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  • राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ आरोप: चुनाव आयोग पर हमला, क्या है सच्चाई?

    राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ आरोप: चुनाव आयोग पर हमला, क्या है सच्चाई?

    राहुल गांधी का तीखा हमला

    कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार (18 सितंबर 2025) को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट में जानबूझकर हेराफेरी की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। राहुल ने कहा, “मैं अपने संविधान की रक्षा करूंगा… मुझे अपने देश और संविधान से प्यार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ‘वोट चोरों’ को बचा रहा है, खासकर कर्नाटक में जहां हजारों वोट डिलीट किए गए। यह आरोप 2024 लोकसभा चुनावों और 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनावों से जुड़े हैं, जहां उन्होंने दावा किया कि दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है। राहुल ने चुनाव आयोग से मांग की कि कर्नाटक CID को सभी सबूत सौंपे जाएं, अन्यथा यह लोकतंत्र की बुनियाद हिला देगा।

    राहुल गांधी के मुख्य आरोप: सबूतों का दावा

    राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां 6,018 वोट काटने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि केवल 14 मिनट में 12 वोट डिलीट हो गए, जो सेंट्रलाइज्ड सॉफ्टवेयर और कर्नाटक के बाहर से फोन नंबर्स के जरिए किया गया। राहुल ने तीन मामलों—गोदाबाई, सूर्यकांत और नागराज—का हवाला दिया, जहां फर्जी लॉगिन से वोट हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि यह कोई ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं है, बल्कि ‘बुलेटप्रूफ’ सबूत हैं, और असली ‘हाइड्रोजन बम’ जल्द आएगा। इसके अलावा, महादेवपुरा क्षेत्र में 1 लाख से ज्यादा फर्जी वोटों का जिक्र किया, जिसमें 11,956 डुप्लिकेट वोटर, 40,009 अवैध पते, 10,452 एक ही पते पर रजिस्टर्ड वोटर और 4,132 अमान्य फोटो वाले वोटर शामिल हैं। राहुल ने कहा कि यह व्यवस्थित धांधली है, जो कांग्रेस के मजबूत इलाकों को निशाना बनाती है, और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इसे बचा रहे हैं। कर्नाटक CID ने 18 महीनों में 18 रिमाइंडर पत्र भेजे, लेकिन ECI ने जानकारी नहीं दी। राहुल ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी गड़बड़ी न रुकी, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।

    चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया: आरोपों को खारिज

    चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ और ‘भ्रामक’ बताया। ECI ने कहा कि कोई भी वोट बिना प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिए डिलीट नहीं किया जाता, और सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार हैं। आयोग ने सोशल मीडिया पर फैक्ट चेक जारी कर दावा किया कि राहुल ने डेटा को ‘मैनिपुलेट’ किया है। उदाहरण के लिए, शकुनी रानी के दोहरे वोटिंग के दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में केवल एक बार वोट पड़ा। ECI ने कर्नाटक CEO के जरिए राहुल से दस्तावेज और शपथ-पत्र मांगा, ताकि जांच हो सके। अगर 7 दिनों में शपथ-पत्र न दिया, तो आरोप ‘अमान्य’ माने जाएंगे। आयोग ने यह भी कहा कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने गोपनीयता के आधार पर मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने की मांग खारिज की थी। BJP ने भी राहुल पर हमला बोला, कहते हुए कि झूठे आरोप उनकी आदत बन गई है। ECI ने महादेवपुरा के आंकड़ों को स्पष्ट किया कि 1,00,250 में से कई वैध हैं, जैसे गरीब वोटरों के साझा पते।

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    क्या है वास्तविकता: हेराफेरी या राजनीतिक बयानबाजी?

    यह सवाल जटिल है। राहुल गांधी के दावे डेटा-आधारित लगते हैं, लेकिन ECI उन्हें चुनौती दे रहा है। कर्नाटक में आलंद और महादेवपुरा जैसे मामलों में वोटर लिस्ट में असंगतियां संभव हैं, खासकर बड़े चुनावों में जहां करोड़ों वोटर हैं। पूर्व CEC एस. वाई. कुरैशी ने कहा कि आरोपों की जांच होनी चाहिए। हालांकि, ECI का कहना है कि कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई, और डेटा की व्याख्या गलत है। यह राजनीतिक बयानबाजी का रंग ले चुका है, क्योंकि 2024 चुनावों के बाद विपक्ष ECI पर सवाल उठा रहा है। लेकिन पारदर्शिता की कमी—जैसे डिजिटल लिस्ट न देना—शक पैदा करती है। स्वतंत्र सत्यापन की जरूरत है, जैसे सुप्रीम कोर्ट में याचिका। कुल मिलाकर, सबूतों की जांच से सच्चाई सामने आएगी; फिलहाल यह विवाद लोकतंत्र की मजबूती का परीक्षण है।

    लोकतंत्र की रक्षा जरूरी

    राहुल गांधी के आरोपों ने चुनाव प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है। चाहे हेराफेरी हो या बयानबाजी, पारदर्शिता सुनिश्चित करना ECI की जिम्मेदारी है। जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। अगर सबूत मजबूत साबित हुए, तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा झटका होगा; अन्यथा, यह विपक्ष की रणनीति मानी जाएगी। देश को ऐसी पारदर्शिता चाहिए जहां वोट सुरक्षित हो।

  • इलेक्शन कमीशन पर सवाल: वोट की चोरी या लोकतंत्र की साख?

    इलेक्शन कमीशन पर सवाल: वोट की चोरी या लोकतंत्र की साख?

    लोकतंत्र का पवित्र पर्व और सवालों का सैलाब

    चुनाव, जिसे लोकतंत्र का सबसे पवित्र पर्व कहा जाता है, आज सवालों के घेरे में है। जब वोट जनता का हो, लेकिन फैसला किसी और की जेब में हो, तो क्या यह लोकतंत्र की आत्मा पर चोट नहीं है? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ हुई। उनके मुताबिक, 1,00,250 फर्जी वोटों के जरिए बीजेपी को जिताने की साजिश रची गई। ये आरोप न केवल कर्नाटक तक सीमित हैं, बल्कि राहुल गांधी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित धांधली का हिस्सा बताया।

    राहुल गांधी के आरोप और मांग

    राहुल गांधी ने इलेक्शन कमीशन से साफ जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि सबूत—जैसे फर्जी मतदाता, डुप्लिकेट वोटर, अवैध पते, और सीसीटीवी फुटेज में दर्ज गड़बड़ियां—कमीशन के पास पहले से मौजूद हैं। उनकी मांग है कि ये सारे सबूत एक हफ्ते में सार्वजनिक किए जाएं और कर्नाटक सीआईडी को सौंपे जाएं। गांधी ने यह भी कहा कि अगर कमीशन ऐसा नहीं करता, तो जनता यह सवाल पूछेगी कि आखिर वह दोषियों को क्यों बचा रहा है? उनके शब्दों में, “यह अब सिर्फ वोट का मामला नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का सवाल है।”

    इलेक्शन कमीशन का जवाब

    इलेक्शन कमीशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे ‘बेबुनियाद’ और ‘भ्रामक’ करार दिया। कमीशन ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को गलत ठहराया और कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए लिखित शपथ-पत्र के साथ सबूत पेश किए जाएं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर सात दिनों के भीतर शपथ-पत्र नहीं दिया गया, तो इन आरोपों को ‘अमान्य’ माना जाएगा। कमीशन ने यह भी स्पष्ट किया कि मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में गोपनीयता के आधार पर खारिज कर दिया था।

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    कर्नाटक में फर्जीवाड़े का दावा

    राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा में 11,956 डुप्लिकेट वोटर, 40,009 अवैध पतों, 10,452 एक ही पते पर पंजीकृत मतदाता, और 4,132 अवैध फोटो वाले मतदाताओं का हवाला दिया। उन्होंने एक 70 साल की महिला, शकुनी रानी, का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उन्होंने दो बार मतदान किया। हालांकि, कमीशन ने इसका खंडन करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में शकुनी रानी ने केवल एक बार वोट दिया। इसके अलावा, कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र और हरियाणा में भी ऐसी गड़बड़ियों की बात सामने आई है।

    पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त की राय

    पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने कमीशन की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के आरोपों की जांच होनी चाहिए थी, न कि उन्हें शपथ-पत्र के लिए दबाव डाला जाना चाहिए। कुरैशी ने कमीशन के रवैये को ‘आपत्तिजनक’ बताया और कहा कि ऐसी शिकायतों पर तुरंत जांच शुरू करना सामान्य प्रक्रिया है।

    सच्चाई की ज़रूरत

    यह विवाद अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मामला नहीं है। यह भारत के लोकतंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का सवाल है। अगर वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां हैं, तो उन्हें ठीक करना इलेक्शन कमीशन की ज़िम्मेदारी है। राहुल गांधी की मांग और कमीशन का जवाब दोनों ही इस बात को रेखांकित करते हैं कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता जरूरी है। सवाल यह है कि क्या कमीशन इन आरोपों की गहन जांच करेगा, या चुप्पी सच्चाई को दबा देगी? देश की नज़रें इस पर टिकी हैं।

  • बिहार विधानसभा चुनाव 2025: तारीखों की घोषणा अक्टूबर में, नवंबर में मतदान की संभावना

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025: तारीखों की घोषणा अक्टूबर में, नवंबर में मतदान की संभावना

    चुनाव आयोग की तैयारियाँ जोरों पर

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग अगले महीने यानी अक्टूबर 2025 में विधानसभा चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा कर सकता है। संभावना है कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में यह ऐलान हो सकता है। इस बार चुनाव नवंबर में दो या तीन चरणों में कराए जाने की उम्मीद है। साथ ही, 15 से 20 नवंबर के बीच मतगणना पूरी हो सकती है। यानी 22 नवंबर से पहले पूरी चुनावी प्रक्रिया को संपन्न करने की योजना है।

    चुनाव आयोग ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। विशेष संक्षिप्त संशोधन (SIR) के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पहले ही जारी हो चुकी है, और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सितंबर 2025 के अंत तक होने की उम्मीद है। ऐसे में, चुनाव की घोषणा अब केवल औपचारिकता मात्र रह गई है।

    त्योहारों को ध्यान में रखकर तय होंगी तारीखें

    सूत्रों के अनुसार, चुनावी तारीखों का ऐलान दुर्गा पूजा और दशहरा के बाद किया जाएगा। वहीं, मतदान की तारीखें छठ पूजा के बाद रखी जाएंगी ताकि त्योहारों के दौरान मतदाताओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो। यह कदम बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।

    राजनीतिक दलों की तैयारियाँ तेज

    चुनाव से पहले बिहार में राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। एनडीए गठबंधन लगातार सम्मेलन और रणनीतिक बैठकों के जरिए अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू कर लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की रणनीति अपनाई है। हाल ही में 3 सितंबर 2025 को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री ने बिहार बीजेपी नेताओं के साथ चुनावी रणनीति पर एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

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    मतदाता सूची में बदलाव, उठे सवाल

    इस बार के चुनाव में मतदाता संख्या भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पहले बिहार में लगभग 8 करोड़ मतदाता थे, लेकिन इस बार लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल डुप्लीकेट नामों और मृतकों के नामों को ही हटाया गया है। यह कदम मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए उठाया गया है।

    बिहार में बढ़ती चुनावी सरगर्मी

    जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं, और सोशल मीडिया पर भी प्रचार जोरों पर है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं। यह चुनाव न केवल बिहार की सियासत के लिए बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 निश्चित रूप से एक रोमांचक और निर्णायक सियासी जंग का गवाह बनेगा।

  • बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 1 अगस्त को ड्राफ्ट जारी

    बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 1 अगस्त को ड्राफ्ट जारी

    बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान के तहत, चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 1 अगस्त, 2025 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इस सूची में यदि किसी का नाम छूट गया हो या गलत तरीके से शामिल हो गया हो, तो राजनीतिक दल और जागरूक मतदाता आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आयोग ने बताया कि प्रारूप सूची जारी होने के तुरंत बाद, बिहार के सभी 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इसकी मुद्रित और डिजिटल प्रतियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही, यह सूची आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएगी, ताकि आम लोग इसे देख सकें और आवश्यक कार्रवाई कर सकें। आपत्तियों को संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (एईआरओ) के पास दर्ज कराया जा सकता है। यदि वहां संतुष्टि न मिले, तो जिला निर्वाचन अधिकारी या राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

    पुनरीक्षण अभियान: अब तक की प्रगति

    चुनाव आयोग के अनुसार, 24 जुलाई तक बिहार के 99 प्रतिशत मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच की है। अब तक 21.6 लाख मृत मतदाताओं के नाम चिह्नित किए गए हैं, जबकि 31.5 लाख मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए हैं। इसके अलावा, सात लाख मतदाताओं के नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज पाए गए हैं, और एक लाख मतदाताओं का कोई पता नहीं चल सका है। गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई, 2025 थी, लेकिन अभी भी करीब सात लाख मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं मिले हैं।

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    वोटरों की शिकायतें और समस्याएं

    पटना में कुछ मतदाताओं ने शिकायत की है कि उनके द्वारा जमा किए गए गणना फॉर्म के बावजूद, उनकी जानकारी गलत तरीके से दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, बांकीपुर विधानसभा के बूथ नंबर 305 के दो मतदाताओं ने बताया कि उन्होंने बीएलओ को फॉर्म जमा किया था, लेकिन एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने उन्हें सूचित किया कि उनका नाम उन लोगों की सूची में है, जिन्होंने फॉर्म जमा नहीं किया। इन मतदाताओं ने बीएलओ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बीएलओ ने फोन नहीं उठाया। ऐसे में सवाल उठता है कि उनके फॉर्म का क्या हुआ और यह कहां गुम हो गया।

    राजनीतिक दलों को सौंपी गई सूची

    चुनाव आयोग ने बताया कि 20 जुलाई को सभी जिलों में राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को मतदाता सूची से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा दी गई थी। इसके अलावा, 7.21 करोड़ मतदाताओं के गणना फॉर्म डिजिटल रूप से अपलोड किए जा चुके हैं। वर्तमान में बिहार में 7.90 करोड़ मतदाता सूची में दर्ज हैं। आयोग का यह अभियान मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    आगे की प्रक्रिया

    1 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद, मतदाताओं और राजनीतिक दलों को आपत्तियां दर्ज करने का पूरा मौका दिया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे, आयोग ने सभी पक्षों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। मतदाता अपनी जानकारी की जांच वेबसाइट पर कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।