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  • 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव: मॉक पोल और तैयारियां

    9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव: मॉक पोल और तैयारियां

    विपक्षी सांसदों के लिए मॉक पोल

    9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले आज विपक्षी सांसदों के लिए एक मॉक पोल का आयोजन किया जा रहा है। ‘इंडिया’ गठबंधन के सूत्रों के अनुसार, यह मॉक पोल संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में दोपहर करीब ढाई बजे होगा। इस दौरान विपक्षी सांसदों को उपराष्ट्रपति चुनाव की मतदान प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह कवायद सांसदों को मतदान प्रक्रिया से परिचित कराने और उनकी तैयारियों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

    खरगे का रात्रिभोज रद्द

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार शाम को संसदीय सौध में विपक्षी सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया था, लेकिन देश में बाढ़ की स्थिति के कारण इसे रद्द कर दिया गया। यह निर्णय विपक्ष की संवेदनशीलता को दर्शाता है। इस बीच, उपराष्ट्रपति चुनाव में केंद्र की सत्ताधारी एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।

    दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से

    इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना से हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं। 79 वर्षीय रेड्डी ने 2011 में शीर्ष अदालत से सेवानिवृत्ति के बाद कई महत्वपूर्ण फैसलों में योगदान दिया, जिनमें सलवा जुडूम को असंवैधानिक घोषित करना और काले धन की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन शामिल है।

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    मतदान और मतगणना का समय

    उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा। मतगणना उसी दिन शाम 6 बजे शुरू होगी, जिसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने बताया कि मतदान संसद भवन के कमरा संख्या एफ-101, वसुधा में होगा। निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल हैं, जिसमें राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य भी मतदान के लिए पात्र हैं।

    वोटों का गणित

    उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में कुल 788 सदस्य हैं, जिसमें से वर्तमान में 781 सदस्य ही सक्रिय हैं। इसमें राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (5 सीटें रिक्त), 12 मनोनीत सदस्य, और लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (1 सीट रिक्त) शामिल हैं। संख्याबल के हिसाब से सत्तारूढ़ एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन विपक्ष ने इस चुनाव को वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश किया है।

  • उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर से हटी रोक, हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिर होगी प्रक्रिया शुरू

    उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर से हटी रोक, हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिर होगी प्रक्रिया शुरू

    उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की राह अब साफ हो गई है। नैनीताल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव पर लगी रोक हटा दी है, जिससे राज्य में लंबे समय से अटके पंचायत चुनाव फिर से पटरी पर लौटते नजर आ रहे हैं।

    हाई कोर्ट ने यह फैसला राज्य सरकार द्वारा पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर की पूरी जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के बाद दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव टालने की उनकी मंशा नहीं थी, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों का पालन जरूरी है।

    क्या था मामला?

    राज्य निर्वाचन आयोग ने 21 जून को हरिद्वार को छोड़कर बाकी 12 जिलों में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत दो चरणों में चुनाव कराए जाने थे—25 से 28 जून तक नामांकन प्रक्रिया, 10 और 15 जुलाई को मतदान और 19 जुलाई को मतगणना प्रस्तावित थी।

    हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 243 D व 243 T का हवाला देते हुए आरक्षण रोस्टर के अभाव में चुनाव प्रक्रिया को चुनौती दी। कोर्ट ने भी इस पर सहमति जताते हुए अस्थायी तौर पर रोक लगा दी थी।

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    कोर्ट का फैसला और आगे की रणनीति

    शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से आरक्षण रोस्टर का विस्तृत ब्यौरा अदालत में पेश किया गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने यह कहते हुए चुनाव पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया कि “हमारी मंशा चुनाव रोकने की नहीं है, पर संविधान और कानून का पालन आवश्यक है।”

    राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने जानकारी दी कि नया चुनाव कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संशोधित अधिसूचना जारी की जाएगी।

    क्यों है यह चुनाव महत्वपूर्ण?

    उत्तराखंड में पंचायत चुनाव न सिर्फ स्थानीय विकास योजनाओं के लिए ज़रूरी हैं, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ज़मीनी स्तर तक मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन हैं। लंबे समय से रुकी हुई इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए यह कोर्ट का फैसला निर्णायक माना जा रहा है।

    अब सभी की नजरें निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले नए कार्यक्रम पर टिकी हैं, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से दोबारा शुरू हो सकेगी।