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  • हमें हर हिंदू की रक्षा करनी है,वक्फ कानून पर सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

    हमें हर हिंदू की रक्षा करनी है,वक्फ कानून पर सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

    वक्फ संशोधन कानून 2025 को लेकर देशभर में मचे सियासी घमासान के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य ‘हर हिंदू की रक्षा’ करना है और वक्फ कानून के नाम पर किसी भी व्यक्ति की जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।

    क्या कहा सीएम योगी ने?

    एक जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा उत्तर प्रदेश में अब वक्फ कानून की आड़ में किसी की जमीन हड़पने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जो भी हिंदू परिवार पीढ़ियों से अपनी जमीन पर रह रहा है । उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है ।उन्होंने वक्फ संपत्तियों के दावों की जांच के लिए विशेष समिति गठित करने की बात भी कही है और कहा है कि किसी भी गलत तरीके से वक्फ घोषित की गई जमीन की जांच कर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

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    वक्फ कानून पर देशभर में बहस

    वक्फ (संशोधन) कानून 2025 को लेकर विपक्ष और कई मुस्लिम संगठन जहां इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं भाजपा और योगी सरकार इसे पारदर्शिता और न्याय की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है। मुख्यमंत्री योगी का बयान इसी दिशा में एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    हिंदू संगठनों ने किया स्वागत

    सीएम योगी के इस बयान का स्वागत विभिन्न हिंदू संगठनों ने किया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों का कहना है कि वक्फ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए यह जरूरी कदम है।

    राजनीतिक मायने

    चुनावी वर्ष में वक्फ कानून और इससे जुड़ी बयानबाजी को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। जहां एक तरफ AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ साजिश बताया है। वहीं बीजेपी इसे ‘समान नागरिक अधिकारों की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।

    क्या कहता है आम नागरिक?

    ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में रहने वाले कई हिंदू परिवारों ने पहले भी शिकायत की थी कि बिना उनकी जानकारी के उनकी जमीन वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज कर दी जाती है। सीएम योगी के बयान ने ऐसे लोगों को उम्मीद दी है कि अब उन्हें न्याय मिल सकता है।सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान न सिर्फ वक्फ कानून पर सरकार की स्थिति को स्पष्ट करता है। बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमाने की संभावना है।

  • हमारे नेता के मंदिर जाने के बाद बीजेपी वालों ने मंदिर धुलवाया, राहुल गांधी का बड़ा आरोप

    हमारे नेता के मंदिर जाने के बाद बीजेपी वालों ने मंदिर धुलवाया, राहुल गांधी का बड़ा आरोप

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। एक चुनावी जनसभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि जब कांग्रेस के एक दलित नेता ने मंदिर में दर्शन किए  तो बीजेपी नेताओं ने मंदिर को शुद्ध करवाया और धुलवाया।

    राहुल गांधी का बयान

    जब हमारे नेता मंदिर में गए तो बीजेपी वालों को दिक्कत हो गई। उन्होंने मंदिर को गंगाजल से धुलवाया। ये किस सोच की राजनीति है?

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    जातिवाद पर सीधा वार      

    राहुल गांधी ने इसे बीजेपी की जातिवादी मानसिकता करार दिया और कहा कि यह घटना बताती है कि बीजेपी अब भी ऊंच-नीच की सोच से बाहर नहीं निकली है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सबको बराबरी का हक दिलाने की लड़ाई लड़ रही है ।जबकि बीजेपी समाज को बांटने की राजनीति कर रही है।

     विपक्ष का पलटवार

    बीजेपी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है। कि राहुल गांधी सिर्फ़ धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।यह बयान ऐसे समय में आया है। जब देश में चुनावी माहौल तेज़ है। और जाति-धर्म से जुड़े मुद्दे फिर से चर्चा में हैं।

  • सदन में प्रियंका गांधी को दुलार रहे थे राहुल गांधी, लोकसभा अध्यक्ष ने दी नसीहत

    सदन में प्रियंका गांधी को दुलार रहे थे राहुल गांधी, लोकसभा अध्यक्ष ने दी नसीहत

    लोकसभा में बुधवार, 26 मार्च 2025 को उस समय हलचल मच गई जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन के आचरण और मर्यादा को लेकर नसीहत दी। लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे संसदीय गरिमा बनाए रखें।

    लोकसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?

    शून्यकाल के दौरान ओम बिरला ने कहा  सदन के सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे सदन की मर्यादा और शालीनता के उच्च मानदंडों को बनाए रखें। मेरे संज्ञान में कई ऐसी घटनाएं आई हैं । जिनमें सदस्यों का आचरण सदन की उच्च परंपराओं और मापदंडों के अनुरूप नहीं रहा है।

    उन्होंने आगे कहा

    इस सदन में पिता-पुत्री, मां-बेटी और पति-पत्नी सदस्य रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा है कि वे नियम 349 के तहत नियमों के अनुसार सदन में आचारण-व्यवहार करें। विशेष रूप से, नेता प्रतिपक्ष को उदाहरण पेश करना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष की यह टिप्पणी उस समय आई जब राहुल गांधी सदन में मौजूद थे।

    बीजेपी ने वीडियो शेयर कर उठाए सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें राहुल गांधी अपनी बहन और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी को सदन में दुलारते नजर आ रहे हैं।अमित मालवीय ने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष की टिप्पणी इसी घटना से जुड़ी हुई थी और राहुल गांधी को इसी वजह से नसीहत दी गई।

     कांग्रेस का पलटवार

    कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे गैर-जरूरी विवाद करार दिया। पार्टी ने कहा कि राहुल और प्रियंका गांधी के पारिवारिक संबंधों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

    कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा बीजेपी मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए इस तरह की ओछी राजनीति कर रही है। जनता की असली समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के विवाद पैदा किए जा रहे हैं।”

    राजनीतिक हलचल तेज

    इस पूरे विवाद के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। जहां बीजेपी इसे संसदीय शिष्टाचार का मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक हमला करार दे रही है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे और क्या मोड़ लेता है और लोकसभा में इसकी क्या प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

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  • इमरान प्रतापगढ़ी की इफ्तार पार्टी में राहुल गांधी और खरगे की मौजूदगी, क्या है सियासी मायने?

    इमरान प्रतापगढ़ी की इफ्तार पार्टी में राहुल गांधी और खरगे की मौजूदगी, क्या है सियासी मायने?

    सात साल बाद राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी में उपस्थिति ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। क्या यह कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा है? क्या इससे 2024 के चुनावी समीकरणों पर असर पड़ेगा? आइए इस घटनाक्रम पर गहराई से नज़र डालते हैं।

    इफ्तार में कौन-कौन शामिल हुआ?

    26 मार्च  2025 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इमरान प्रतापगढ़ी की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए । इस मौके पर समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, जया बच्चन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, टीएमसी की महुआ मोइत्रा, और एनसीपी की फौजिया खान जैसी प्रमुख हस्तियां भी मौजूद थीं।

    राजनीतिक संदेश

    इफ्तार पार्टी में संविधान की प्रति तोहफे में दी गई, जो कांग्रेस के संविधान-समर्थन के संदेश को दर्शाता है।इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे आपसी भाईचारे और मोहब्बत का प्रतीक बताया।

    इतिहास पर एक नजर

    2018 में राहुल गांधी ने खुद कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था।2019 लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने इफ्तार से दूरी बना ली थी।मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद भी कांग्रेस की ओर से इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया गया।

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    क्या बदल रही है कांग्रेस की रणनीति?

    कांग्रेस पर अक्सर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं, जिससे पार्टी ने इस तरह के आयोजनों से दूरी बना ली थी।हाल ही में खरगे और सोनिया गांधी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे।2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी और खरगे की यह मौजूदगी क्या कांग्रेस की रणनीति में बदलाव का संकेत है?

    राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की इस इफ्तार पार्टी में उपस्थिति को एक बड़े सियासी संकेत के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस क्या अब खुलकर अल्पसंख्यकों के साथ अपने जुड़ाव को दर्शाएगी या यह केवल एक व्यक्तिगत उपस्थिति थी? इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।