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  • केंद्र सरकार का ओबीसी क्रीमी लेयर आय सीमा को एकसमान करने का प्रस्ताव

    केंद्र सरकार का ओबीसी क्रीमी लेयर आय सीमा को एकसमान करने का प्रस्ताव

    केंद्र सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर की आय सीमा को सभी संस्थाओं में एकसमान करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ओबीसी आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे और सभी संस्थानों में एकरूपता और निष्पक्षता बनी रहे। इस कदम से केंद्र सरकार, राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू), विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों में क्रीमी लेयर की आय सीमा समान होगी, जिससे भेदभाव की संभावना खत्म हो सकेगी।

    क्रीमी लेयर क्या है?

    क्रीमी लेयर की अवधारणा 1992 में सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले के फैसले से शुरू हुई थी। इसका मकसद ओबीसी समुदाय के उन सक्षम लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखना था, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आरक्षण का लाभ उन लोगों को मिले जो वास्तव में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। 2017 में केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर की आय सीमा को बढ़ाकर 8 लाख रुपये प्रति वर्ष निर्धारित किया था, जो वर्तमान में लागू है।

    क्रीमी लेयर में कौन आते हैं?

    क्रीमी लेयर में वे लोग शामिल हैं जो आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम हैं। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के बड़े पदों पर कार्यरत कर्मचारी, सशस्त्र बलों के अधिकारी, बड़े व्यवसायी, और वे लोग शामिल हैं जो निर्धारित आय सीमा को पार करते हैं। इस नए प्रस्ताव को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, पर्सनल एंड ट्रेनिंग विभाग, विधि मंत्रालय, श्रम और रोजगार मंत्रालय, सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय और नीति आयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने मिलकर तैयार किया है।

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    एकसमान आय सीमा की आवश्यकता क्यों?

    वर्तमान में कई केंद्रीय पीएसयू में 2017 में निर्धारित 8 लाख रुपये की क्रीमी लेयर आय सीमा लागू है। हालांकि, कई विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और राज्य सरकारों की इकाइयों में यह सीमा अलग-अलग है। केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में गैर-क्रीमी लेयर ओबीसी को 27% आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन राज्य सरकारों की नौकरियों में यह सीमा अलग हो सकती है। अलग-अलग आय सीमाओं के कारण ओबीसी समुदाय के लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है। एकसमान आय सीमा लागू होने से यह सुनिश्चित होगा कि सभी संस्थानों में एक ही मापदंड लागू हो, जिससे निष्पक्षता बढ़ेगी।

    शिक्षण संस्थानों पर प्रभाव

    रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी आमतौर पर लेवल 10 या उससे ऊपर होती है, जो कई बार केंद्र सरकार के ग्रुप-ए अधिकारियों की सैलरी के बराबर या उससे अधिक होती है। प्रस्ताव में इन पदों को भी क्रीमी लेयर के दायरे में लाने की बात है। यदि यह लागू होता है, तो इन पदों पर कार्यरत लोगों के बच्चे ओबीसी आरक्षण के लाभ से वंचित हो सकते हैं। इससे उन लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जो वास्तव में इसका हकदार हैं।