Tag: आतंकियों की मौत

  • पाकिस्तान-तालिबान टकराव टीटीपी के हमले के बाद सेना ने किया बड़ा ऑपरेशन

    पाकिस्तान-तालिबान टकराव टीटीपी के हमले के बाद सेना ने किया बड़ा ऑपरेशन

    पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। हाल ही में टीटीपी यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के घात में 11 सैनिकों की मौत के बाद, पाकिस्तानी सेना ने सबसे बड़ा जवाबी हमला किया। यह ऑपरेशन पाकिस्तान के ओरकज़ई इलाके में हुआ, जहां रातभर चलने वाले अभियान में सेना ने 30 आतंकियों को मार गिराया।

    टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई और आरोप
    पाकिस्तानी सेना ने मारे गए आतंकियों के टीटीपी से जुड़े होने का दावा किया। साथ ही, उन्हें भारत-प्रायोजित ख़्वारिज बताया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया कि अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा, “जो भी पाकिस्तान की शांति को तोड़ेगा, उसे मिटा दिया जाएगा।” वहीं, तालिबान सरकार को चेतावनी दी गई कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल पाकिस्तान पर हमले के लिए अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    काबुल का दावा और वास्तविक स्थिति
    हालांकि काबुल का दावा है कि वह अपनी ज़मीन किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा, लेकिन टीटीपी के बढ़ते हमले कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। पाकिस्तानी सेना का आरोप है कि टीटीपी के कई गुट अफ़ग़ानिस्तान की सरहद पार से हमले करते हैं। इस वजह से सेना अब क्लीन-अप ऑपरेशन पर उतर आई है और उसने ऐलान किया है कि यह जंग आख़िरी सांस तक लड़ी जाएगी।

    ओरकज़ई ऑपरेशन का महत्व
    ओरकज़ई में यह अभियान सिर्फ एक जवाबी हमला नहीं है। यह पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों का टर्निंग पॉइंट भी साबित हो सकता है। इस लड़ाई के परिणाम से साफ संकेत मिलेंगे कि तालिबान कितनी हद तक अपनी ज़मीन को आतंक से अलग रख सकता है।

    भविष्य की चुनौतियाँ और संभावित परिणाम
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तालिबान अपनी ज़मीन को पूरी तरह आतंकवाद से मुक्त नहीं कर पाता, तो यह संघर्ष सिर्फ एक नए युद्ध की शुरुआत बन सकता है। दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता इस पर निर्भर करेगी कि तालिबान कितनी गंभीरता से पाकिस्तान की चेतावनी को लागू करता है।

  • शशि थरूर ने भारत की सुरक्षा नीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा

    शशि थरूर ने भारत की सुरक्षा नीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा

    हाल ही में भारतीय सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल कोलंबिया पहुंचा, जिसका उद्देश्य भारत की आतंकवाद विरोधी नीति और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर वैश्विक समुदाय को स्पष्ट जानकारी देना था। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद शशि थरूर प्रमुख रूप से शामिल थे। उन्होंने कोलंबिया सरकार और वहां की मीडिया के सामने भारत की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के प्रति उसकी सख्त नीति को मजबूती से प्रस्तुत किया।

    शशि थरूर ने कोलंबिया सरकार की उस प्रतिक्रिया पर गहरा ऐतराज जताया जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों की मौत पर शोक जताया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवादियों और देश के सैनिकों के बीच कोई तुलना नहीं की जा सकती। यह बयान भारत की आतंकवाद के प्रति असहिष्णुता और उसकी नीतिगत स्पष्टता को दर्शाता है।

    भारत ने आतंकवाद पर लिया सख्त रुख, थरूर का बयान

    कोलंबिया की मीडिया से बातचीत में थरूर ने भारत की शांति और संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का श्रेय खुद को दिया था। थरूर ने साफ किया कि भारत अपने पड़ोसी देशों से सीधे संवाद करता है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता।

    उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने में कभी हिचकिचाएगा नहीं और इसमें कोई समझौता संभव नहीं है। शशि थरूर ने कोलंबिया सरकार से यह अपेक्षा भी जताई कि उन्हें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, न कि हमलावरों के लिए शोक।

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    भारत की कूटनीति: आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश

    उक्त हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन से जुड़ा है। इस संदर्भ में, थरूर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक आत्मरक्षक कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य देश की जनता और सीमाओं की रक्षा करना था।

    भारत के इस कूटनीतिक दौरे का प्रमुख उद्देश्य वैश्विक समुदाय को यह संदेश देना था कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही, भारत इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की गलतफहमी या भ्रामक प्रचार का जवाब तथ्यों के साथ देगा।

    शशि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से शांति, सहयोग और रचनात्मक विकास का पक्षधर रहा है। यह दौरा न केवल भारत की कूटनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की आवश्यकता पर भी बल देता है।

    भारत ने कोलंबिया के साथ संवाद कर यह संदेश दिया कि वह वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन आतंकवाद के मुद्दे पर कोई ढील नहीं देगा। भारत का यह रुख उसके आत्मसम्मान, सुरक्षा और वैश्विक जिम्मेदारी की भावना का परिचायक है।