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  • योगी की केवटी रैली: ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ पर तंज, घुसपैठियों की संपत्ति गरीबों को!

    योगी की केवटी रैली: ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ पर तंज, घुसपैठियों की संपत्ति गरीबों को!

    ‘इंडिया गठबंधन के तीन नए बंदर’: योगी का तीखा कटाक्ष

    बिहार विधानसभा चुनाव के गरमाते माहौल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवटी विधानसभा में जोरदार रैली को संबोधित किया। उन्होंने इंडिया गठबंधन पर व्यंग्यबाण चलाते हुए कहा:

    “गांधी जी के तीन बंदर तो आपने सुने, लेकिन अब इंडिया गठबंधन के तीन और बंदर आ गए — पप्पू, टप्पू और अप्पू। पप्पू सच बोल नहीं सकता, टप्पू सही देख नहीं सकता!”

    योगी ने विपक्ष को परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की जननी बताया।

    ‘जंगलराज’ की वापसी नहीं: दंगे-नरसंहार याद दिलाए

    मुख्यमंत्री ने बिहार के अतीत को याद दिलाते हुए कहा:

    “पहले दंगे, नरसंहार और डर का माहौल था। ऐसी व्यवस्था को कभी वापस न आने दें।”

    उन्होंने एनडीए की नीति को स्पष्ट बताया:

    “देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं। घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे, उनकी संपत्ति जब्त कर गरीबों में बांटेंगे।”

    कश्मीर मॉडल पर सख्ती: आतंकवाद-घुसपैठ दोनों खत्म

    योगी ने धारा 370 हटाने का उदाहरण दिया:

    “जैसे कश्मीर से आतंकवाद खत्म किया, वैसे ही घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।”

    उन्होंने विपक्ष पर राम-विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा:

    “भाजपा-एनडीए रामभक्तों का गठबंधन है, जो विकास, राष्ट्रवाद और संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।”

    बिहार की जनता जागरूक: सुशासन के लिए एनडीए

    योगी ने जनता से अपील की:

    “तुष्टिकरण और निजी स्वार्थ की राजनीति करने वालों को वोट न दें। बिहार के मतदाता जागरूक हैं — वे विकसित, सुरक्षित और संस्कारित बिहार के लिए एनडीए को चुनेंगे।”

    उन्होंने विश्वास जताया कि सुशासन और विकास की राजनीति को बिहार की जनता का अपार समर्थन मिलेगा।

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    आगे का दौरा: सोमवार को 4 जिलों में रैलियां

    योगी ने बताया कि सोमवार को वे दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सारण और पटना में जनसभाएं करेंगे। केवटी की रैली ने एनडीए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी।

    बिहार चुनाव में राष्ट्रवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दे हावी हो रहे हैं। योगी की रैली ने साफ संदेश दिया — ‘जंगलराज’ की वापसी नहीं, एनडीए की विजय निश्चित!

  • पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन: राजनीतिक जीवन और अंतिम क्षणों की पूरी कहानी

    पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन: राजनीतिक जीवन और अंतिम क्षणों की पूरी कहानी

    जम्मू-कश्मीर, बिहार, मेघालय और गोवा जैसे राज्यों के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को दिल्ली के राममनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में निधन हो गया। 79 वर्षीय मलिक लंबे समय से बीमार चल रहे थे और किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे।

    11 मई 2025 को उन्हें पेशाब संबंधित दिक्कतों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था और हालत बिगड़ने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया। सत्यपाल मलिक ने मंगलवार दोपहर 1:10 बजे अंतिम सांस ली। उनका निधन उनके आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल से कन्फर्म किया गया जिसमें लिखा था:
    “पूर्व गवर्नर चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक जी नहीं रहे।”

    आखिरी ट्वीट से झलकती थी हालत

    मई में पोस्ट की गई एक तस्वीर में सत्यपाल मलिक अस्पताल के बिस्तर पर नज़र आए थे। उन्होंने ट्वीट में लिखा था –
    “मेरी तबीयत बहुत खराब है, मैं राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हूं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हूं।”

    राजनैतिक जीवन की झलक

    सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को बागपत, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह विभिन्न पार्टियों से जुड़े रहे—भारतीय क्रांति दल, जनता दल, कांग्रेस, लोक दल, समाजवादी पार्टी, और अंत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से भी।

    • वे 1980-1989 तक राज्यसभा सदस्य रहे।
    • 1989 में अलीगढ़ लोकसभा सीट से सांसद बने।
    • 30 सितंबर 2017 को उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    • अगस्त 2018 में वे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बने और वहाँ धारा 370 हटाने के दौरान उनका कार्यकाल चर्चा में रहा।
    • इसके बाद वे गोवा और फिर मेघालय के राज्यपाल बने।

    नेताओं ने जताया दुख

    जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता दुष्यंत चौटाला ने X पर पोस्ट कर शोक व्यक्त किया:
    “पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जी के निधन की खबर अत्यंत दुखद है। उनकी सेवाओं को देश कभी नहीं भूलेगा। दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि।”

  • कश्मीर पर पीएम मोदी: 1947 में होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

    कश्मीर पर पीएम मोदी: 1947 में होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात की एक जनसभा में कश्मीर मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने 1947 के घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत के विभाजन के समय जो निर्णय लिए गए, वे आज भी देश को प्रभावित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उस समय आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती और देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की सलाह को माना गया होता, तो कश्मीर की स्थिति आज बिल्कुल अलग होती।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, उसी रात कश्मीर पर पहला आतंकवादी हमला हुआ। पाकिस्तान ने ‘मुजाहिद्दीन’ के नाम पर आतंकी भेजकर कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि वह हमला न केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष था, बल्कि भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला था। उस समय इन तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    सरदार पटेल की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया

    पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के दृष्टिकोण का ज़िक्र करते हुए कहा कि पटेल की स्पष्ट राय थी कि जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भारत में वापस नहीं लाया जाता, तब तक सेना को पीछे नहीं हटना चाहिए था। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनकी इस राय को दरकिनार कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि कश्मीर आज भी आतंकवाद और अलगाववाद से जूझ रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक भूल केवल राजनीतिक नहीं थी, बल्कि यह सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चूक थी, जिसने भारत को दशकों तक अस्थिरता के हवाले कर दिया। उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि कई सरकारें इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक फायदा उठाने में लगी रहीं और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई।

    अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक कदम

    पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए अनुच्छेद 370 हटाने को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370, वहां की अस्थिरता का एक बड़ा कारण था। इसे हटाकर केंद्र सरकार ने न केवल कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ा, बल्कि वहां विकास और निवेश के नए द्वार भी खोले।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज का भारत पहले जैसा कमजोर नहीं है। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। चाहे ऑपरेशन बालाकोट हो या हाल के सुरक्षा बलों के जवाबी हमले, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।

    युवाओं को दी प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने भाषण के अंत में युवाओं से सरदार पटेल जैसे महान नेताओं से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के कंधों पर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल राजनीति से नहीं, बल्कि देशभक्ति और दूरदर्शिता से ही हम एक सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।