Court के आदेश के मुख्य बिंदु
- कोर्ट ने दोनों पक्षों के आने-जाने के अलग-अलग रास्ते तय करने का निर्देश दिया।
- मुस्लिमों के लिए नमाज का स्थान और हिंदू पक्ष के लिए पूजा का स्थान पहले से निर्धारित किया गया।
- प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वह भीड़ और कानून-व्यवस्था पर नजर रखे।
- मुस्लिम पक्ष को प्रवेश पास जारी करने का आदेश दिया गया, ताकि संख्या के हिसाब से नियंत्रण किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा कि इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, और प्रशासन को इस दिन व्यवस्थाओं में कठिनाइयाँ आ सकती हैं। एमपी सरकार और ASI ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि व्यवस्थाएँ पूरी तरह से सुनिश्चित की जाएंगी।
आगे की प्रक्रिया
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भोजशाला परिसर एक पुरातात्विक स्थल है और इसे लेकर दोनों पक्षों के दावे मौजूद हैं। मुख्य मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण Supreme Court ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कोई निर्णय नहीं दिया। अब यह मामला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास जाएगा और आगे की सुनवाई वहीं होगी।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों को आपसी सम्मान और प्रशासन सहयोग के साथ व्यवहार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश यह सुनिश्चित करता है कि बसंत पंचमी की पूजा और जुमे की नमाज दोनों ही शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों, और किसी भी तरह का विवाद या टकराव न हो।

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