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  • पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधा पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने इसे “खतरनाक, बिना तैयारी और अमानवीय” करार दिया है।

    तीन साल का काम तीन महीने में?

    ममता का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो काम हर तीन साल में होता था, उसे अचानक तीन महीने में पूरा करने का दबाव क्यों? इसका सबसे ज्यादा असर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर पड़ रहा है। राज्य भर में हजारों BLO दिन-रात सर्वर फेल होने, अप्रशिक्षित होने और अव्यवहारिक डेडलाइन के बीच कुचले जा रहे हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आम लोग परेशान हैं।

    जलपाईगुड़ी में आंगनवाड़ी वर्कर ने की आत्महत्या

    सबसे दर्दनाक घटना जलपाईगुड़ी के माल इलाके की है। एक आंगनवाड़ी वर्कर, जो BLO का काम भी देख रही थी, मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली। ममता ने दावा किया कि ऐसी कई और घटनाएं सामने आ रही हैं। कई BLO को धमकियां मिल रही हैं, नोटिस थमाए जा रहे हैं।

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    किसान खेत में, फॉर्म कौन भरेगा?

    मुख्यमंत्री ने कृषि मौसम का भी हवाला दिया। अभी बंगाल में धान की कटाई और आलू की बुआई का पीक सीजन चल रहा है। लाखों किसान खेतों में डटे हैं। ऐसे में उनसे ऑनलाइन फॉर्म भरने की उम्मीद रखना व्यावहारिक नहीं है। अगर जल्दबाजी में प्रक्रिया चली तो लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट जाएंगे, जिससे लोकतंत्र को गहरा नुकसान होगा।

    ममता की चार बड़ी मांगें

    1. SIR को तुरंत रोका जाए
    2. BLO को पूरी और सही ट्रेनिंग दी जाए
    3. समय सीमा को यथार्थवादी बनाया जाए
    4. पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो

    राज्य के कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस इसे चुनाव से पहले मतदाताओं को डराने-हटाने की साजिश बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पारदर्शिता का कदम मानता है।

    फिलहाल पूरा बंगाल और चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया पर नजर टिकी है। क्या SIR रुकेगा या और तेज होगा? यह सवाल अब 2026 के रण को प्रभावित करने वाला है।

  • बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट में ECI का जवाब, 65 लाख मतदाताओं का मुद्दा

    बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट में ECI का जवाब, 65 लाख मतदाताओं का मुद्दा

    बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव आयोग (ECI) ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल किया है, जिसमें उसने स्पष्ट किया कि वह ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों की अलग सूची प्रकाशित करने या उनके बहिष्करण के कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है। यह जवाब एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका के जवाब में आया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को करेगा।

    ECI का पक्ष

    चुनाव आयोग ने 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों का हवाला देते हुए कहा कि नियम 10 और 11 के तहत उसे ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों की अलग सूची तैयार करने या उनके बहिष्करण के कारणों को प्रकाशित करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। ECI ने तर्क दिया कि चूंकि कानून या दिशानिर्देश ऐसी सूची तैयार करने का प्रावधान नहीं करते, इसलिए याचिका के माध्यम से इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता। आयोग ने यह भी बताया कि उसने राजनीतिक दलों को बूथ-स्तर पर उन व्यक्तियों की सूची प्रदान की है, जिनके नामांकन प्रपत्र विभिन्न कारणों से प्राप्त नहीं हुए। इन सूचियों में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, या गुमशुदा मतदाताओं के नाम शामिल हैं।

    ADR की याचिका

    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया गया कि बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची से बाहर रखा गया है। ADR ने मांग की कि ECI इन मतदाताओं के नाम, उनके बहिष्करण के कारण (जैसे मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लीकेट, या गुमशुदा), और बूथ-स्तरीय विवरण विधानसभा क्षेत्रवार प्रकाशित करे। साथ ही, उन मतदाताओं की सूची भी सार्वजनिक की जाए जिनके नामांकन प्रपत्र बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा “अनुशंसित नहीं” के रूप में चिह्नित किए गए।

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    ECI की प्रक्रिया और जवाब

    ECI ने बताया कि 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक दावा और आपत्ति की अवधि के दौरान, ड्राफ्ट सूची में शामिल न हुए व्यक्ति प्रपत्र 6 के माध्यम से SIR आदेश के तहत घोषणा-पत्र जमा कर मतदाता सूची में शामिल होने का दावा कर सकते हैं। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। ECI ने यह भी जोड़ा कि बहिष्करण के कारण बताने का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं है, क्योंकि मृत, स्थानांतरित, या गुमशुदा मतदाताओं के लिए प्रक्रिया एकसमान है।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    6 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने ECI से इस मामले में जवाब मांगा था और पूछा था कि क्या ड्राफ्ट मतदाता सूची को राजनीतिक दलों के साथ साझा किया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि याचिकाकर्ताओं की दलीलों में कोई अवैधता पाई गई, तो वह तुरंत कार्रवाई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमारी शक्ति को कम मत आंकिए। अगर कोई गलती पाई गई, तो हम सब कुछ रद्द कर देंगे।”

  • बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 1 अगस्त को ड्राफ्ट जारी

    बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 1 अगस्त को ड्राफ्ट जारी

    बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान के तहत, चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 1 अगस्त, 2025 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इस सूची में यदि किसी का नाम छूट गया हो या गलत तरीके से शामिल हो गया हो, तो राजनीतिक दल और जागरूक मतदाता आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आयोग ने बताया कि प्रारूप सूची जारी होने के तुरंत बाद, बिहार के सभी 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इसकी मुद्रित और डिजिटल प्रतियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही, यह सूची आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएगी, ताकि आम लोग इसे देख सकें और आवश्यक कार्रवाई कर सकें। आपत्तियों को संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (एईआरओ) के पास दर्ज कराया जा सकता है। यदि वहां संतुष्टि न मिले, तो जिला निर्वाचन अधिकारी या राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

    पुनरीक्षण अभियान: अब तक की प्रगति

    चुनाव आयोग के अनुसार, 24 जुलाई तक बिहार के 99 प्रतिशत मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच की है। अब तक 21.6 लाख मृत मतदाताओं के नाम चिह्नित किए गए हैं, जबकि 31.5 लाख मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए हैं। इसके अलावा, सात लाख मतदाताओं के नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज पाए गए हैं, और एक लाख मतदाताओं का कोई पता नहीं चल सका है। गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई, 2025 थी, लेकिन अभी भी करीब सात लाख मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं मिले हैं।

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    वोटरों की शिकायतें और समस्याएं

    पटना में कुछ मतदाताओं ने शिकायत की है कि उनके द्वारा जमा किए गए गणना फॉर्म के बावजूद, उनकी जानकारी गलत तरीके से दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, बांकीपुर विधानसभा के बूथ नंबर 305 के दो मतदाताओं ने बताया कि उन्होंने बीएलओ को फॉर्म जमा किया था, लेकिन एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने उन्हें सूचित किया कि उनका नाम उन लोगों की सूची में है, जिन्होंने फॉर्म जमा नहीं किया। इन मतदाताओं ने बीएलओ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बीएलओ ने फोन नहीं उठाया। ऐसे में सवाल उठता है कि उनके फॉर्म का क्या हुआ और यह कहां गुम हो गया।

    राजनीतिक दलों को सौंपी गई सूची

    चुनाव आयोग ने बताया कि 20 जुलाई को सभी जिलों में राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को मतदाता सूची से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा दी गई थी। इसके अलावा, 7.21 करोड़ मतदाताओं के गणना फॉर्म डिजिटल रूप से अपलोड किए जा चुके हैं। वर्तमान में बिहार में 7.90 करोड़ मतदाता सूची में दर्ज हैं। आयोग का यह अभियान मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    आगे की प्रक्रिया

    1 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद, मतदाताओं और राजनीतिक दलों को आपत्तियां दर्ज करने का पूरा मौका दिया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे, आयोग ने सभी पक्षों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। मतदाता अपनी जानकारी की जांच वेबसाइट पर कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।