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  • रूस और नाटो तनाव रूसी ड्रोन की घुसपैठ के बाद यूरोप में सुरक्षा समीकरण बदलने की तैयारी

    रूस और नाटो तनाव रूसी ड्रोन की घुसपैठ के बाद यूरोप में सुरक्षा समीकरण बदलने की तैयारी

    यूरोप में रूस और नाटो के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में खबर आई कि रूसी ड्रोन नाटो की एयरस्पेस के करीब घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे थे। इस घटना ने सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यूरोप के कई देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और नाटो ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

    तुर्की का तुरंत एक्शन

    घुसपैठ की खबर मिलते ही तुर्की ने बड़ा कदम उठाया। तुर्की ने लिथुआनिया में तुरंत एक चेतावनी विमान तैनात कर दिया, ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत मुकाबला किया जा सके। तुर्की के इस कदम को यूरोप में सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी माना जा रहा है। यह कदम रूस के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि नाटो अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करेगा।

    पोलैंड के नए सुरक्षा नियम

    इस बीच पोलैंड ने भी अपने सुरक्षा नियम बदलने की योजना बनाई है। नई नीति के तहत पोलिश सेना को अधिकार दिया जा सकता है कि वह रूसी ड्रोन को सीधे मार गिरा सके, वह भी नाटो की मंजूरी के बिना। यह बदलाव न केवल पोलैंड की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि यूरोप में सामरिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

    यूरोप में सुरक्षा समीकरण पर असर

    ये दोनों कदम यूरोप में सुरक्षा समीकरण को पूरी तरह बदल सकते हैं। नाटो और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तुर्की और पोलैंड जैसे सदस्य देशों की सक्रिय भूमिका महत्त्वपूर्ण साबित होगी। इससे रूस के लिए यूरोप में अपने सैन्य और हवाई प्रयासों को बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।रूस और नाटो के बीच यह तनाव सिर्फ़ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर डाल सकता है। यूरोप के देशों द्वारा लिए जा रहे कदम यह दर्शाते हैं कि अब सुरक्षा केवल नाटो की कमान तक सीमित नहीं है, बल्कि सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी और तत्काल निर्णय क्षमता भी अहम भूमिका निभा रही है। रूस के लिए यह एक सीधी चुनौती है, जबकि नाटो और यूरोप के लिए यह अवसर है कि वे अपनी रणनीति और सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करें।

  • भारत की UN में अपील: अफगानिस्तान से आतंकवाद रोकने की वैश्विक मांग

    भारत की UN में अपील: अफगानिस्तान से आतंकवाद रोकने की वैश्विक मांग

    परिचय: भारत की चिंता और UN में आवाज़

    भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक महत्वपूर्ण अपील की है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय समुद्री को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे UN द्वारा घोषित आतंकवादी संगठनों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ सतर्क रहने को कहा गया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने बुधवार (18 सितंबर 2025) को कहा कि भारत अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। उन्होंने जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न करें। यह अपील दक्षिण एशिया में बढ़ते आतंकवाद के खतरे को ध्यान में रखते हुए की गई है, जहां LeT और JeM जैसे समूहों की सक्रियता ने क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल दिया है।

    भारत-अफगानिस्तान संबंध और शांति की प्रतिबद्धता

    राजदूत हरीश ने स्पष्ट किया कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सभ्यतागत संबंध सदियों पुराने हैं, और युद्धग्रस्त देश में शांति व स्थिरता बनाए रखना भारत के सर्वोच्च हित में है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय सहयोग के बिना अफगानिस्तान में शांति और विकास संभव नहीं। भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान की है और 500 से अधिक विकास परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से दो बार बातचीत की है। विशेष रूप से, भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले की अफगान पक्ष द्वारा की गई कड़ी निंदा का स्वागत किया। भारत लगातार अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह अपील UNSC रेजोल्यूशन 2593 के अनुरूप है, जो अफगान मिट्टी का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल न करने की मांग करता है।

    आतंकवादी संगठनों की सक्रियता: LeT और JeM का खतरा

    लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद UN द्वारा प्रतिबंधित संगठन हैं, जो पाकिस्तान से संचालित होकर अफगानिस्तान में ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं। 2025 में इन संगठनों की सक्रियता बढ़ी है। उदाहरणस्वरूप, अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले में JeM का हाथ माना गया, जिसके बाद भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया और 10 मई 2025 को सीजफायर हुआ। LeT और JeM के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं, लेकिन दोनों ही भारत के खिलाफ हमलों की योजना बना रहे हैं। अफगानिस्तान में इनके कैंपों का इस्तेमाल भर्ती और ट्रेनिंग के लिए हो रहा है। भारत ने हाल ही में श्रीनगर के पास LeT से जुड़े तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया। ये संगठन न केवल भारत, बल्कि नेपाल जैसे पड़ोसी देशों को भी खतरा पैदा कर रहे हैं। UNSC ने इन समूहों को Al-Qaida और तालिबान से जुड़ा बताया है।

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    अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया: क्या कड़े कदम उठेंगे?

    अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ चिंता जताई है, लेकिन कड़े कदम सीमित हैं। NATO ने 2025 में एक अपडेटेड एक्शन प्लान जारी किया, जिसमें अफगानिस्तान को आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना न बनने देने पर जोर दिया गया। UNSC ने 17 मार्च 2026 तक UNAMA (UN Assistance Mission in Afghanistan) का मंडेट बढ़ाया, जिसमें आतंकवाद विरोधी मॉनिटरिंग पर फोकस है। अमेरिका ने पाकिस्तान की सहयोग की सराहना की है, लेकिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद भी पाकिस्तान पर दबाव कम है। तालिबान ने ISIS-K के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन LeT-JeM जैसे समूहों को बख्शा जा रहा है। USIP की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान की कमजोरी से आतंकवाद बढ़ सकता है। हालांकि, सितंबर 2025 तक कोई बड़ा कदम नहीं उठा, जैसे अतिरिक्त प्रतिबंध या सैन्य सहायता। क्षेत्रीय स्तर पर, पाकिस्तान ने Azm-e-Istehkam अभियान चलाया, लेकिन TTP जैसे समूह अफगानिस्तान से हमले कर रहे हैं।

    मेरा विश्लेषण: कड़े कदमों की संभावना

    मैं सोचता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान और इन आतंकवादी समूहों पर कड़े कदम उठाने में हिचकिचा रहा है, लेकिन दबाव बढ़ रहा है। 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद UNSC ने चिंता जताई, लेकिन व्यावहारिक कार्रवाई सीमित है। NATO और UN के प्लान सकारात्मक हैं, लेकिन तालिबान की कमजोरी और पाकिस्तान की दोहरी नीति (आतंकवाद का समर्थन और सहयोग का दावा) बाधा हैं। यदि पहलगाम जैसे हमले बढ़ते रहे, तो अमेरिका और यूरोपीय देश अतिरिक्त प्रतिबंध या इंटेलिजेंस शेयरिंग बढ़ा सकते हैं। भारत की अपील ने वैश्विक ध्यान खींचा है, लेकिन वास्तविक बदलाव के लिए क्षेत्रीय सहयोग (जैसे भारत-ईरान-चीन) जरूरी है। कुल मिलाकर, कड़े कदम संभव हैं, लेकिन धीमी गति से।

    शांति के लिए एकजुटता की जरूरत

    भारत की यह अपील दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान में शांति सुनिश्चित करने से न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया लाभान्वित होगी। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अब शब्दों से आगे बढ़कर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि LeT-JeM जैसे संगठन कुचले जा सकें। भारत की सक्रिय भूमिका सराहनीय है, और उम्मीद है कि वैश्विक सहयोग से आतंकवाद का सफाया होगा।