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  • हरियाणा CM का जापान दौरा: Economic & Cultural Collaboration को बढ़ावा

    हरियाणा CM का जापान दौरा: Economic & Cultural Collaboration को बढ़ावा

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जापान दौरे पर हैं, जहां उन्होंने राज्य और जापान के बीच economic collaboration, cultural exchange, और technical cooperation को मजबूत करने पर जोर दिया। इस यात्रा के दौरान उन्हें प्रवासी भारतीय संगठन (PIO) ने भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा प्रतिनिधिमंडल ने जापान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से महत्वपूर्ण बैठकें की। इस दौरान हरियाणा और जापान के बीच trade, investment opportunities, और cultural relations को आगे बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

    जापान के Foreign Affairs State Minister से हुई अहम बैठक

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जापान के विदेश मामलों के राज्य मंत्री Miyaji Takuma के साथ बैठक की। बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापारिक अवसर, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर विचार साझा किए।

    मुख्यमंत्री ने जापान को Haryana Global Investors Summit 2026 में Partner Country बनने का आमंत्रण भी दिया। यह समिट अप्रैल 2026 में हरियाणा में आयोजित किया जाएगा और इसमें दुनियाभर के निवेशक और उद्योगपति हिस्सा लेंगे।

    व्यापार, तकनीक और MSME सहयोग के नए अवसर

    हरियाणा प्रतिनिधिमंडल ने जापान के उद्योग, वाणिज्य और ऊर्जा मंत्रालय (MEIT) के राज्य मंत्री Yogichiro Koga से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने mobility, green energy, semiconductors, infrastructure, और digital transformation जैसे क्षेत्रों में छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के सहयोग के अवसर खोजे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा हरियाणा और जापान के बीच mutual economic growth और technology transfer के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विशेष रूप से हरियाणा में smart cities, renewable energy projects, और innovative startups के लिए जापानी निवेश को प्रोत्साहित किया।

    सांस्कृतिक साझेदारी और International Events

    मुख्यमंत्री सैनी ने जापान को नवंबर 2025 में आयोजित International Geeta Mahotsav में आमंत्रित किया। यह महोत्सव हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक इतिहास का उत्सव है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा और जापान के बीच cultural exchange programs, tourism development, और heritage promotion से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ेगा।

    आधिकारिक बयान और भविष्य की योजनाएँ

    हरियाणा के आधिकारिक सूचना विभाग ने इस यात्रा की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। मुख्यमंत्री ने अपनी आधिकारिक पोस्ट में लिखा:

    “जापान सरकार के विदेश राज्य मंत्री Miyaji Takuma के साथ सार्थक बैठक हुई। हमने हरियाणा और जापान के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के अवसरों पर चर्चा की।”

    सैनी ने यह भी कहा कि आगामी Global Investors Summit 2026 और International Geeta Mahotsav हरियाणा को वैश्विक निवेशकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए आकर्षक बनाएंगे।0

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जापान दौरा हरियाणा के लिए strategic international partnerships, investment opportunities, और cultural diplomacy को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दौरा न केवल economic growth बढ़ाएगा, बल्कि हरियाणा को वैश्विक स्तर पर preferred investment destination के रूप में स्थापित करेगा।

  • भारत-चीन संबंधों पर चीनी राजदूत का संदेश: अतीत को पीछे छोड़ें, भविष्य पर फोकस करें

    भारत-चीन संबंधों पर चीनी राजदूत का संदेश: अतीत को पीछे छोड़ें, भविष्य पर फोकस करें

    भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया व्यापार नीतियों के बीच आया है, जहां ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। राजदूत ने कहा कि पुराने सीमा विवादों को अतीत में छोड़कर वर्तमान संबंधों को सुधारने और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। यह बयान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के 76वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में दिया गया, जहां उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

    75 वर्षों का सफर: उतार-चढ़ाव के बावजूद दोस्ताना आधार

    इस वर्ष भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि इतने लंबे समय में संबंधों में उतार-चढ़ाव तो आए, लेकिन मुख्य रूप से ये दोस्ताना सहयोग पर आधारित रहे हैं। उन्होंने उच्च स्तरीय संपर्कों में सुधार और लोगों के बीच बढ़ती समझ का जिक्र किया। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन में सफल बैठक ने संबंधों को नई ऊंचाई दी है। इस बैठक में दोनों नेताओं ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध के बाद उड़ानों, वीजा और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों को बहाल करने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के सचिव अरुण कुमार चटर्जी, जो समारोह में मौजूद थे, ने इसकी पुष्टि की।

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    सीमा विवाद को अलग रखें: आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाएं

    शू फेइहोंग ने स्पष्ट कहा कि सीमा विवाद को अलग रखकर भी आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। चीन-भारत आर्थिक संबंधों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें मिलकर मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में होगा। 2025 की पहली छमाही में चीन में 30,000 से अधिक विदेशी निवेश वाली कंपनियां स्थापित हुईं, जो 11.7% की वृद्धि दर्शाती है। राजदूत ने गरीबी उन्मूलन में चीन की सफलता का उदाहरण दिया, जहां पिछले दशक में 10 करोड़ ग्रामीण गरीबों को गरीबी से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को आपसी हितों का सम्मान करते हुए संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि छोटे मतभेद सहयोग में बाधा न बनें।

    शांति के सिद्धांत और वैश्विक दक्षिण की एकजुटता

    राजदूत ने शांति के पांच सिद्धांतों (पंचशील) को आगे बढ़ाने पर बल दिया, जिसमें किसी देश का दूसरे पर वर्चस्व या जबरदस्ती अस्वीकार्य है। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा के लिए भारत-चीन को एकजुट होने की वकालत की। विशेष रूप से, ट्रंप प्रशासन की “अनुचित और अविवेकपूर्ण” टैरिफ नीतियों के खिलाफ दोनों देशों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। शू फेइहोंग ने कहा कि टैरिफ और व्यापार युद्धों का कड़ा विरोध करना जरूरी है, क्योंकि ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने मानवता के साझा भविष्य के लिए सहयोग पर जोर दिया, जिसमें व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय मुद्दों पर संयुक्त प्रयास शामिल हैं।

    ट्रंप के लिए संदेश: टैरिफ युद्धों का विरोध

    यह बयान ट्रंप की नीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। चीन ने इसे “व्यापार युद्ध” करार देते हुए विरोध जताया है। राजदूत ने कहा कि शक्ति की राजनीति और टैरिफ का दौर समाप्त होना चाहिए। दोनों देशों को मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा, जैसे जलवायु परिवर्तन और आर्थिक स्थिरता। हाल ही में चीन ने भारतीय यात्रियों के लिए तिब्बत में कailash mansarovar यात्रा को फिर से शुरू किया, जिसमें 700 आधिकारिक और 20,000 निजी तीर्थयात्री शामिल हुए। चीनी दूतावास ने सितंबर तक 2.65 लाख वीजा जारी किए।

    स्थिरता और विकास की नई दिशा

    संक्षेप में, शू फेइहोंग का संदेश स्पष्ट है – अतीत के विवादों को पीछे छोड़कर भारत-चीन संबंधों को स्थिरता, शांति और विकास की नई दिशा दें। दोनों देशों के बीच सहयोग से न केवल द्विपक्षीय लाभ होगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब LAC पर तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं, और SCO जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ रहा है। भारत और चीन की साझेदारी वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।