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  • 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव: मॉक पोल और तैयारियां

    9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव: मॉक पोल और तैयारियां

    विपक्षी सांसदों के लिए मॉक पोल

    9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले आज विपक्षी सांसदों के लिए एक मॉक पोल का आयोजन किया जा रहा है। ‘इंडिया’ गठबंधन के सूत्रों के अनुसार, यह मॉक पोल संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में दोपहर करीब ढाई बजे होगा। इस दौरान विपक्षी सांसदों को उपराष्ट्रपति चुनाव की मतदान प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह कवायद सांसदों को मतदान प्रक्रिया से परिचित कराने और उनकी तैयारियों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

    खरगे का रात्रिभोज रद्द

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार शाम को संसदीय सौध में विपक्षी सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया था, लेकिन देश में बाढ़ की स्थिति के कारण इसे रद्द कर दिया गया। यह निर्णय विपक्ष की संवेदनशीलता को दर्शाता है। इस बीच, उपराष्ट्रपति चुनाव में केंद्र की सत्ताधारी एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।

    दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से

    इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना से हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं। 79 वर्षीय रेड्डी ने 2011 में शीर्ष अदालत से सेवानिवृत्ति के बाद कई महत्वपूर्ण फैसलों में योगदान दिया, जिनमें सलवा जुडूम को असंवैधानिक घोषित करना और काले धन की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन शामिल है।

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    मतदान और मतगणना का समय

    उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा। मतगणना उसी दिन शाम 6 बजे शुरू होगी, जिसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने बताया कि मतदान संसद भवन के कमरा संख्या एफ-101, वसुधा में होगा। निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल हैं, जिसमें राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य भी मतदान के लिए पात्र हैं।

    वोटों का गणित

    उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में कुल 788 सदस्य हैं, जिसमें से वर्तमान में 781 सदस्य ही सक्रिय हैं। इसमें राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (5 सीटें रिक्त), 12 मनोनीत सदस्य, और लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (1 सीट रिक्त) शामिल हैं। संख्याबल के हिसाब से सत्तारूढ़ एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन विपक्ष ने इस चुनाव को वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश किया है।

  • कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला: ‘मोदी की कठपुतली’ का आरोप

    कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला: ‘मोदी की कठपुतली’ का आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला, इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कठपुतली’ करार दिया। इससे एक दिन पहले, पार्टी सांसद राहुल गांधी ने आयोग पर ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाते हुए सबूतों का ‘एटम बम’ फोड़ने की बात कही थी। खरगे ने दावा किया कि चुनाव आयोग व्यवस्थित रूप से गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करने का काम कर रहा है। उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आयोग के साथ मिलकर मतदाता सूची से इन वर्गों के नाम जानबूझकर हटाने का आरोप लगाया।

    ‘चुनाव आयोग की साजिश, दलितों-पिछड़ों को वोट से रोका’

    कांग्रेस द्वारा आयोजित एक लीगल कॉन्क्लेव में खरगे ने कहा, “बिहार में 65 लाख या एक करोड़ वोटरों को मताधिकार से वंचित करना दलितों और पिछड़ों को वोटिंग से रोकने की सोची-समझी साजिश है। चुनाव आयोग पूरी तरह से मोदी जी की कठपुतली बन चुका है।” उन्होंने दावा किया कि 7 करोड़ वोटरों में से करीब एक करोड़ लोगों के नाम बिना किसी ठोस कारण के मतदाता सूची से हटा दिए गए। इससे साफ है कि समाज के कमजोर वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। खरगे ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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    ‘अल्पसंख्यकों पर बढ़ा उत्पीड़न’

    खरगे ने बीजेपी शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित उत्पीड़न को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “बीजेपी शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ गया है। वे मुगलों, चिकन और मंगलसूत्र जैसे मुद्दों को उठाकर समाज को बांटने का काम करते हैं।” कांग्रेस नेता ने मतदाता सूची से नाम हटाने को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल अल्पसंख्यकों, बल्कि दलितों, पिछड़े वर्गों और गरीबों को भी निशाना बनाती है, जिससे उनके मतदान के अधिकार का हनन होता है।

    ‘संविधान की रक्षा करें, इसे कमजोर न करें’

    खरगे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री का कर्तव्य संविधान की रक्षा करना है, न कि इसे कमजोर करना। उन्होंने कहा, “लोगों ने प्रधानमंत्री को देश के संविधान की रक्षा के लिए चुना है, इसे खत्म करने के लिए नहीं।” कांग्रेस अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है, लेकिन कई सुनवाइयों के बावजूद चुनाव आयोग ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया।

    बिहार में मतदाता सूची की छानबीन पर विवाद

    हाल ही में बिहार में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, विपक्ष ने इस प्रक्रिया को संदेह की नजर से देखा है। खरगे और अन्य कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह प्रक्रिया समाज के कमजोर वर्गों को मतदान से वंचित करने का एक सुनियोजित प्रयास है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को इस तरह के कदमों को तुरंत रोकना चाहिए और सभी पात्र वोटरों को उनके मताधिकार की गारंटी देनी चाहिए।

    कांग्रेस का यह हमला चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

  • बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण: विपक्ष का संसद में हंगामा

    बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण: विपक्ष का संसद में हंगामा

    शुक्रवार को पक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के कई घटक दलों के सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ संसद भवन परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा से संसद भवन के ‘मकर द्वार’ तक मार्च निकाला, जिसमें कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य दलों के सांसद शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने एक बड़ा बैनर प्रदर्शित किया, जिस पर ‘एसआईआर- लोकतंत्र पर वार’ लिखा था। साथ ही, उन्होंने ‘एसआईआर वापस लो’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाकर अपनी मांग को बुलंद किया।

    कांग्रेस अध्यक्ष के गंभीर आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम गरीबों के मताधिकार को छीनने और केवल कुछ अभिजात्य लोगों को वोट देने का अधिकार देने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार संविधान के दायरे में काम नहीं कर रही है, जिससे लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो रहा है। खरगे ने मांग की कि इस मुद्दे पर संसद में तत्काल चर्चा होनी चाहिए ताकि जनता के हितों की रक्षा की जा सके। विपक्षी सांसदों का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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    लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

    बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों के सांसदों ने लोकसभा में जमकर हंगामा किया। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के मात्र पांच मिनट बाद ही अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की शुरुआत में 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की वर्षगांठ का उल्लेख किया और शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ पल का मौन रखा गया। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने एसआईआर के मुद्दे को उठाते हुए कार्यवाही को बाधित किया और अपनी मांगों को जोर-शोर से रखा।

    विपक्ष की मांग: पारदर्शिता और चर्चा

    विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, जिससे अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का खतरा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस प्रक्रिया को तुरंत रोक दे और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करे। विपक्ष का मानना है कि यह कदम न केवल लोकतंत्र को कमजोर करेगा, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के अधिकार को भी प्रभावित करेगा। इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तनाव को उजागर किया है, जिसका असर संसद की कार्यवाही पर भी देखने को मिला।

  • संसद के मॉनसून सत्र में हंगामा, गतिरोध समाप्ति की ओर

    संसद के मॉनसून सत्र में हंगामा, गतिरोध समाप्ति की ओर

    संसद के मॉनसून सत्र में हंगामे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी दलों ने बिहार में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इस हंगामे के कारण दोनों सदनों में शून्यकाल, प्रश्नकाल और अन्य विधायी कामकाज प्रभावित हुए। 21 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी, जिसके चलते संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी।

    सरकार और विपक्ष के बीच मध्यस्थता की कोशिश

    लगातार हंगामे को देखते हुए सत्तापक्ष ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सक्रिय कदम उठाए। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले में पहल करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस मुलाकात में संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा हुई। इसके बाद रिजिजू और संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। इन बैठकों का उद्देश्य संसद में उत्पन्न गतिरोध को खत्म करना और दोनों पक्षों के बीच सहमति स्थापित करना था।

    सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

    लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के नेतृत्व में शुक्रवार को दिन में 12:30 बजे एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सभी दलों के फ्लोर लीडर्स ने हिस्सा लिया और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर सहमति जताई। विपक्ष ने भी सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी सहमति दे दी। इस बैठक के बाद यह माना जा रहा है कि संसद में चल रहा गतिरोध अब समाप्त हो गया है। इस सहमति के तहत सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर चर्चा होगी, जो विपक्ष द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों में से एक है।

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    आगे की राह और संसद की कार्यवाही

    मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग करता रहा है, जिसके कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों ने विपक्ष को आक्रामक रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, सर्वदलीय बैठक के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी। सोमवार को होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट होगा कि क्या दोनों पक्ष सहमति के आधार पर संसद के कामकाज को आगे बढ़ा पाएंगे। यह सत्र न केवल विधायी कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए भी अहम माना जा रहा है।

  • कर्नाटक में नहीं होगा नेतृत्व परिवर्तन, सिद्धारमैया ही रहेंगे मुख्यमंत्री: कांग्रेस

    कर्नाटक में नहीं होगा नेतृत्व परिवर्तन, सिद्धारमैया ही रहेंगे मुख्यमंत्री: कांग्रेस

    कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कई दिनों से चल रही अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को साफ कर दिया कि राज्य में मुख्यमंत्री बदला नहीं जाएगा और सिद्धारमैया ही पूरे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

    यह ऐलान बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया, जहां सुरजेवाला के साथ डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी मौजूद थे। सुरजेवाला ने कहा, “कांग्रेस में लोकतंत्र है, सभी नेताओं को अपनी बात रखने की आज़ादी है, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की कोई योजना नहीं है।”

    विधायकों से वन-टू-वन मीटिंग के बाद हुआ बड़ा ऐलान

    सुरजेवाला कर्नाटक के दौरे पर सोमवार को बेंगलुरु पहुंचे थे। उनके आगमन की मुख्य वजह मंत्रियों और विधायकों की लगातार बयानबाजी थी, जिससे कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक खींचतान की अटकलें तेज़ हो गई थीं। उन्होंने वहां कांग्रेस विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात की और उनकी चिंताओं को सुना।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुरजेवाला ने यह भी स्पष्ट किया कि यह दौरा पार्टी के संगठनात्मक संवाद का हिस्सा था, न कि किसी संकट प्रबंधन का प्रयास। उन्होंने कहा, “अगर आप पूछें कि क्या नेतृत्व परिवर्तन होगा, तो उसका उत्तर है— नहीं।”

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    सिद्धारमैया और शिवकुमार की एकता का संदेश

    एक दिन पहले मैसूर में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का हाथ ऊपर उठाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार एकजुट है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा, “हमारी सरकार चट्टान की तरह मजबूत है और पूरे 5 साल चलेगी।” यह बयान उस वक्त आया जब अफवाहें थीं कि ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद का हस्तांतरण हो सकता है।

    बता दें कि सिद्धारमैया पहले भी 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। ऐसे में वह एक बार फिर उसी कीर्तिमान को दोहराने की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

    कांग्रेस को है मजबूत बहुमत का भरोसा

    कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत है। 224 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी के पास 138 विधायक हैं, और कुछ निर्दलीय व सहयोगी विधायकों का समर्थन भी मिला हुआ है। कुल मिलाकर कांग्रेस सरकार को 142 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि बीजेपी के पास केवल 81 सीटें हैं।

    बहुमत के लिए 113 सीटों की जरूरत होती है, और कांग्रेस इस आंकड़े से कहीं ऊपर है। ऐसे में सरकार पर किसी भी तरह का खतरा नहीं है, और नेतृत्व परिवर्तन की मांग का कोई औचित्य भी नहीं बनता।

    कांग्रेस आलाकमान का है अंतिम निर्णय

    इस पूरे विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि बेंगलुरु में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। नेतृत्व परिवर्तन जैसे बड़े फैसले पार्टी का आलाकमान ही करेगा। सुरजेवाला के बयान ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि आलाकमान फिलहाल किसी बदलाव के मूड में नहीं है।

  • खरगे ने PM से की मांग: जल्द हो लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव

    खरगे ने PM से की मांग: जल्द हो लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव

    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकसभा उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) के रिक्त पद को जल्द भरने की मांग की है। खरगे ने इस बात पर चिंता जताई कि यह महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पिछले दो लोकसभा कार्यकालों (17वीं और 18वीं) से खाली है, जो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के प्रावधानों के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 के तहत डिप्टी स्पीकर का चुनाव अनिवार्य है, और इसकी अनदेखी लोकतंत्र के मूल्यों को कमजोर करती है।

    विपक्षी दल से उपाध्यक्ष चुनने की परंपरा

    खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पत्र का हवाला देते हुए लिखा, “पहली से 16वीं लोकसभा तक हर बार डिप्टी स्पीकर का चुनाव किया गया। परंपरागत रूप से यह पद मुख्य विपक्षी दल के सदस्य को दिया जाता रहा है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 17वीं लोकसभा (2014-2019) में डिप्टी स्पीकर का चुनाव नहीं हुआ, और यह गलत परंपरा 18वीं लोकसभा में भी जारी है। खरगे ने कहा कि यह स्थिति संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है और इसे तत्काल ठीक करने की आवश्यकता है। आखिरी बार 16वीं लोकसभा में AIADMK के नेता एम थंबी दुरई को डिप्टी स्पीकर चुना गया था।

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    संवैधानिक प्रावधान और डिप्टी स्पीकर की भूमिका

    खरगे ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लेख किया, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि लोकसभा को “जितनी जल्दी हो सके” स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव करना होगा। डिप्टी स्पीकर लोकसभा में स्पीकर के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पीठासीन अधिकारी होता है। उनकी मुख्य जिम्मेदारी स्पीकर की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही का संचालन करना है। इस दौरान उनके पास स्पीकर के समान अधिकार होते हैं, जिसमें व्यवस्था बनाए रखना, बहसों का संचालन करना और नियमों से संबंधित निर्णय लेना शामिल है। खरगे ने कहा कि परंपरागत रूप से डिप्टी स्पीकर का चुनाव लोकसभा के दूसरे या तीसरे सत्र में होता है, और इसकी तारीख स्पीकर द्वारा तय की जाती है।

    डिप्टी स्पीकर की निष्पक्षता जरूरी

    लोकसभा का डिप्टी स्पीकर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है, जिसके लिए निष्पक्षता अनिवार्य है। भले ही डिप्टी स्पीकर किसी राजनीतिक दल से चुना जाए, उसे गैर-पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करना होता है। यह पद सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। खरगे ने इस बात पर जोर दिया कि डिप्टी स्पीकर का पद खाली रहना न केवल परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करता है।

    खरगे की मांग और भविष्य

    खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द डिप्टी स्पीकर का चुनाव कराएं। उन्होंने कहा कि यह न केवल संवैधानिक आवश्यकता है, बल्कि यह विपक्ष के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने का प्रतीक भी है। 2019 के बाद से यह पद खाली है, और 18वीं लोकसभा के गठन के बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। खरगे की यह मांग राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

  • हमारे नेता के मंदिर जाने के बाद बीजेपी वालों ने मंदिर धुलवाया, राहुल गांधी का बड़ा आरोप

    हमारे नेता के मंदिर जाने के बाद बीजेपी वालों ने मंदिर धुलवाया, राहुल गांधी का बड़ा आरोप

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। एक चुनावी जनसभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि जब कांग्रेस के एक दलित नेता ने मंदिर में दर्शन किए  तो बीजेपी नेताओं ने मंदिर को शुद्ध करवाया और धुलवाया।

    राहुल गांधी का बयान

    जब हमारे नेता मंदिर में गए तो बीजेपी वालों को दिक्कत हो गई। उन्होंने मंदिर को गंगाजल से धुलवाया। ये किस सोच की राजनीति है?

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    जातिवाद पर सीधा वार      

    राहुल गांधी ने इसे बीजेपी की जातिवादी मानसिकता करार दिया और कहा कि यह घटना बताती है कि बीजेपी अब भी ऊंच-नीच की सोच से बाहर नहीं निकली है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सबको बराबरी का हक दिलाने की लड़ाई लड़ रही है ।जबकि बीजेपी समाज को बांटने की राजनीति कर रही है।

     विपक्ष का पलटवार

    बीजेपी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है। कि राहुल गांधी सिर्फ़ धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।यह बयान ऐसे समय में आया है। जब देश में चुनावी माहौल तेज़ है। और जाति-धर्म से जुड़े मुद्दे फिर से चर्चा में हैं।

  • हमारे पास ज्यादा आर्थिक शक्ति नहीं है लेकिन, मल्लिकार्जुन खड़गे का बड़ा बयान

    हमारे पास ज्यादा आर्थिक शक्ति नहीं है लेकिन, मल्लिकार्जुन खड़गे का बड़ा बयान

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर सत्तारूढ़ सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, हमारे पास ज्यादा आर्थिक शक्ति नहीं है, लेकिन हमारे पास संविधान, सच्चाई और जनसमर्थन की ताकत है। खड़गे का यह बयान ऐसे समय में आया है । जब देश में लोकसभा चुनाव का माहौल गरमाया हुआ है। और सभी दल अपनी रणनीति में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “पैसे और प्रचार से लोकतंत्र नहीं चलता, बल्कि जनता के विश्वास से सरकार बनती है।

    जनता से किया भावनात्मक जुड़ाव

    खड़गे ने अपने भाषण में आम जनता की समस्याओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज महंगाई, बेरोज़गारी और किसानों की बदहाली सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आकर इन मुद्दों को प्राथमिकता देगी।

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    विपक्षी एकता पर दिया ज़ोर

    खड़गे ने INDIA गठबंधन की एकता को दोहराते हुए कहा कि, हम विचारधारा की लड़ाई लड़ रहे हैं। चाहे हमारे पास संसाधन कम हों, लेकिन हम डटे रहेंगे।राजनीतिक पारा चढ़ चुका है । और नेताओं के बयान अब सीधे जनता की भावनाओं को छूने लगे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान विपक्ष की जमीनी रणनीति को दर्शाता है । जो आर्थिक ताकत के मुकाबले जनविश्वास और विचारधारा पर टिकी है।

  • इमरान प्रतापगढ़ी की इफ्तार पार्टी में राहुल गांधी और खरगे की मौजूदगी, क्या है सियासी मायने?

    इमरान प्रतापगढ़ी की इफ्तार पार्टी में राहुल गांधी और खरगे की मौजूदगी, क्या है सियासी मायने?

    सात साल बाद राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी में उपस्थिति ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। क्या यह कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा है? क्या इससे 2024 के चुनावी समीकरणों पर असर पड़ेगा? आइए इस घटनाक्रम पर गहराई से नज़र डालते हैं।

    इफ्तार में कौन-कौन शामिल हुआ?

    26 मार्च  2025 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इमरान प्रतापगढ़ी की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए । इस मौके पर समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, जया बच्चन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, टीएमसी की महुआ मोइत्रा, और एनसीपी की फौजिया खान जैसी प्रमुख हस्तियां भी मौजूद थीं।

    राजनीतिक संदेश

    इफ्तार पार्टी में संविधान की प्रति तोहफे में दी गई, जो कांग्रेस के संविधान-समर्थन के संदेश को दर्शाता है।इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे आपसी भाईचारे और मोहब्बत का प्रतीक बताया।

    इतिहास पर एक नजर

    2018 में राहुल गांधी ने खुद कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था।2019 लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने इफ्तार से दूरी बना ली थी।मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद भी कांग्रेस की ओर से इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया गया।

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    क्या बदल रही है कांग्रेस की रणनीति?

    कांग्रेस पर अक्सर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं, जिससे पार्टी ने इस तरह के आयोजनों से दूरी बना ली थी।हाल ही में खरगे और सोनिया गांधी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे।2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी और खरगे की यह मौजूदगी क्या कांग्रेस की रणनीति में बदलाव का संकेत है?

    राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की इस इफ्तार पार्टी में उपस्थिति को एक बड़े सियासी संकेत के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस क्या अब खुलकर अल्पसंख्यकों के साथ अपने जुड़ाव को दर्शाएगी या यह केवल एक व्यक्तिगत उपस्थिति थी? इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।