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  • पुरी के स्वर्गद्वार में चमत्कार: 86 साल की लक्ष्मी की मौत के मुंह से वापसी!

    पुरी के स्वर्गद्वार में चमत्कार: 86 साल की लक्ष्मी की मौत के मुंह से वापसी!

    एक अविश्वसनीय घटना

    पुरी के स्वर्गद्वार श्मशान घाट, जहाँ लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं, वहाँ हाल ही में एक ऐसी घटना घटी, जिसने सभी को हक्का-बक्का कर दिया। 86 वर्षीय पी. लक्ष्मी को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। उनके परिजन दुखी मन से उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए स्वर्गद्वार ले गए। लेकिन जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। यह कहानी न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जीवन कितना अप्रत्याशित हो सकता है।

    मृत्यु के बाद की तैयारियाँ

    लक्ष्मी जी के परिवार ने उनके निधन की खबर सुनकर अंतिम संस्कार की सभी तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। श्मशान घाट पर पंडितों ने विधि-विधान शुरू किया। चिता सजाई जा रही थी, और परिजन आंसुओं के साथ अपनी प्रिय लक्ष्मी को अंतिम विदाई देने को तैयार थे। हर कोई इस दुखद क्षण में डूबा हुआ था। लेकिन तभी, कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को चौंका दिया।

    चमत्कार का पल

    जैसे ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, पंडितों और परिवारवालों ने कुछ असामान्य देखा। लक्ष्मी जी की छाती में हल्की-सी हलचल दिखाई दी। पहले तो सभी ने इसे भ्रम समझा, लेकिन जब ध्यान से देखा गया, तो उनकी सांसें चल रही थीं और धड़कन महसूस हो रही थी। यह दृश्य देखकर श्मशान घाट पर सन्नाटा छा गया, और फिर चीख-पुकार मच गई। यह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। लक्ष्मी, जिन्हें मृत मान लिया गया था, जीवित थीं!

    अस्पताल की ओर दौड़

    परिजनों ने तुरंत अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रोक दी और लक्ष्मी जी को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया और उनका इलाज शुरू किया। आश्चर्यजनक रूप से, लक्ष्मी जी की हालत स्थिर होने लगी। यह घटना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक चमत्कार थी। मौत के मुंह से वापस लौटने वाली लक्ष्मी जी की कहानी अब चर्चा का विषय बन चुकी है।

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    क्या कहती है यह घटना?

    यह घटना हमें जीवन की अनिश्चितता और चिकित्सा विज्ञान की सीमाओं के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। कई बार, मृत घोषित किए गए लोग चमत्कारिक रूप से जीवित पाए जाते हैं। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि जीवन का हर पल अनमोल है। लक्ष्मी जी की कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो मुश्किल परिस्थितियों में हिम्मत हार जाते हैं।

  • जया बच्चन का पैपराजी पर गुस्सा: रोनो मुखर्जी की प्रार्थना सभा में हंगामा

    जया बच्चन का पैपराजी पर गुस्सा: रोनो मुखर्जी की प्रार्थना सभा में हंगामा

    3 जून को मुंबई में दिवंगत डायरेक्टर रोनो मुखर्जी की प्रार्थना सभा में दिग्गज अभिनेत्री और सांसद जया बच्चन अपनी बेटी श्वेता बच्चन के साथ शामिल हुईं। रोनो मुखर्जी, जो अभिनेत्री काजोल और रानी मुखर्जी के चाचा थे, का 28 मई को हृदयाघात के कारण निधन हो गया था। इस गमगीन अवसर पर बॉलीवुड की कई हस्तियों ने रोनो को श्रद्धांजलि दी, लेकिन जया बच्चन का पैपराजी पर गुस्सा इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बन गया। एक वायरल वीडियो में जया को फोटोग्राफर्स पर नाराजगी जाहिर करते देखा गया, जो उनकी तस्वीरें और वीडियो ले रहे थे।

    वायरल वीडियो: जया का गुस्सा और श्वेता की शांत करने की कोशिश

    वायरल वीडियो में जया बच्चन फोन पर बात करती दिखीं। कॉल खत्म करने के बाद उन्होंने पैपराजी की ओर रुख किया और गुस्से में कहा, “चलिए… आप लोग भी साथ में आएं… आ जाएं। बकवास सब।” उनकी बेटी श्वेता ने उन्हें शांत करने की कोशिश की और कार में बैठने में मदद की। हालांकि, कार में बैठते समय जया फिर भड़क गईं और एक फोटोग्राफर से बोलीं, “आओ… आप गाड़ी में आ जाओ।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

    जया के इस रिएक्शन पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि प्रार्थना सभा जैसे निजी और गंभीर अवसर पर तस्वीरें लेना अनुचित है। एक यूजर ने लिखा, “जया जी सही हैं। प्रार्थना सभा में फोटो खींचना गलत है। उनकी पीढ़ी ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेती है।” वहीं, कुछ लोगों ने उनके गुस्से पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “पैपराजी भी तो अपना काम कर रहे हैं। इतना गुस्सा क्यों?” एक अन्य ने टिप्पणी की, “प्रार्थना सभा में भी इतना एटीट्यूड!”

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    जया बच्चन और पैपराजी का पुराना विवाद

    यह पहली बार नहीं है जब जया बच्चन ने पैपराजी पर गुस्सा जाहिर किया हो। वह अक्सर फोटोग्राफर्स की हरकतों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करती रही हैं। अपने पॉडकास्ट ‘व्हाट द हेल नव्या’ में उन्होंने पैपराजी संस्कृति की कड़ी आलोचना की थी। जया ने कहा, “मुझे ऐसी हरकतों से नफरत है। मैं उन लोगों से घृणा करती हूं जो निजी जीवन में दखल देते हैं और इसे बेचकर पैसा कमाते हैं। मेरे काम की आलोचना करें, मुझे बुरा नहीं लगता, लेकिन बाकी सब गलत है।” उनका यह बयान उनकी निजता के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    रोनो मुखर्जी: बॉलीवुड के एक सितारे का अंत

    रोनो मुखर्जी बॉलीवुड के एक प्रतिष्ठित डायरेक्टर थे, जिन्होंने कई यादगार फिल्में दीं। उनकी प्रार्थना सभा में जया और श्वेता के अलावा कई अन्य बॉलीवुड हस्तियां शामिल हुईं, जो उनके प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करने आई थीं। जया का गुस्सा भले ही सुर्खियों में रहा, लेकिन यह उनके रोनो मुखर्जी के प्रति गहरे सम्मान और इस दुखद अवसर की गंभीरता को भी दर्शाता है।

    यह घटना एक बार फिर निजता और मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाती है। जहां कुछ लोग पैपराजी को उनका काम करने की आजादी देते हैं, वहीं जया जैसे सितारे इसे निजी जीवन में दखल मानते हैं। इस बहस का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से सोचने पर मजबूर करता है कि क्या निजता का सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए।