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  • भारत की अर्थव्यवस्था: पीएम मोदी का ट्रंप और राहुल को जवाब

    भारत की अर्थव्यवस्था: पीएम मोदी का ट्रंप और राहुल को जवाब

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर दिए गए बयानों का करारा जवाब दिया है। ट्रंप ने भारत को ‘डेड इकॉनमी’ करार दिया था, जबकि राहुल गांधी ने भी उनके सुर में सुर मिलाया था। पीएम मोदी ने वाराणसी की एक रैली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पीएमओ के हैंडल से एक लेख के माध्यम से दोनों को तथ्यों के साथ जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।

    वैश्विक अस्थिरता में भारत की स्थिरता

    विश्व में आर्थिक अस्थिरता के बीच, पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि सभी देश अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी आर्थिक रणनीति पर सतर्क रहना होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर ‘स्वदेशी’ उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। मोदी ने अपने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को दोहराते हुए कहा, “हमें केवल भारतीय उत्पाद खरीदने चाहिए और लोकल के लिए वोकल बनना चाहिए।” यह बयान ट्रंप के उस पोस्ट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने भारत पर 25% आयात शुल्क लगाने और रूस के साथ संबंधों पर टिप्पणी की थी।

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    राहुल गांधी के दावों का खंडन

    राहुल गांधी ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ बताया था, जिसका जवाब पीएमओ ने एक लेख के माध्यम से दिया। ‘इंडियाज इकॉनमी इज अलाइव एंड किकिंग’ शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उम्मीद की किरण है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने 6.5% की वास्तविक जीडीपी वृद्धि और 9.8% की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि हासिल की है। यह पीएम मोदी के नेतृत्व में नीतिगत स्थिरता और घरेलू मांग पर आधारित आर्थिक मॉडल का परिणाम है।

    वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति

    S&P के अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका की वृद्धि 1.5%, ब्रिटेन की 0.8%, जर्मनी की 0.9%, फ्रांस की 0.6%, जापान की 0.5%, और चीन की 4.3% रहने की उम्मीद है। इसके विपरीत, भारत की 6.5% की अनुमानित वृद्धि इसे सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाती है। 695 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर वित्तीय प्रणाली भारत को बाहरी झटकों से बचाती है।

    आर्थिक सुधारों की गति

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का चालू खाता घाटा (CAD) वित्तीय वर्ष 2025-26 में केवल 0.9% रहने का अनुमान है, जबकि राजकोषीय घाटा 4.4% रहेगा। डिजिटल बुनियादी ढांचे, जैसे यूपीआई और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी (94.49 करोड़ ग्राहक), ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप दिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे और डिजिटलीकरण पर ध्यान ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत किया है।

  • अमित शाह का बड़ा बयान: ईरान-इजरायल युद्ध से भारत को कोई खतरा नहीं

    अमित शाह का बड़ा बयान: ईरान-इजरायल युद्ध से भारत को कोई खतरा नहीं

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को लेकर भारतवासियों को आश्वस्त किया है कि इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का भारत पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत न केवल सुरक्षित है, बल्कि आज निवेश और व्यापार के लिए दुनिया की सबसे मजबूत जगहों में से एक है।

    भारत को खतरा नहीं, बल्कि अवसर है

    अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर जो उथल-पुथल चल रही है, उसे भारत एक चुनौती नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा, “भारत में लोकतंत्र मजबूत है, नीतियां पारदर्शी हैं और यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बड़ी संख्या में ग्राहक और कुशल जनशक्ति भारत को वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।”

    अर्थव्यवस्था में मजबूती और भविष्य की दिशा

    गृह मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि दुनिया में आर्थिक अनिश्चितताएं हैं, लेकिन भारत उनसे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि “किसी भी देश को बिना चुनौतियों के विकास नहीं मिलता। भारत इन चुनौतियों को स्वीकार कर रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।”

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    विकास दर और वैश्विक तुलना

    अमित शाह ने यह भी बताया कि अगर भारत की विकास दर 8% तक नहीं भी पहुंचती, तब भी भारत एक विकसित देश बन सकता है। “हमें अपनी विकास दर को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। भारत आज दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और हमारी गति भी उसी स्तर पर है।”

    उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं ठप हो गई थीं, भारत ने अपनी विकास दर को संभाले रखा और विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहा।

    निवेश पर भ्रम नहीं, विश्वास होना चाहिए

    कुछ आलोचकों द्वारा भारत से निवेश बाहर जाने की बात पर शाह ने कहा, “यह तो अच्छी बात है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपना विस्तार कर रही हैं। इससे भारत की शक्ति का प्रदर्शन होता है।”

    उन्होंने बताया कि पिछले 11 सालों में भारत में FDI (विदेशी निवेश) 143% बढ़कर 749 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि यूपीए सरकार के समय यह आंकड़ा काफी कम था। “हमें नकारात्मक सोच छोड़कर, भारतीय कंपनियों की सफलता का स्वागत करना चाहिए।”