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  • दिल्ली में घने कोहरे की मार: IGI एयरपोर्ट पर 129 उड़ानें रद्द, यात्रियों की मुसीबत बढ़ी

    दिल्ली में घने कोहरे की मार: IGI एयरपोर्ट पर 129 उड़ानें रद्द, यात्रियों की मुसीबत बढ़ी

    कोहरे ने किया हवाई यातायात ठप

    दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को घना कोहरा छा जाने से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उड़ान सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। सुबह विजिबिलिटी बेहद कम होने से कुल 129 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिनमें 66 आने वाली और 63 जाने वाली फ्लाइट्स शामिल हैं। कई अन्य उड़ानें देरी से चलीं या रिशेड्यूल की गईं। टर्मिनलों पर यात्रियों की लंबी कतारें लगी रहीं, कई को आखिरी पर कैंसिलेशन की सूचना मिली, जबकि कुछ घंटों इंतजार करते रहे।

    DIAL का बयान और सुरक्षा उपाय

    दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने बयान जारी कर कहा कि कोहरे के कारण लो विजिबिलिटी प्रोसीजर्स लागू हैं। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि कुछ उड़ानें रद्द हुईं, लेकिन ऑपरेशंस सामान्य चल रहे हैं। CAT-III सुविधा वाले विमानों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो कम विजिबिलिटी में लैंडिंग-टेकऑफ कर सकते हैं।

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    मौसम विभाग की चेतावनी और सलाह

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में सुबह और देर रात घने कोहरे की चेतावनी जारी की है, जिससे हवाई, रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई कि एयरपोर्ट जाने से पहले फ्लाइट स्टेटस चेक करें और एयरलाइंस की एडवाइजरी फॉलो करें। उत्तरी भारत में कोहरे का असर जारी रहने की संभावना है।

  • उत्तर भारत में मॉनसून का कहर: 50 सालों में दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला सीजन

    उत्तर भारत में मॉनसून का कहर: 50 सालों में दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला सीजन

    उत्तर भारत में इस साल मॉनसून ने भारी तबाही मचाई है। 22 अगस्त से 4 सितंबर 2025 तक हुई भीषण बारिश ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस दौरान उत्तर भारत में 205.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 73.1 मिमी से तीन गुना अधिक है। यह पिछले 14 वर्षों में सबसे अधिक बारिश है और 1988 के बाद सबसे ज्यादा बरसात वाला मॉनसून साबित हो रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी नुकसान पहुंचाया है।

    पंजाब में दशक की सबसे भीषण बाढ़

    पंजाब में इस दशक की सबसे भयावह बाढ़ ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है। भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, जिससे लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। गांवों और शहरों में जलभराव की स्थिति ने जनजीवन को ठप कर दिया है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा।

    जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से तबाही

    जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मार्ग पर बादल फटने की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कों और रास्तों के क्षतिग्रस्त होने से तीर्थयात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूस्खलन और बाढ़ ने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को चरमरा दिया है, जिससे प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं।

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    दिल्ली में यमुना का प्रकोप

    दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। भारी बारिश के कारण नदी उफान पर है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सड़कों पर जलभराव और यातायात जाम ने राजधानी की रफ्तार को रोक दिया है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

    हिमाचल और उत्तराखंड में भूस्खलन की मार

    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। सड़कें बंद होने और गांवों के अलग-थलग होने से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राहत कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है, और कई क्षेत्रों में बिजली व संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

    मॉनसून 2025: 37% अधिक बारिश

    आईएमडी के अनुसार, इस मॉनसून सीजन में अब तक उत्तर भारत में 691.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 37% अधिक है। अगर बाकी सीजन में सामान्य बारिश भी होती है, तो कुल बारिश 750 मिमी से अधिक हो सकती है। यह 1988 के रिकॉर्ड (813.5 मिमी) के बाद पिछले 50 वर्षों में दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला सीजन होगा।

    क्यों हो रही इतनी बारिश?

    आईएमडी के चीफ मृत्युंजय मोहपात्रा के अनुसार, इस बारिश का कारण दो मौसमी सिस्टमों का एक साथ मिलना है। पश्चिमी विक्षोभ ने भूमध्य सागर से नमी युक्त हवाएं लाईं, जो मॉनसून की हवाओं के साथ मिल गईं। यह स्थिति 23 से 27 अगस्त और फिर 29 अगस्त से सितंबर तक देखी गई। इस असामान्य मौसमी गतिविधि ने भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं को बढ़ावा दिया, जैसा कि 2013 में केदारनाथ त्रासदी के दौरान हुआ था।

    क्षेत्रवार बारिश का प्रभाव

    पंजाब में पहले सप्ताह में 388% और दूसरे सप्ताह में 454% अधिक बारिश दर्ज की गई। हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ में 325%, हिमाचल प्रदेश में 314%, पश्चिम राजस्थान में 285%, जम्मू-कश्मीर में 240%, और उत्तराखंड में 190% अधिक बारिश हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश को छोड़कर, उत्तर-पश्चिम भारत के सभी हिस्सों में बारिश ने कहर बरपाया है।

  • मौसम अलर्ट: भारी बारिश, आंधी और लू की चेतावनी

    मौसम अलर्ट: भारी बारिश, आंधी और लू की चेतावनी

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 17 से 22 मई 2025 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश, तेज हवाएं, आंधी, बिजली गिरने और लू की चेतावनी जारी की है। मौसम का मिजाज इस समय दो हिस्सों में बंटा हुआ है। जहां दक्षिण भारत में लगातार बारिश हो रही है, वहीं उत्तर भारत में गर्मी और लू का प्रकोप जारी है।

    दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी

    IMD के अनुसार, 17 से 22 मई के बीच केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और आंतरिक कर्नाटक में तेज बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, 19 और 20 मई को कर्नाटक में और 20 मई को लक्षद्वीप में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 17 मई को, जबकि रायलसीमा में 19 और 20 मई को भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव जैसी स्थिति से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में वर्षा का अनुमान

    पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 17 से 21 मई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। त्रिपुरा में 17 और 18 मई को तेज वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 17 से 20 मई तक और गंगीय पश्चिम बंगाल व बिहार में 18 मई को भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए सतर्कता बरतने की जरूरत है।

    आंधी-तूफान और तेज हवाओं का खतरा

    IMD ने कोंकण और गोवा में 19 से 21 मई के दौरान 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है, जो 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। मध्य महाराष्ट्र में 20 और 21 मई को तेज आंधी और भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में पेड़ गिरने, बिजली लाइनों को नुकसान और यातायात बाधित होने की आशंका है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

    उत्तर भारत में लू का प्रकोप

    उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश में 17 से 22 मई के बीच लू चलने की संभावना है। बिहार और ओडिशा में 16 और 17 मई को गर्म और आर्द्र मौसम बना रह सकता है। गर्मी से बचने के लिए लोगों को अधिक पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

    सावधानी और तैयारी जरूरी

    देश में मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते हुए आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और आंधी-तूफान से बचाव के लिए घरों की मरम्मत, नालियों की सफाई और आपातकालीन किट तैयार रखें। उत्तर भारत में लू से बचने के लिए हाइड्रेशन और ठंडे स्थानों पर रहने को प्राथमिकता दें। IMD द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखें।