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  • Mohan Bhagwat ने लिव-इन रिलेशनशिप की ये बड़ी टिप्पणी!

    Mohan Bhagwat ने लिव-इन रिलेशनशिप की ये बड़ी टिप्पणी!

    Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत में हाल में ही एक ऐसा बयान दे दिया है, जो लोगों को बीच में विशेष चर्चा क विषय बन गया है। कोलकाता में आरएसएस के शताब्दि समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने लीवइन रिलेशनशिप पर एक बड़ी बात कह दी है। साथ ही दांपत्य जीवन पर भी अपनी एक बड़ी राय दी है। आइए एक नज़र डालते है कि मोहन भागवत ने शताब्दि समारोह पर संबोधन के दौरान अपने बयान में क्या कुछ कहा। तो खबर को अंत तक पढ़ना न भूले।

    Mohan Bhagwat ने कही ये बड़ी बात

    जानकारी के लिए बता दे कि कोलकाता में आरएसएस शताब्दि समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि लीव इन रिलेशनशिप गैर जिम्मेदाराना हरकत है। और जो लोग जिम्मेदारी नही लेना चाहते वो लीव इन रिलेशनशिप को सपोर्ट करते है। साथ ही मोहन भागवत ने शादी के उम्र पर भी एक बड़ी बात कही है। मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा है कि विशेषज्ञों के मुाताबिक 18 से 25 साल के उम्र तक शादी और तीन बच्चे हो जाना इंसान के सेहत के लिए बेहद जरूरी है। वहीं बात अगर मोहन भागवत की करे तो अपने बयान में मोहन भागवत ने आगे कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ये उम्र मही माने गए है।

    सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    इसके अलावा Mohan Bhagwat ने साफ कहा कि अगर कोई इंसान जिम्मेदारी नही लेना चाहता है तो उसे सन्यास का रास्ता चुन लेना चाहिए। और साथ ही मोहन भागवत ने ये स्पष्ट किया कि ये उनके कोई व्यक्तिगत अनुभव नही है। बल्कि विशेषज्ञों के द्वारा दी गई सलाह है। वहीं अब मोहन भागवत के इस बयान पर लगो की प्रतिक्रिया भी आनी शुरु हो गई है। कई लोग मोहन भागवत के इस बयान का समर्थन कर रहे है, तो वही कुछ लोग इस बयान को बेबुनियाद भी बता रहे है। तो कुल मिला कर मोहन भागवत के इस बयान पर अब आरोप प्रत्यारोप भी शुरु हो गए है। सोशल मीडिया पर भर भर के लोगो के रिएक्शन भी सामने आ रहे है। अब देखना होगा कि मोहन भागवत के इस बयान पर अब आगे क्या कुछ देखने और सुनने को मिलता है।

  • विज्ञान भवन से विश्व तक: संघ की विचारधारा का घोषणापत्र

    विज्ञान भवन से विश्व तक: संघ की विचारधारा का घोषणापत्र

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित व्याख्यानमाला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा- नए क्षितिज’ में सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ के विचार, नीतियों और दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व के लिए स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि तीन मूलभूत सिद्धांतों—व्यक्ति निर्माण, समाज परिवर्तन और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा—पर संघ कभी समझौता नहीं करेगा। ये सिद्धांत संघ की जड़ें हैं और अपरिवर्तनीय हैं। भागवत ने विभिन्न मुद्दों जैसे हिंदू की परिभाषा, आरक्षण, शिक्षा, जनसंख्या, और काशी-मथुरा जैसे विषयों पर भी स्पष्ट विचार रखे। 200 से अधिक सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। आइए, उनके प्रमुख विचारों को समझें।

    हिंदू की परिभाषा

    मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू वह है जो अपनी श्रद्धा के साथ दूसरों की श्रद्धा का सम्मान करता है। हिंदू विचारधारा सभी को अपने मार्ग पर चलने की स्वतंत्रता देती है, बिना किसी को बदलने या अपमानित करने की कोशिश किए। उन्होंने कहा, “विश्व में कहीं भी वर्षा होती है, वह अंततः सागर में ही जाती है।” इसी तरह, सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। हिंदू परंपरा में आपसी झगड़े नहीं, बल्कि मिलजुलकर चलने का संदेश है।

    काशी-मथुरा और राम मंदिर

    राम मंदिर आंदोलन में संघ की सक्रिय भूमिका रही, लेकिन काशी और मथुरा के मुद्दों पर भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ स्वयं आंदोलन में नहीं जाएगा। हालांकि, ये तीनों स्थान हिंदू मानस में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इन तीन स्थलों को लेकर भाईचारा बढ़ाने के लिए समझदारी दिखाई जानी चाहिए। साथ ही, हर जगह मंदिर या शिवलिंग की खोज से बचने की सलाह दी।

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    शिक्षा और गुरुकुल पद्धति

    भागवत ने गुरुकुल शिक्षा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने फिनलैंड के शिक्षा मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मातृभाषा में शिक्षा और व्यक्तिगत ध्यान पर बल दिया जाता है, जो गुरुकुल पद्धति से मिलता-जुलता है। उन्होंने सुझाव दिया कि वैदिक काल की 64 कलाओं को व्यावहारिक रूप से पढ़ाया जाए। साथ ही, स्कूलों में संविधान, नागरिक कर्तव्यों और अधिकारों की जानकारी दी जानी चाहिए।

    जनसंख्या और सामाजिक समरसता

    जनसंख्या नीति पर भागवत ने कहा कि तीन बच्चों तक की नीति उचित है, लेकिन संसाधनों का प्रबंधन भी जरूरी है। सामाजिक समरसता के लिए उन्होंने मंदिर, पानी और श्मशान में भेदभाव खत्म करने की बात कही। उन्होंने वंचित वर्गों के साथ मित्रता और सहयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

    स्वदेशी और आत्मनिर्भरता

    आत्मनिर्भरता को राष्ट्र की कुंजी बताते हुए भागवत ने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानव के नियंत्रण में होना चाहिए, न कि मानव तकनीक का गुलाम बने।

  • PM मोदी नागपुर पहुंचे, RSS मुख्यालय में श्रद्धांजलि

    PM मोदी नागपुर पहुंचे, RSS मुख्यालय में श्रद्धांजलि

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नागपुर दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने स्मृति मंदिर में संघ के संस्थापक डॉ. के. बी. हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ RSS प्रमुख मोहन भागवत भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने हेडगेवार के साथ-साथ संघ के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

    प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार RSS मुख्यालय पहुंचे मोदी

    प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पहली बार RSS मुख्यालय पहुंचे हैं। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी अपने कार्यकाल के दौरान संघ मुख्यालय का दौरा कर चुके हैं। संघ अपने शताब्दी वर्ष की तैयारियों में जुटा हुआ है, और इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    RSS के शताब्दी वर्ष का जश्न

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस मौके पर संघ देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का संघ मुख्यालय में आना इस ऐतिहासिक अवसर के महत्व को और बढ़ा देता है।

    संघ और सरकार के रिश्ते पर नई चर्चा

    प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार और संघ के बीच गहरे संबंध बने हुए हैं। नागपुर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अन्य विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं।

    RSS मुख्यालय में प्रधानमंत्री का यह दौरा न सिर्फ राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। संघ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संबंधों को देखते हुए इसे 2024 के आम चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।