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  • शशि थरूर का केरल के लिए आर्थिक सुधार का रोडमैप: निवेश और विकास पर जोर

    शशि थरूर का केरल के लिए आर्थिक सुधार का रोडमैप: निवेश और विकास पर जोर

    केरल की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की जरूरत

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने केरल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि केरल को निवेशकों और कारोबारियों के लिए आकर्षक बनाना समय की मांग है। ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए थरूर ने कहा कि यदि वह राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने में योगदान दे पाए, तो यह उनके लिए किसी भी राजनीतिक पद से कहीं अधिक सार्थक होगा। उनके इस बयान को कांग्रेस पार्टी के भीतर और बाहर कई संदर्भों में देखा जा रहा है। थरूर ने केरल की आर्थिक चुनौतियों को उजागर करते हुए निवेशकों के हितों की रक्षा और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने पर जोर दिया।

    निवेशक संरक्षण अधिनियम की मांग

    शशि थरूर ने केरल में निवेशकों के लिए एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य में एक इन्वेस्टर प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाना चाहिए, जो निवेशकों को यह भरोसा दिलाए कि उनका पैसा सुरक्षित है। थरूर ने कहा, “निवेशक को यह विश्वास होना चाहिए कि उसका निवेश राजनेताओं, नौकरशाहों या ट्रेड यूनियनों की वजह से खतरे में नहीं पड़ेगा।” उन्होंने हड़तालों पर रोक लगाने और 90 प्रतिशत अनावश्यक नियमों को हटाने की वकालत की, ताकि कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिले। थरूर का मानना है कि इन कदमों से केरल में उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

    केरल की आर्थिक चुनौतियां

    थरूर ने केरल की आर्थिक स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि राज्य भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उन्होंने मौजूदा आर्थिक ढांचे में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, केरल की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए नीतिगत सुधार और निवेशक-अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है। थरूर ने सुझाव दिया कि अनावश्यक नियम-कायदों को हटाकर और हड़तालों को नियंत्रित करके राज्य में कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे न केवल स्थानीय उद्यमियों को फायदा होगा, बल्कि बाहरी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

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    क्या शशि थरूर बनना चाहते हैं मुख्यमंत्री?

    केरल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शशि थरूर के बयानों को कांग्रेस पार्टी के भीतर अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं, तो थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी पद की लालसा नहीं की। उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा लोगों ने किसी काम के लिए बुलाया है, और मैंने उनकी सेवा की है।” थरूर ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनकी उम्मीदवारी भी पार्टी नेताओं के सुझाव पर थी, न कि उनकी व्यक्तिगत इच्छा से।

    कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

    केरल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में है। दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ की स्थिति है। पार्टी के भीतर इस बात पर चर्चा तेज है कि चुनाव में किसे नेतृत्व सौंपा जाए। शशि थरूर के अलावा वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्नीथला जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। थरूर के आर्थिक सुधारों और निवेशक-अनुकूल नीतियों पर जोर को कांग्रेस के लिए एक नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

  • भारत की अर्थव्यवस्था: पीएम मोदी का ट्रंप और राहुल को जवाब

    भारत की अर्थव्यवस्था: पीएम मोदी का ट्रंप और राहुल को जवाब

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर दिए गए बयानों का करारा जवाब दिया है। ट्रंप ने भारत को ‘डेड इकॉनमी’ करार दिया था, जबकि राहुल गांधी ने भी उनके सुर में सुर मिलाया था। पीएम मोदी ने वाराणसी की एक रैली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पीएमओ के हैंडल से एक लेख के माध्यम से दोनों को तथ्यों के साथ जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।

    वैश्विक अस्थिरता में भारत की स्थिरता

    विश्व में आर्थिक अस्थिरता के बीच, पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि सभी देश अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी आर्थिक रणनीति पर सतर्क रहना होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर ‘स्वदेशी’ उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। मोदी ने अपने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को दोहराते हुए कहा, “हमें केवल भारतीय उत्पाद खरीदने चाहिए और लोकल के लिए वोकल बनना चाहिए।” यह बयान ट्रंप के उस पोस्ट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने भारत पर 25% आयात शुल्क लगाने और रूस के साथ संबंधों पर टिप्पणी की थी।

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    राहुल गांधी के दावों का खंडन

    राहुल गांधी ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ बताया था, जिसका जवाब पीएमओ ने एक लेख के माध्यम से दिया। ‘इंडियाज इकॉनमी इज अलाइव एंड किकिंग’ शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उम्मीद की किरण है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने 6.5% की वास्तविक जीडीपी वृद्धि और 9.8% की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि हासिल की है। यह पीएम मोदी के नेतृत्व में नीतिगत स्थिरता और घरेलू मांग पर आधारित आर्थिक मॉडल का परिणाम है।

    वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति

    S&P के अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका की वृद्धि 1.5%, ब्रिटेन की 0.8%, जर्मनी की 0.9%, फ्रांस की 0.6%, जापान की 0.5%, और चीन की 4.3% रहने की उम्मीद है। इसके विपरीत, भारत की 6.5% की अनुमानित वृद्धि इसे सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाती है। 695 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर वित्तीय प्रणाली भारत को बाहरी झटकों से बचाती है।

    आर्थिक सुधारों की गति

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का चालू खाता घाटा (CAD) वित्तीय वर्ष 2025-26 में केवल 0.9% रहने का अनुमान है, जबकि राजकोषीय घाटा 4.4% रहेगा। डिजिटल बुनियादी ढांचे, जैसे यूपीआई और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी (94.49 करोड़ ग्राहक), ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप दिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे और डिजिटलीकरण पर ध्यान ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत किया है।

  • निर्मला सीतारमण की बैंकों के साथ अहम बैठक: ब्याज दर कटौती के बाद समीक्षा

    निर्मला सीतारमण की बैंकों के साथ अहम बैठक: ब्याज दर कटौती के बाद समीक्षा

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में भारी कटौती के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 27 जून को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगी। इस बैठक में बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के साथ-साथ प्रमुख सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर चर्चा होगी। RBI ने नीतिगत रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.5% और नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में 100 आधार अंकों की कमी कर इसे 3% कर दिया है। यह कटौती चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और इससे बैंकिंग प्रणाली में 2.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी आने की उम्मीद है, जो ऋण वितरण को बढ़ावा देगी।

    बैठक का एजेंडा

    वित्त मंत्री की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति का आकलन करना और चालू वित्त वर्ष के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करना है। वित्त वर्ष 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5% तक गिरकर चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में सीतारमण बैंकों से उत्पादक क्षेत्रों, जैसे कृषि, MSME और बुनियादी ढांचे, में ऋण प्रवाह बढ़ाने का आग्रह करेंगी। इसके अलावा, बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, और तीन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं – प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, और अटल पेंशन योजना – की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

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    RBI की ब्याज दर कटौती का प्रभाव

    RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के छह में से पांच सदस्यों ने रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती का समर्थन किया। इस कटौती का उद्देश्य धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देना और उद्योगों व उपभोक्ताओं के लिए ऋण को सस्ता करना है। CRR में कमी से बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शानदार प्रदर्शन

    वित्त वर्ष 2025 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है। इन बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ 26% बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 1.41 लाख करोड़ रुपये था। देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ने 70,901 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16% अधिक है। SBI का योगदान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कुल आय में 40% से अधिक रहा। सभी 12 सार्वजनिक बैंकों ने इस वर्ष लाभ दर्ज किया, जो उनकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।

    आर्थिक सुधारों के लिए बैंकों की भूमिका

    वित्त मंत्री की यह बैठक आर्थिक सुधारों को गति देने और बैंकों की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। धीमी आर्थिक वृद्धि के बीच बैंकों से अपेक्षा है कि वे सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं को लागू करने में तेजी लाएं। साथ ही, ब्याज दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं और व्यवसायों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।