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  • आज की मॉक ड्रिल स्थगित, नई तारीख जल्द घोषित होगी

    आज की मॉक ड्रिल स्थगित, नई तारीख जल्द घोषित होगी

    भारत सरकार द्वारा आज गुरुवार को देशभर में प्रस्तावित सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल को प्रशासनिक कारणों से स्थगित कर दिया गया है। यह अभ्यास ‘ऑपरेशन शील्ड’ के अंतर्गत शाम 5 बजे से भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे राज्यों में आयोजित किया जाना था।

    किन राज्यों में मॉक ड्रिल टली?

    इस मॉक ड्रिल को खासतौर पर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे सीमावर्ती राज्यों में किया जाना था। लेकिन अब इसे अगली तारीख तक टाल दिया गया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने भी मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट संबंधी सूचना को रद्द करने की पुष्टि कर दी है।

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     मॉक ड्रिल में होता क्या है?

    मॉक ड्रिल के दौरान एक सायरन बजाया जाता है। नागरिकों को आपातकालीन निकासी (Emergency Exit) की प्रक्रिया सिखाई जाती है।मेडिकल सहायता, ब्लैकआउट प्रोटोकॉल और हवाई हमले की स्थिति में सुरक्षित रहने की ट्रेनिंग दी जाती है।यह अभ्यास सरकार को यह परखने का मौका देता है कि संकट के समय प्रशासनिक तैयारी कितनी प्रभावी है । सरकार जल्द ही मॉक ड्रिल की नई तारीख का ऐलान करेगी। सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को इस स्थगन की सूचना दे दी गई है  ।

  • प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज 11 बजे कैबिनेट की अहम बैठक, इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

    प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज 11 बजे कैबिनेट की अहम बैठक, इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 11 बजे अपने आवास पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक देश और दुनिया में बदलते हालात के बीच नीति, सुरक्षा और विकास के अहम विषयों पर चर्चा के लिए बुलाई गई है।

    पिछली कैबिनेट बैठकों की यादें

    14 मई 2025 को हुई बैठक में भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत उत्तर प्रदेश में छठी सेमीकंडक्टर यूनिट की मंजूरी दी गई थी। यह नई यूनिट यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में, जेवर एयरपोर्ट के पास, HCL और फॉक्सकॉन के संयुक्त उद्यम के तहत बनेगी।

    यहां मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल और डिजिटल उपकरणों के लिए आवश्यक डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन होगा।भारत के मेक इन इंडिया और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने में यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। 7 मई 2025 को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने संशोधित ‘शक्ति’ नीति के तहत ताप विद्युत संयंत्रों को नया कोयला लिंकेज देने की मंजूरी दी थी।

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    30 अप्रैल 2025 को कैबिनेट की बैठक जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद आंतरिक सुरक्षा को लेकर बुलाई गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग की थी।

    इस बैठक में क्या हो सकता है?

    देश में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा आर्थिक और विकासात्मक नीतियों की समीक्षा । अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के मुताबिक नीतिगत फैसले भारत के सामरिक और तकनीकी क्षेत्रों को मजबूत बनाने के उपाय। यह बैठक देश की वर्तमान और भविष्य की नीतियों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

  • भारत की दो टूक: ‘जगुलर वेन’ नहीं, कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे से आज़ाद होगा

    भारत की दो टूक: ‘जगुलर वेन’ नहीं, कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे से आज़ाद होगा

    “पाकिस्तान का कश्मीर से एक ही संबंध है – कि उसे अवैध कब्जे वाले इलाक़े खाली करने हैं।” भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर उसी की ज़ुबान में जवाब दिया है। ताज़ा विवाद की शुरुआत हुई पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के उस बयान से, जिसमें उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की “जगुलर वेन” (जीवनरेखा) बताया और दो-राष्ट्र सिद्धांत की दुहाई दी।

    लेकिन भारत ने इस बयान को पूरी तरह खारिज करते हुए कड़ी चेतावनी दी है।

    विदेश मंत्रालय का तीखा पलटवार

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा:

    “पाकिस्तान का कश्मीर से केवल एक ही रिश्ता है — वह अवैध रूप से कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हिस्सों को खाली करे।”

    उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख के बयानों को “भड़काऊ और तथ्यहीन” करार दिया और कहा कि भारत ऐसी किसी भी बयानबाज़ी को गंभीरता से लेता है जो देश की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देती हो।

    कश्मीर को ‘जगुलर वेन’ बताना कितना खतरनाक है?

    जनरल आसिम मुनीर ने अपने बयान में कहा कि “कश्मीर पाकिस्तान की जीवनरेखा है और पाकिस्तान इसे किसी भी सूरत में नहीं छोड़ सकता।” यह वही पुराना बयान है जिसे पाकिस्तान की मिलिट्री और राजनीतिक नेतृत्व दशकों से दोहराता रहा है — लेकिन हर बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर असफल रहा है।

    “जगुलर वेन” का मतलब होता है – ऐसा हिस्सा जिसकी चोट से पूरा सिस्टम ध्वस्त हो जाए। यानी पाकिस्तान ने यह कहकर एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि उसके लिए कश्मीर कोई राजनीतिक मसला नहीं, रणनीतिक युद्ध का कारण है।

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    दो-राष्ट्र सिद्धांत: एक विफल सोच की वापसी

    जनरल मुनीर ने भारत के खिलाफ दो-राष्ट्र सिद्धांत का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत में मुस्लिमों को बराबरी का दर्जा नहीं मिला। यह वही सिद्धांत है जिसके आधार पर 1947 में पाकिस्तान का निर्माण हुआ था — और जिसकी विफलता आज खुद पाकिस्तान की हालत में साफ दिखती है।

    भारत के राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि दो-राष्ट्र सिद्धांत अब इतिहास की कब्र में दफन हो चुका है, और पाकिस्तान उसे दोबारा जिंदा कर केवल धार्मिक उन्माद फैलाना चाहता है।

    पाकिस्तान की फिक्र – अपने घर की करो

    विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि पाकिस्तान को कश्मीर की चिंता छोड़कर पहले अपने देश की हालत सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, जहां:

    • अल्पसंख्यक समुदायों पर अत्याचार हो रहा है,
    • आतंकवाद पनप रहा है,
    • अर्थव्यवस्था रसातल में जा रही है,
    • और सेना खुद राजनीति पर काबिज़ है।

    भारत ने पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ही पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर भारत के रुख को मान्यता दे चुका है, और अब दुनिया पाकिस्तान की बातें सुनने को तैयार नहीं है।

    भारत की नीति – स्पष्ट, ठोस और संप्रभुता आधारित

    भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि:

    1. कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है — यह संवैधानिक रूप से, ऐतिहासिक रूप से और सांस्कृतिक रूप से भारत में ही रहेगा।
    2. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के वैध हिस्से हैं, जिन पर पाकिस्तान ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है।
    3. 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणापत्र में पाकिस्तान ने खुद स्वीकार किया है कि भारत-पाक मुद्दे द्विपक्षीय तरीके से सुलझाए जाएंगे – लेकिन अब पाकिस्तान अपने ही वादों से मुकर रहा है।

    पाकिस्तान को यह समझना होगा कि आज का भारत सशक्त, आत्मनिर्भर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य नेतृत्व वाला राष्ट्र है। भारत अब सिर्फ जवाब नहीं देता, करारा जवाब देता है।

    कश्मीर को “जगुलर वेन” बताने की मानसिकता से पाकिस्तान न सिर्फ भारत की संप्रभुता को चुनौती देता है, बल्कि अपने असली मर्ज़ को भी छिपाने की कोशिश करता है।

    अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट रूप से बता दिया जाए:
    कश्मीर न कभी पाकिस्तान का हिस्सा था, न होगा। और जो हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है – वह भी जल्द भारत के पास वापस आएगा।

  • राम नवमी से पहले दार्जिलिंग में बढ़ाई गई सुरक्षा, प्रशासन सतर्क

    राम नवमी से पहले दार्जिलिंग में बढ़ाई गई सुरक्षा, प्रशासन सतर्क

    राम नवमी से पहले दार्जिलिंग में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। पर्व के मद्देनज़र संभावित भीड़भाड़, जुलूस और धार्मिक आयोजनों को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। दार्जिलिंग में राम नवमी का पर्व भले ही उत्तर भारत जैसा भव्य न हो, लेकिन हर साल यहां भी स्थानीय हिन्दू समुदाय द्वारा पूजा, शोभा यात्रा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस बार प्रशासन किसी भी तरह की अव्यवस्था या अफवाह से बचने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

    सुरक्षा के लिए खास इंतज़ाम

    • शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती
    • ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए निगरानी
    • भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) की तैनाती
    • धार्मिक आयोजनों के आयोजकों के साथ समन्वय बैठकें

    दार्जिलिंग पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शांति और सौहार्द बनाए रखना हमारी पहली प्राथमिकता है। किसी भी अफवाह, सोशल मीडिया भड़कावे या विवादित गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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    स्थानीय लोगों से अपील

    प्रशासन ने आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पर्व को शांतिपूर्ण और भाईचारे के माहौल में मनाएं। किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

    उत्तर भारत के लिए संदेश

    जहाँ एक ओर अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे उत्तर भारतीय शहरों में राम नवमी की भव्य तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं पूर्वी भारत में भी त्योहार को शांति और श्रद्धा के साथ मनाने की तैयारी की जा रही है। यह कदम इस बात का प्रतीक है कि चाहे क्षेत्र कोई भी हो  राम की भक्ति एकता का संदेश देती है।