Jharkhand, 23 जनवरी 2026: झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को एक बेहद तनावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब वरिष्ठ एडवोकेट महेश तिवारी और जज के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि अदालत ने वकील के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी कर दिया। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब महेश तिवारी अपनी बहस के दौरान अदालत की टिप्पणियों से असहमत हुए और उन्होंने सीधे जज से अपनी नाराजगी जताई।
Jharkhand: वकील ने कोर्ट में किया विरोध
महेश तिवारी ने अपनी सीट से खड़े होकर जज से कहा:“मैं अपने तरीके से बहस कर सकता हूं, न कि वैसे जैसे आप बताएंगे। ये ध्यान रखें कि किसी वकील को दबाने की कोशिश न करें। मैं बता रहा हूं।”जज ने जवाब दिया:“आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट ने अन्याय किया है।”लेकिन तिवारी ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा और सुझाव दिया कि वीडियो रिकॉर्डिंग देखी जाए, ताकि यह स्पष्ट हो कि उनकी कही बातों को गलत तरीके से नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जो कथन जज ने उद्धृत किया वह किसी और जज का था, न कि वर्तमान जज का।
वकील का जवाब और चेतावनी
महेश तिवारी ने अदालत में जोर देकर कहा:“मैंने आपसे सिर्फ अनुरोध किया था। न्यायपालिका की वजह से देश में आग भड़क रही है। ये मेरे शब्द हैं। किसी भी वकील को दबाने की कोशिश न कीजिए। आप जज हैं, इसलिए आप बहुत जानते हैं, और हम वकील हैं तो? मैं अपने तरीके से ही बहस करूंगा। मैंने भी 40 साल प्रैक्टिस की है।”उनका यह बयान कोर्ट में मौजूद अन्य वकीलों और उपस्थित जनता के लिए भी काफी चौंकाने वाला रहा।
Jharkhand हाईकोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस
विवाद बढ़ने के बाद, झारखंड हाईकोर्ट की पांच जजों की बेंच, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस तरलोक सिंह कर रहे थे, ने महेश तिवारी के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी वकील को अदालत के आदेशों के खिलाफ अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार सीमित है और अदालत की गरिमा बनाए रखना सर्वोपरि है।
कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला वकील और जज के बीच सीमाओं और अधिकारों के टकराव को दर्शाता है। वरिष्ठ वकीलों के अनुसार, अदालत में वकील का अधिकार है कि वह बहस करे, लेकिन अदालत की गरिमा के खिलाफ बयान देने पर अवमानना की कार्रवाई संभव है।विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि वीडियो रिकॉर्डिंग और तथ्यों का हवाला देने का अधिकार वकील को है, लेकिन उसका तरीका अदालत के नियमों और मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए।
निष्कर्ष
Jharkhand हाईकोर्ट में यह विवाद यह दिखाता है कि कोर्ट और वकील के बीच कभी-कभी बहस के दौरान टकराव हो सकता है। हालांकि, न्यायपालिका ने तुरंत कदम उठाकर अवमानना नोटिस जारी किया और यह संदेश दिया कि अदालत की गरिमा सबसे पहले है।यह मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है और इसके आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पूरा देश नजर बनाए हुए है

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