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  • ऑपरेशन सिंदूर: रात 1:30 बजे का साहसिक हमला, CDS अनिल चौहान ने खोले राज

    ऑपरेशन सिंदूर: रात 1:30 बजे का साहसिक हमला, CDS अनिल चौहान ने खोले राज

    ऑपरेशन सिंदूर का परिचय: पाकिस्तानी ठिकानों पर सटीक प्रहार

    भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान साबित हुआ, जिसने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दुनिया को भारत की सैन्य ताकत का परिचय दिया। यह ऑपरेशन 15 अगस्त 2025 को शुरू हुआ, जब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में हमले किए, जिसमें कई निर्दोष नागरिक मारे गए। जवाब में भारतीय सेना ने बहावलपुर और मुरिदके जैसे प्रमुख आतंकी हॉटस्पॉट्स को निशाना बनाया। CDS जनरल अनिल चौहान ने बताया कि यह अभियान पारंपरिक युद्ध की सीमाओं को तोड़ता है—यह भूमि, वायु, समुद्र और साइबर क्षेत्रों में लड़ा गया। अत्याधुनिक ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल कर सेना ने 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। यह न केवल सैन्य सफलता थी, बल्कि रणनीतिक संदेश भी—भारत किसी भी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देगा। ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ रखा गया, जो उन बहनों-बेटियों के खोए हुए सुख-चैन का प्रतीक है, जिन्हें आतंकियों ने उजाड़ा।

    रात 1:30 बजे का रहस्य: CDS चौहान ने दिए स्पष्ट जवाब

    सभी के मन में एक बड़ा सवाल था—ऐसा महत्वपूर्ण ऑपरेशन रात के डेढ़ बजे क्यों? CDS अनिल चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया, “अगर हम सुबह 5 या 6 बजे हमला करते, तो वह पहला अजान या नमाज का समय होता। बहावलपुर और मुरिदके में उस वक्त बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद होते। उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।” इसलिए रात 1:30 बजे का समय चुना गया, जब नागरिक गतिविधियां न्यूनतम हों। चौहान ने जोर दिया कि सेना को अपनी तकनीक पर पूरा भरोसा था—सैटेलाइट इमेज, नाइट विजन ड्रोन और AI-आधारित टारगेटिंग से हमलावरों को सटीक निशाना बनाया गया। इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि रात के अंधेरे में भी लंबी दूरी के टारगेट्स को बिना नुकसान पहुंचाए नष्ट किया जा सकता है। यह निर्णय न केवल नैतिक था, बल्कि रणनीतिक भी—पाकिस्तान को संदेश दिया कि भारत सटीकता और मानवता दोनों पर जोर देता है।

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    बहुआयामी युद्ध: तकनीक और हिम्मत का संगम

    ऑपरेशन सिंदूर ने आधुनिक युद्ध का नया अध्याय लिखा। यह केवल हवाई हमलों तक सीमित न रहा—इंडियन नेवी ने अरब सागर में पाकिस्तानी नौसैन्य ठिकानों पर नजर रखी, जबकि आर्मी के स्पेशल फोर्सेस ने ग्राउंड इंटेलिजेंस प्रदान की। साइबर यूनिट्स ने पाकिस्तानी कम्युनिकेशन नेटवर्क को जाम कर दिया, जिससे आतंकियों की कोऑर्डिनेशन बाधित हुई। चौहान ने कहा, “हमारे वीर जवानों ने पलक झपकते ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया।” कल ही एक पाकिस्तानी आतंकी का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह रो-रोकर अपना हाल बयां कर रहा था—यह ऑपरेशन की सफलता का जीवंत प्रमाण है। सेना ने ब्रह्मोस मिसाइल और स्वदेशी ड्रोन का इस्तेमाल किया, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ताकत दिखाता है। इस अभियान से पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को भारी झटका लगा, और सीमा पर शांति की उम्मीद जगी।

    CDS चौहान का संदेश: युवाओं को सेना में आने का आह्वान

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद CDS अनिल चौहान ने युवाओं को प्रेरित करने वाला संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आप मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल दुनिया से आगे बढ़ो। उन जगहों की साहसिक यात्रा पर निकलो, जिनकी कोई धनराशि गारंटी नहीं दे सकती। यदि आपके मन में देश की सेवा का जुनून है, तो सशस्त्र बलों में आओ और देश की रक्षा करो।” यह आह्वान उन युवाओं के लिए है, जो सोशल मीडिया पर खोए हैं—ऑपरेशन जैसी वास्तविक चुनौतियां उन्हें सच्ची पहचान देंगी। चौहान ने जोर दिया कि सेना में शामिल होना केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का अवसर है। हाल के वर्षों में आर्मी भर्ती में युवाओं की संख्या बढ़ी है, और ऐसे अभियान इससे प्रेरणा लेते हैं। यह संदेश न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि सेना की भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करेगा।

    रणनीतिक महत्व: भारत की सैन्य श्रेष्ठता का प्रतीक

    यह ऑपरेशन सिर्फ एक सैन्य जीत नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक मजबूती का प्रतीक है। पाकिस्तान से आए आतंकियों ने हमारी बहनों-बेटियों का ‘सिंदूर’ उजाड़ा था—ऑपरेशन सिंदूर ने उनके ठिकानों को तबाह कर बदला लिया। चौहान ने कहा, “तकनीक और हिम्मत ने पाकिस्तान को हर बार करारा जवाब दिया।” वैश्विक स्तर पर यह अभियान सराहा गया—अमेरिका और इजरायल ने भारत की सटीकता की तारीफ की। लेकिन चुनौतियां बाकी हैं; पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। फिर भी, यह ऑपरेशन सीमा सुरक्षा को मजबूत करेगा और आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को रेखांकित करता है।

    देश में गर्व की लहर: सेना का सम्मान बढ़ा

    देशवासियों के दिल में ऑपरेशन सिंदूर से गर्व की भावना जागी है। सोशल मीडिया पर #OperationSindoor ट्रेंड कर रहा, जहां लाखों यूजर्स जवानों को सलाम कर रहे। स्कूलों में विशेष सभाएं हुईं, और PM मोदी ने संसद में सेना की सराहना की। यह अभियान युवाओं को देशभक्ति का पाठ पढ़ाता है—रात के डेढ़ बजे भी भारत जागता है। भारतीय सेना ने फिर साबित कर दिया कि वह हर चुनौती के लिए तैयार है। भविष्य में ऐसे ऑपरेशन आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।

    नई लड़ाई का आगाज

    ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रुख अपनाएगा। CDS चौहान के खुलासे से स्पष्ट है—हमारी सेना मानवता और तकनीक का संतुलन रखती है। यह जीत हर भारतीय का गर्व है। युवा आगे आएं, सेना मजबूत बने—तभी ‘सुरक्षित भारत’ का सपना साकार होगा। जय हिंद!

  • भारत की UN में अपील: अफगानिस्तान से आतंकवाद रोकने की वैश्विक मांग

    भारत की UN में अपील: अफगानिस्तान से आतंकवाद रोकने की वैश्विक मांग

    परिचय: भारत की चिंता और UN में आवाज़

    भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक महत्वपूर्ण अपील की है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय समुद्री को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे UN द्वारा घोषित आतंकवादी संगठनों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ सतर्क रहने को कहा गया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने बुधवार (18 सितंबर 2025) को कहा कि भारत अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। उन्होंने जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न करें। यह अपील दक्षिण एशिया में बढ़ते आतंकवाद के खतरे को ध्यान में रखते हुए की गई है, जहां LeT और JeM जैसे समूहों की सक्रियता ने क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल दिया है।

    भारत-अफगानिस्तान संबंध और शांति की प्रतिबद्धता

    राजदूत हरीश ने स्पष्ट किया कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सभ्यतागत संबंध सदियों पुराने हैं, और युद्धग्रस्त देश में शांति व स्थिरता बनाए रखना भारत के सर्वोच्च हित में है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय सहयोग के बिना अफगानिस्तान में शांति और विकास संभव नहीं। भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान की है और 500 से अधिक विकास परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से दो बार बातचीत की है। विशेष रूप से, भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले की अफगान पक्ष द्वारा की गई कड़ी निंदा का स्वागत किया। भारत लगातार अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह अपील UNSC रेजोल्यूशन 2593 के अनुरूप है, जो अफगान मिट्टी का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल न करने की मांग करता है।

    आतंकवादी संगठनों की सक्रियता: LeT और JeM का खतरा

    लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद UN द्वारा प्रतिबंधित संगठन हैं, जो पाकिस्तान से संचालित होकर अफगानिस्तान में ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं। 2025 में इन संगठनों की सक्रियता बढ़ी है। उदाहरणस्वरूप, अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले में JeM का हाथ माना गया, जिसके बाद भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया और 10 मई 2025 को सीजफायर हुआ। LeT और JeM के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं, लेकिन दोनों ही भारत के खिलाफ हमलों की योजना बना रहे हैं। अफगानिस्तान में इनके कैंपों का इस्तेमाल भर्ती और ट्रेनिंग के लिए हो रहा है। भारत ने हाल ही में श्रीनगर के पास LeT से जुड़े तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया। ये संगठन न केवल भारत, बल्कि नेपाल जैसे पड़ोसी देशों को भी खतरा पैदा कर रहे हैं। UNSC ने इन समूहों को Al-Qaida और तालिबान से जुड़ा बताया है।

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    अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया: क्या कड़े कदम उठेंगे?

    अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ चिंता जताई है, लेकिन कड़े कदम सीमित हैं। NATO ने 2025 में एक अपडेटेड एक्शन प्लान जारी किया, जिसमें अफगानिस्तान को आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना न बनने देने पर जोर दिया गया। UNSC ने 17 मार्च 2026 तक UNAMA (UN Assistance Mission in Afghanistan) का मंडेट बढ़ाया, जिसमें आतंकवाद विरोधी मॉनिटरिंग पर फोकस है। अमेरिका ने पाकिस्तान की सहयोग की सराहना की है, लेकिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद भी पाकिस्तान पर दबाव कम है। तालिबान ने ISIS-K के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन LeT-JeM जैसे समूहों को बख्शा जा रहा है। USIP की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान की कमजोरी से आतंकवाद बढ़ सकता है। हालांकि, सितंबर 2025 तक कोई बड़ा कदम नहीं उठा, जैसे अतिरिक्त प्रतिबंध या सैन्य सहायता। क्षेत्रीय स्तर पर, पाकिस्तान ने Azm-e-Istehkam अभियान चलाया, लेकिन TTP जैसे समूह अफगानिस्तान से हमले कर रहे हैं।

    मेरा विश्लेषण: कड़े कदमों की संभावना

    मैं सोचता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान और इन आतंकवादी समूहों पर कड़े कदम उठाने में हिचकिचा रहा है, लेकिन दबाव बढ़ रहा है। 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद UNSC ने चिंता जताई, लेकिन व्यावहारिक कार्रवाई सीमित है। NATO और UN के प्लान सकारात्मक हैं, लेकिन तालिबान की कमजोरी और पाकिस्तान की दोहरी नीति (आतंकवाद का समर्थन और सहयोग का दावा) बाधा हैं। यदि पहलगाम जैसे हमले बढ़ते रहे, तो अमेरिका और यूरोपीय देश अतिरिक्त प्रतिबंध या इंटेलिजेंस शेयरिंग बढ़ा सकते हैं। भारत की अपील ने वैश्विक ध्यान खींचा है, लेकिन वास्तविक बदलाव के लिए क्षेत्रीय सहयोग (जैसे भारत-ईरान-चीन) जरूरी है। कुल मिलाकर, कड़े कदम संभव हैं, लेकिन धीमी गति से।

    शांति के लिए एकजुटता की जरूरत

    भारत की यह अपील दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान में शांति सुनिश्चित करने से न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया लाभान्वित होगी। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अब शब्दों से आगे बढ़कर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि LeT-JeM जैसे संगठन कुचले जा सकें। भारत की सक्रिय भूमिका सराहनीय है, और उम्मीद है कि वैश्विक सहयोग से आतंकवाद का सफाया होगा।

  • जैश-ए-मोहम्मद की म्यांमार में घुसपैठ: भारत की पूर्वी सीमा पर बढ़ा खतरा

    जैश-ए-मोहम्मद की म्यांमार में घुसपैठ: भारत की पूर्वी सीमा पर बढ़ा खतरा

    भारत के लिए आतंकवाद का सबसे बड़ा स्रोत पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। न्यूज की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, यह संगठन अब म्यांमार में अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है और वहां स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ रहा है।

    पहले खबर आई थी कि जैश बांग्लादेश में नेटवर्क बना रहा है, लेकिन अब म्यांमार में इसकी सक्रियता भारत की पूर्वी सीमा पर गंभीर खतरे की आहट दे रही है।

    म्यांमार में आतंकी ट्रेनिंग और फंडिंग

    रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार का एक आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तान स्थित बालाकोट ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण लेकर वापस लौटा है और वहां अब जैश के एक वरिष्ठ कमांडर के अधीन कार्य कर रहा है।

    इस नेटवर्क को करीब 42 लाख रुपये (लगभग $50,000) की फंडिंग मिल रही है। ये आतंकी संगठन स्थानीय रोहिंग्या मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा है, उन्हें हथियार और रणनीतिक प्रशिक्षण दे रहा है।

    अस्थिरता का फायदा उठा रहा जैश

    म्यांमार पहले से ही राजनीतिक संकट और आंतरिक संघर्ष से जूझ रहा है। यही अस्थिरता जैश के लिए वरदान साबित हो रही है, जहां वह आसान शिकार तलाश कर उन्हें आतंकी बनाने में जुटा है। म्यांमार की स्थिति का फायदा उठाकर जैश पूर्वोत्तर भारत में हिंसा फैलाने की साजिश रच सकता है।

    भारत के लिए बढ़ा खतरा

    भारत और म्यांमार के बीच की सीमा लगभग खुली है और पहाड़ी इलाका होने के कारण यह सुरक्षा के लिहाज़ से काफी चुनौतीपूर्ण है। इस खुली सीमा का फायदा उठाकर आतंकी घुसपैठ और हथियारों की तस्करी कर सकते हैं।

    जैश-ए-मोहम्मद का इतिहास भी इसी ओर इशारा करता है। भारत पर इसके द्वारा किए गए हमले जैसे –

    2001 का संसद हमला

    2016 का पठानकोट हमला

    2019 का पुलवामा हमला

    इन सभी हमलों में दर्जनों भारतीय जवान शहीद हुए थे।

    क्या है मसूद अजहर की भूमिका?

    जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की इस पूरे ऑपरेशन में अहम भूमिका है। वह ना सिर्फ रणनीति बना रहा है, बल्कि फंडिंग और नेटवर्क विस्तार को भी खुद मॉनिटर कर रहा है।

    भारत को क्या करना चाहिए?

    भारत को चाहिए कि वह:

    म्यांमार के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाए

    सीमा सुरक्षा को आधुनिक बनाए

    खुफिया तंत्र को सक्रिय कर जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाए

    पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानीय प्रशासन को सतर्क करे

  • त्राल के नाडेर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों पर सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई

    त्राल के नाडेर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों पर सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई

    जम्मू-कश्मीर के त्राल में गुरुवार को सुरक्षाबलों ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ कड़ा प्रहार किया। अवंतीपोरा के नाडेर इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया। इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया था और कुछ घंटों की तीव्र गोलीबारी के बाद तीनों आतंकी ढेर हो गए। मारे गए आतंकियों की पहचान यावर अहमद भट्ट, आसिफ अहमद शेख और आमिर नजीर वानी के रूप में हुई है। ये आतंकी क्षेत्र में दहशत फैलाने की साजिश रच रहे थे और इनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे।

    जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गुरुवार सुबह अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस एनकाउंटर की जानकारी साझा की। कश्मीर जोन पुलिस ने लिखा, “अवंतीपोरा के नाडेर, त्राल इलाके में पुलिस और सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ एनकाउंटर शुरू कर दिया है।” दोपहर तक चले इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने तीनों आतंकियों को सफलतापूर्वक निष्प्रभावी कर दिया। इस कार्रवाई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत अंजाम दिया गया, जो हाल के महीनों में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की लगातार सफलताओं का हिस्सा है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत कश्मीर के कई इलाकों में आतंकियों के खिलाफ सघन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक कई आतंकी मारे जा चुके हैं।

    यह पहला मौका नहीं है जब सुरक्षाबलों ने आतंकियों को इस तरह निशाना बनाया हो। इससे पहले मंगलवार को शोपियां जिले में राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट ने एक अन्य मुठभेड़ में तीन आतंकियों को ढेर किया था। इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया और त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें मार गिराया। मारे गए आतंकियों के पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद और अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए, जो उनकी खतरनाक मंशा को दर्शाते हैं। इन हथियारों में कई उन्नत तकनीक वाले उपकरण भी शामिल थे, जो आतंकियों की योजना की गंभीरता को उजागर करते हैं।

    ऑपरेशन सिंदूर ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत किया है। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस ऑपरेशन के जरिए सुरक्षाबलों ने करारा जवाब दिया है। इस कार्रवाई ने न केवल आतंकियों के मंसूबों को नाकाम किया, बल्कि सीमा पार बैठे उनके आकाओं को भी सख्त संदेश दिया है। पाकिस्तान द्वारा बार-बार आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन भारतीय सेना और सुरक्षाबल हर बार उनकी साजिश को विफल कर रहे हैं।

    कश्मीर के कई इलाकों में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी हैं। सुरक्षाबल संदिग्ध ठिकानों की तलाशी ले रहे हैं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। इन अभियानों में स्थानीय पुलिस और सेना के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिल रहा है, जिसके चलते आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावी हो रही है।

    जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों का यह अभियान लगातार जारी है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई न केवल आतंकियों को निशाना बना रही है, बल्कि क्षेत्र में आम लोगों के बीच विश्वास भी पैदा कर रही है। सुरक्षाबलों की इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर अडिग है।