Tag: pm modi

  • आंध्र प्रदेश में श्री सत्य साईं बाबा शताब्दी समारोह, ऐश्वर्या राय, पीएम मोदी और सचिन का इंसानियत संदेश

    आंध्र प्रदेश में श्री सत्य साईं बाबा शताब्दी समारोह, ऐश्वर्या राय, पीएम मोदी और सचिन का इंसानियत संदेश

    आंध्र प्रदेश में आज इतिहास बन गया। एक ही मंच पर तीन प्रतिष्ठित चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर और विश्व सुंदरी व बॉलीवुड स्टार ऐश्वर्या राय बच्चन। यह मौका था श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह का।
    यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत, सामाजिक एकता और मानवता के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने वाला अवसर बन गया।

    ऐश्वर्या राय का संस्कार: सम्मान का प्रतीक

    जब ऐश्वर्या राय मंच पर पहुंचीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरण छूकर सम्मान व्यक्त किया।भीड़ तालियों से गूंज उठी। हर कोई खड़ा हो गया।यह सिर्फ एक अभिवादन नहीं था, बल्कि भारत की संस्कारों में रचा-बसा आदर, विनम्रता और परंपरा का सजीव उदाहरण था। आधुनिक ग्लैमर की दुनिया की सबसे चमकदार हस्तियों में से एक होने के बावजूद, ऐश्वर्या ने इस सम्मान से दिखाया कि भारतीय संस्कृति कभी पुरानी नहीं होती, वह हमारे चरित्र को सजाती है।

    इंसानियत, प्रेम और धर्म पर दिल से संदेश

    अपने भाषण में ऐश्वर्या राय बच्चन ने धर्म, प्रेम और विविधता पर गहरी बात कही। उन्होंने कहा हम पहले इंसान हैं, बाकी सब बाद में।यह संदेश सीधी दिल तक उतर गया। उन्होंने कहा कि प्यार बांटता नहीं, जोड़ता है और अगर इंसानियत ज़िंदा है, तो दुनिया में नफरत की कोई जगह नहीं।एक ऐसी दुनिया में जहां धर्म और पहचान के नाम पर दीवारें खड़ी की जा रही हैं, ऐश्वर्या का यह संदेश एक आधुनिक आध्यात्मिक चेतावनी जैसा था।

    भारत की एकता की ताकत: विविधता में प्रेम

    ऐश्वर्या ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता है..भाषा बदल जाए, रीति बदल जाए, धर्म बदल जाए…
    लेकिन दिल से निकला प्यार ही हमें एक करता है।भारत सिर्फ भूगोल का नाम नहीं, यह सह-अस्तित्व, सद्भाव और सम्मान की धरती है। यही संदेश इस मंच से पूरी दुनिया तक गया।

    एक सितारा, लेकिन संदेश सार्वभौमिक

    आज जब दुनिया धर्म और पहचान की राजनीति में उलझी है, एक बॉलीवुड स्टार ने याद दिलाया कि धर्म का असली नाम इंसानियत है।
    उन्होंने किसी विवाद, किसी मत की बात नहीं की…उन्होंने सिर्फ प्रेम, एकता और सम्मान का रास्ता दिखाया—जो आज वैश्विक संवाद की सबसे बड़ी जरूरत है।

  • दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: उमर अब्दुल्ला की निंदा, ‘हर कश्मीरी आतंकी नहीं’, निर्दोषों पर सवाल

    दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: उमर अब्दुल्ला की निंदा, ‘हर कश्मीरी आतंकी नहीं’, निर्दोषों पर सवाल

    विस्फोट की भयावहता और देशव्यापी चिंता

    10 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:52 बजे दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले (रेड फोर्ट) के निकट लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 पर एक हुंडई i-20 कार में भयानक विस्फोट हुआ। यह कायरतापूर्ण हमला इतना विनाशकारी था कि कम से कम 13 निर्दोष लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक घायल हुए। धमाके की तीव्रता से आसपास की कई गाड़ियां जलकर राख हो गईं और मलबा चारों ओर बिखर गया। फॉरेंसिक जांच में कार में अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल (ANFO) और अन्य उच्च-शक्ति विस्फोटक पाए गए, जो इसे आतंकी साजिश का स्पष्ट प्रमाण बनाते हैं। दिल्ली पुलिस ने मामले में यूएपीए, एक्सप्लोसिव एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज की है। केंद्र सरकार ने इसे ‘आतंकी घटना’ घोषित कर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया। पूरे देश में हाई अलर्ट जारी है—हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, बाजार और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। लाल किला मेट्रो स्टेशन को 13 नवंबर तक बंद रखा गया, जबकि दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए गए। यह घटना न केवल राजधानी की सुरक्षा पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि राष्ट्रीय एकता की परीक्षा भी ले रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, ब्रिटेन और चीन जैसे देशों ने संवेदना व्यक्त की और यात्रा सलाह जारी की।

    उमर अब्दुल्ला की कड़ी निंदा और सामाजिक संदेश

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि यह बेहद निंदनीय है। जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया, “यह क्रूर हत्या अस्वीकार्य है। कोई भी धर्म निर्दोषों की ऐसी बर्बर हत्या को जायज नहीं ठहरा सकता।” अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर का हर निवासी आतंकी नहीं है। “कुछ ही लोग शांति और भाईचारे को नष्ट करने पर तुले हैं, लेकिन पूरे कश्मीरी समाज को एक ही नजर से देखना गलत है। जब हर कश्मीरी को एक ही विचारधारा से जोड़ा जाता है, तो समाज को सही दिशा में ले जाना मुश्किल हो जाता है।” उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की, लेकिन निर्दोषों को इससे दूर रखने पर बल दिया। “दोषी लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, लेकिन निर्दोषों को इसमें फंसने न दिया जाए।” यह बयान न केवल हमले की भर्त्सना करता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का आह्वान भी है। अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी आतंकवाद की मौजूदगी पर केंद्र सरकार पर प्रहार किया, “हमें कहा गया था कि विशेष दर्जा हटाने से कट्टरवाद खत्म हो जाएगा, लेकिन इस साल पाहलगाम हमला और दिल्ली ब्लास्ट साबित करते हैं कि यह लक्ष्य विफल रहा।”

    यह भी पढ़ें : दिल्ली कार ब्लास्ट: ‘डॉक्टर्स ऑफ डेथ’ मॉड्यूल का पर्दाफाश, लखनऊ में छापेमारी से नया खुलासा

    जांच में तेजी: डॉक्टरों का ‘व्हाइट-कॉलर टेरर’ मॉड्यूल

    जांच एजेंसियां देशभर में सक्रिय हैं। एनआईए की 10 सदस्यीय टीम फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़े तार जोड़ रही है, जहां 9 नवंबर को 350 किलो विस्फोटक, AK-47 राइफल, पिस्टल और टाइमिंग डिवाइस बरामद हुए। आरोपी डॉक्टरों में पुलवामा के डॉ. उमर मोहम्मद (कार चालक), डॉ. मुजम्मिल शकील (अल-फलाह यूनिवर्सिटी लेक्चरर), डॉ. शाहीना सईद (लखनऊ), डॉ. आदिल अहमद राथर (सहरानपुर) और डॉ. निसारुल हसन (श्रीनगर, 2023 में नौकरी से बर्खास्त) शामिल हैं। डीएनए टेस्ट से कार चालक की पहचान डॉ. उमर के रूप में हुई। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवात-उल-हिंद के पाकिस्तान-आधारित हैंडलर्स से लिंक उजागर हुए। लखनऊ, कानपुर, मेरठ और हरियाणा में छापे मारे गए; 12 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता निलंबित कर दी गई। अब्दुल्ला ने उच्च शिक्षित आरोपियों पर सवाल उठाए, “यह पहली बार नहीं जब डॉक्टर जैसे प्रोफेशनल्स इसमें लिप्त पाए गए। श्रीनगर के डॉ. अरिफ निसार दार को 2024 में नौकरी से निकाला गया, लेकिन उसके खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं चला? सुरक्षा चूक क्यों हुई?” उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय की कमी पर चिंता जताई।

    आगे की राह: न्याय और एकता का संकल्प

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान से फोन पर गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की और कहा, “साजिशकर्ताओं को बख्शा नहीं जाएगा।” शाह ने घटनास्थल का दौरा कर समीक्षा बैठकें कीं। केबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक बुलाई गई। अब्दुल्ला का संदेश साफ है—आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में निर्दोषों को निशाना न बनाएं। यह घटना ‘व्हाइट-कॉलर टेरर’ की नई चुनौती पेश करती है, जहां शिक्षित युवा रेडिकलाइज हो रहे हैं। सरकार उन्नत खुफिया तंत्र, डिजिटल ट्रेलिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दे रही है। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए, राष्ट्र एकजुट होकर इस खतरे का सामना करेगा। सतर्कता और न्याय ही असली जवाब हैं।

  • दिल्ली कार ब्लास्ट: ‘डॉक्टर्स ऑफ डेथ’ मॉड्यूल का पर्दाफाश, लखनऊ में छापेमारी से नया खुलासा

    दिल्ली कार ब्लास्ट: ‘डॉक्टर्स ऑफ डेथ’ मॉड्यूल का पर्दाफाश, लखनऊ में छापेमारी से नया खुलासा

    10 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:52 बजे दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास सबहास मार्ग पर एक धीमी गति से चल रही हुंडई i-20 कार में भयानक विस्फोट हुआ। इस कायरतापूर्ण हमले में 13 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 20 से अधिक घायल हो गए। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि आसपास की कई गाड़ियां जलकर खाक हो गईं और मलबा चारों तरफ बिखर गया। लाल किला मेट्रो स्टेशन को सुरक्षा कारणों से 13 नवंबर तक बंद रखा गया, जबकि दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट जारी है। फॉरेंसिक जांच में कार में RDX जैसा उच्च-शक्ति विस्फोटक मिला, जो इसे आतंकी साजिश का स्पष्ट प्रमाण बनाता है। यह घटना न केवल राजधानी की सुरक्षा पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि पूरे देश को एकजुट करने का संदेश भी देती है।

    पीएम मोदी का सख्त संदेश

    भूटान दौरे पर रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात कर जांच की प्रगति पर चर्चा की। शाह ने घटनास्थल का दौरा कर दो उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कीं, जिसमें खुफिया एजेंसियां शामिल हुईं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया, जो इसे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों से जुड़ी साजिश मान रही है। पीएम ने कहा, “हमारी सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग है। पिछले 11 वर्षों में विश्व ने भारत की मजबूत रणनीति को सराहा है।” यह बयान न केवल न्याय का वादा करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की दृढ़ता का प्रतीक भी है।

    लखनऊ छापेमारी: डॉ. परवेज का घर खाली

    जांच तेज होने के साथ ही एजेंसियां देशभर में सक्रिय हो गईं। 12 नवंबर को उत्तर प्रदेश एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने लखनऊ के मड़ियांव इलाके में डॉ. परवेज अंसारी के घर पर छापा मारा। सुबह सात बजे पहुंची टीम ने कई घंटों की तलाशी ली, लेकिन डॉ. परवेज घर पर नहीं मिले। पड़ोसियों के अनुसार, वह अकेले रहते थे और कम ही नजर आते थे। टीम ने कंप्यूटर, मोबाइल फोन, दस्तावेज, एक कार और बाइक जब्त की। डॉ. परवेज के पिता सईद अंसारी ने आरोपों का खंडन किया, “मेरे बच्चों का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं।” हालांकि, सूत्र बताते हैं कि डॉ. परवेज की बहन डॉ. शाहीना शाहिद (या शाहीन सईद) पहले ही गिरफ्तार हो चुकी हैं, और दोनों की कॉल रिकॉर्ड्स संदिग्ध हैं। एनआईए अब डॉ. परवेज की तलाश में कई राज्यों में दबिश दे रही है।

    यह भी पढ़ें : दिल्ली विस्फोट: अमित शाह का कड़ा संकल्प, दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा!

    फरीदाबाद मॉड्यूल से लिंक: व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क

    यह छापेमारी फरीदाबाद से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के बाद हुई, जहां कुछ दिन पहले एमबीबीएस छात्र डॉ. मुजम्मिल शकील (या मुजम्मिल अहमद गनई) को गिरफ्तार किया गया। उसके किराए के घर से 350 किलो अमोनियम नाइट्रेट, AK-47 राइफल, पिस्टल और बम बनाने की सामग्री बरामद हुई। डॉ. मुजम्मिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी में लेक्चरर था और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से ताल्लुक रखता था। उसकी गर्लफ्रेंड डॉ. शाहीना शाहिद की कार से भी हथियार मिले, जो लखनऊ से जुड़ी हैं। जांच में डॉ. परवेज, डॉ. शाहीना, डॉ. मुजम्मिल और डॉ. आदिल अहमद राथर (जो सहरानपुर से पकड़ा गया) का एक ‘व्हाइट-कॉलर टेरर इकोसिस्टम’ उजागर हुआ, जिसमें शिक्षित डॉक्टर और प्रोफेशनल्स पाकिस्तान-आधारित हैंडलर्स से जुड़े हैं। JeM और अंसार गजवात-उल-हिंद के लिंक साफ हैं। कुल 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें 6 डॉक्टर शामिल हैं। विस्फोटक का प्रकार फरीदाबाद से मेल खाता है, जो बड़े नेटवर्क का संकेत देता है।

    आगे की चुनौतियां और संकल्प

    एनआईए की 10 सदस्यीय टीम अब फाइनेंशियल ट्रेल, डिजिटल कम्युनिकेशन और इंटरनेशनल लिंक्स की पड़ताल कर रही है। लखनऊ, कानपुर, मेरठ समेत कई शहरों में छापे जारी हैं। यह साजिश 4 अक्टूबर को एक शादी में सक्रिय हुई थी। सरकार ने आश्वासन दिया कि दोषियों को कठोर सजा मिलेगी, जो दुनिया को संदेश देगी। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए, राष्ट्र एकजुट होकर इस खतरे का मुकाबला करेगा। सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ने बड़ी साजिश नाकाम की, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी है।

  • RSS के 100 साल: पीएम मोदी ने जारी किया विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का

    RSS के 100 साल: पीएम मोदी ने जारी किया विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का

    आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। 100 साल की लंबी यात्रा में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण में अहम योगदान दिया। जानिए इस ऐतिहासिक अवसर की पूरी जानकारी।

    आरएसएस के 100 साल का ऐतिहासिक महत्व

    1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी। संघ का उद्देश्य था देश में नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना। आज, 100 साल पूरे होने पर संघ की यात्रा ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    आरएसएस की स्थापना के बाद से ही संगठन ने नागरिकों में देशभक्ति, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को बढ़ावा दिया। आजादी के बाद और आधुनिक भारत में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।

    पीएम मोदी द्वारा डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी

    RSS के 100 साल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर डाक टिकट और सिक्के में ऐसा क्या  खास, पीएम मोदी ने किया जारी - News18 हिंदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आरएसएस के शताब्दी समारोह में डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। स्मारक सिक्का शुद्ध चांदी का है और 100 रुपये मूल्य का है। इसमें ‘भारत माता’ के सामने पारंपरिक मुद्रा में खड़े आरएसएस स्वयंसेवक को दर्शाया गया है। सिक्के के पिछले हिस्से पर तीन स्वयंसेवक भारत माता को सलामी देते हुए दिखाए गए हैं।

    विशेष डाक टिकट में उन राहत कार्यों को भी दिखाया गया है, जिन्हें आरएसएस ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों की मदद के लिए अंजाम दिया। इस अवसर का शीर्षक रखा गया है – ‘मातृभूमि की सेवा के लिए सदा समर्पित’।

    संघ का योगदान: शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत

    article_image_1

    पिछली एक सदी में आरएसएस ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। संघ के स्वयंसेवक बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इसके अलावा, संघ से जुड़े संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, स्थानीय समुदायों को मजबूत करने और जनभागीदारी बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।

    संघ का यह योगदान न केवल सामाजिक कार्यों तक सीमित है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में भी सहायक रहा है।

    पीएमओ की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय संदेश

    प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया कि आरएसएस को भारत के राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए जनता से जुड़ा अनोखा आंदोलन माना जाता है। संघ मातृभूमि के प्रति समर्पण, अनुशासन, आत्म-संयम, साहस और वीरता का संदेश देता है। PMO के अनुसार, शताब्दी समारोह न केवल संघ की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा और राष्ट्रीय एकता में संघ के स्थायी योगदान को भी उजागर करता है।

    आरएसएस के 100 साल का शताब्दी समारोह संगठन की लंबी और समर्पित यात्रा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किया गया डाक टिकट और स्मारक सिक्का इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाता है। संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आपदा राहत के क्षेत्र में अपना योगदान दिया है और भविष्य में भी राष्ट्रीय विकास और सांस्कृतिक एकता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • महाअष्टमी पर पीएम मोदी का CR पार्क दौरा दुर्गा पूजा में सांस्कृतिक एकता का संदेश

    महाअष्टमी पर पीएम मोदी का CR पार्क दौरा दुर्गा पूजा में सांस्कृतिक एकता का संदेश

    आज हम बात करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस खास दौरे की, जो उन्होंने महाअष्टमी के पावन अवसर पर किया। मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली के चित्तरंजन पार्क (CR पार्क) पहुंचे। यह इलाका बंगाली संस्कृति का गढ़ माना जाता है और यहाँ हर साल भव्य दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है।

    पूजा-अर्चना और आरती में भागीदारी

    प्रधानमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की और काली बाड़ी मंदिर में पारंपरिक आरती में भी हिस्सा लिया। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय और उत्साह से भरा हुआ था। श्रद्धालुओं की भीड़ में प्रधानमंत्री का उत्साह और सहज व्यवहार लोगों को खूब भाया।

    प्रधानमंत्री का संदेश

    कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि दुर्गा पूजा समारोह समाज में एकता और सांस्कृतिक जीवंतता की भावना को दर्शाता है। उनके इस संदेश से यह स्पष्ट हुआ कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक भी हैं।

    CR पार्क की महत्ता और लोगों की भागीदारी

    दिल्ली का CR पार्क अपनी बंगाली परंपराओं और दुर्गा पूजा की भव्यता के लिए पूरे देश में मशहूर है। इस मौके पर हजारों लोग यहाँ उमड़े और प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। जगह-जगह भक्तों की मौजूदगी और पूजा पंडालों की सजावट ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया।

    सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्थाएँ

    प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने दक्षिणी इलाकों में भारी सुरक्षा के इंतज़ाम किए। साथ ही, कई मार्गों पर ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की गई थी, ताकि श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों सुरक्षित और सुविधाजनक रूप से इस आयोजन में भाग ले सकें।

    दुर्गा पूजा का संदेश

    दुर्गा पूजा सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है। यह हमारी सांस्कृतिक विविधता, आपसी भाईचारा और समाज में एकता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इसी संदेश को और मजबूत करता है।इस तरह के दौरे समाज में सांस्कृतिक मूल्यों और पर्वों के महत्व को बढ़ावा देते हैं, और लोगों में उत्सव के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को जगाते हैं।

  • पीएम मोदी का गुजरात दौरा: ₹1.5 लाख करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास, विरासत और विकास का अनोखा संगम

    पीएम मोदी का गुजरात दौरा: ₹1.5 लाख करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास, विरासत और विकास का अनोखा संगम

    दौरे का आगमन: भावनगर में भव्य स्वागत की तैयारी

    20 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे। यह दौरा मात्र 24 घंटों का होने के बावजूद विकास, विरासत और भविष्य के विजन का अनुपम मेल प्रस्तुत करेगा। सुबह 10 बजे भावनगर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद पीएम मोदी एक भव्य रोड शो का नेतृत्व करेंगे। लगभग 1.5 किलोमीटर लंबा यह रोड शो स्थानीय उत्साह का प्रतीक बनेगा, जिसमें 30 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। रोड शो की थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और जीएसटी में राहत पर केंद्रित होगी, जो मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। यह न केवल राजनीतिक संदेश देगा, बल्कि गुजरात की जनता के बीच विकास की गति को महसूस कराएगा। भावनगर, जो सौराष्ट्र क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इस दौरे से एक नई ऊर्जा प्राप्त करेगा, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी।

    विकास की सौगात: शिपिंग परियोजनाओं का उद्घाटन

    रोड शो के बाद प्रधानमंत्री जवाहर मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर वे ₹1.5 लाख करोड़ की लागत से विकसित शिपिंग और समुद्री परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन करेंगे। ये मेगा प्रोजेक्ट्स भारत की समुद्री क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। इसके अतिरिक्त, भावनगर को ₹100 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात मिलेगी, जो बुनियादी ढांचे, सड़कों, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेंगी। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे, खासकर युवाओं के लिए। औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाली ये पहल गुजरात को भारत का ‘समुद्री हब’ बनाने की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षा को साकार करेंगी। जनसभा में पीएम मोदी संभवतः आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलताओं पर प्रकाश डालेंगे, जो कोविड के बाद की आर्थिक वसूली का प्रतीक बने हैं। यह दौरा न केवल आंकड़ों का प्रदर्शन है, बल्कि जमीन पर बदलाव लाने वाली योजनाओं का जीवंत प्रमाण है।

    यह भी पढ़ें : केजरीवाल को सरकारी बंगला: हाईकोर्ट ने केंद्र को लगाई कड़ी फटकार, 25 सितंबर तक जवाब मांगा

    विरासत की यात्रा: लोथल में राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय की समीक्षा

    दोपहर करीब 1 बजे प्रधानमंत्री अहमदाबाद जिले के लोथल पहुंचेंगे, जहां वे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) की प्रगति का जायजा लेंगे। ₹4,500 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य भारत की प्राचीन समुद्री शक्ति को संरक्षित करना है। लोथल, सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र रहा है, जहां 5,000 वर्ष पुरानी डॉकयार्ड के अवशेष आज भी इतिहास की गवाही देते हैं। NMHC इस स्थल को एक आधुनिक राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय में बदल देगा, जहां आगंतुक भारत की नौसेना इतिहास, प्राचीन व्यापार मार्गों और समुद्री साहसिक यात्राओं को करीब से समझ सकेंगे। पीएम मोदी का यह दौरा ‘विरासत भी, विकास भी’ के उनके विजन को सशक्त बनाता है। जहां एक ओर मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भविष्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राचीन सभ्यताओं को संरक्षित कर सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा जा रहा है। यह परियोजना ‘पंच प्रण’ पहल के तहत विरासत संरक्षण की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी समृद्ध करेगी।

    व्यापक प्रभाव: विकास और इतिहास का संतुलन

    पीएम मोदी का यह दौरा गुजरात की राजनीति और विकास एजेंडे को नई दिशा देगा। एक तरफ जहां शिपिंग परियोजनाएं भारत को वैश्विक व्यापार में अग्रणी बनाएंगी, वहीं NMHC जैसे प्रयास युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेंगे। ऑपरेशन सिंदूर जैसी थीम्स आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करेंगी, जबकि जीएसटी राहत से छोटे व्यवसायों को बल मिलेगा। यह दौरा लोकतंत्र में नेतृत्व की भूमिका को दर्शाता है, जहां एक नेता न केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि भविष्य की नींव भी रखता है। गुजरात, जो हमेशा से मोदी के विकास मॉडल का केंद्र रहा है, इस दौरे से और मजबूत होगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी ये परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि समुद्री संरक्षण से तटीय पारिस्थितिकी संतुलित रहेगी। विपक्ष भले ही इन्हें चुनावी स्टंट कहे, लेकिन आंकड़े साफ बताते हैं कि गुजरात में पिछले दशक में निवेश दोगुना हो चुका है।

    भविष्य की उम्मीदें: परियोजनाओं का जमीन पर असर

    देखना रोचक होगा कि इन परियोजनाओं का असर कितनी तेजी से जमीन पर दिखाई देता है। ₹1.5 लाख करोड़ के निवेश से न केवल रोजगार बढ़ेंगे, बल्कि भारत की जीडीपी में भी योगदान होगा। लोथल का संग्रहालय पर्यटकों को आकर्षित कर सॉफ्ट पावर को मजबूत करेगा। यह दौरा संदेश देता है कि विकास और विरासत अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा गुजरातवासियों के लिए प्रेरणा बनेगी, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को साकार करेगी। आने वाले दिनों में इन योजनाओं की प्रगति पर नजर रखना जरूरी होगा, ताकि वादे वास्तविकता में बदलें। कुल मिलाकर, यह एक दिवसीय दौरा लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि यह भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।

  • शशि थरूर का अमेरिका-भारत संबंधों पर बयान: ट्रंप के बदले रुख का स्वागत, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह

    शशि थरूर का अमेरिका-भारत संबंधों पर बयान: ट्रंप के बदले रुख का स्वागत, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह

    पीएम मोदी की त्वरित प्रतिक्रिया

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को केरल के तिरुवनंतपुरम से न्यूज एजेंसी से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया संवाद पर टिप्पणी की। थरूर ने कहा कि पीएम मोदी ने ट्रंप के संदेश का तुरंत जवाब दिया, जिसमें भारत और अमेरिका के बीच वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर जोर दिया गया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों की सरकारों और राजनयिकों को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। थरूर ने ट्रंप के नरम रुख का सावधानीपूर्वक स्वागत किया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि ट्रंप के पहले के कदमों से हुए नुकसान को आसानी से भुलाया नहीं जा सकता।

    टैरिफ का प्रभाव और चिंताएँ

    थरूर ने अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर लगाए गए 50% टैरिफ के गंभीर प्रभाव पर प्रकाश डाला, जिसने भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता को इन टैरिफ का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, और इस आर्थिक दबाव को जल्दी भुलाया नहीं जा सकता। थरूर ने कहा, “जमीनी स्तर पर असली परिणाम महसूस किए जा रहे हैं, और हमें इससे उबरना होगा। ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से 50% टैरिफ और अपमान को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

    यह भी पढ़ें : अमेरिका–भारत रिश्तों पर सियासत: मोदी-ट्रंप दोस्ती पर कांग्रेस का हमला

    ट्रंप का बदला रुख: कितना भरोसेमंद?

    शुक्रवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भारत-अमेरिका संबंधों को “बहुत विशेष” बताया और कहा कि “चिंता की कोई बात नहीं है,” साथ ही पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती की पुष्टि की। इसके जवाब में, पीएम मोदी ने ट्रंप के सकारात्मक रवैये की सराहना की और भारत-अमेरिका के बीच मजबूत और दूरगामी वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। हालांकि, थरूर ने ट्रंप के चंचल स्वभाव और उनके पिछले कदमों से भारत में उत्पन्न असंतोष को देखते हुए उनके नवीनतम बयानों पर सावधानी बरतने की सलाह दी।

    अमेरिकी टैरिफ से आर्थिक झटका

    अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लागू किया, जिसका भारतीय निर्यात पर 48 बिलियन डॉलर से अधिक का प्रभाव पड़ने का अनुमान है। पीटीआई के अनुसार, निर्यातकों ने बताया कि इन टैरिफ के कारण भारत को बांग्लादेश, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिन पर अमेरिका ने कम टैरिफ लगाए हैं। इस आर्थिक झटके ने वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंध और जटिल हो गए हैं।

  • अहमदाबाद विमान हादसे पर विश्वभर से संवेदनाएं, कई देशों के प्रमुखों ने जताया शोक

    अहमदाबाद विमान हादसे पर विश्वभर से संवेदनाएं, कई देशों के प्रमुखों ने जताया शोक

    गुरुवार को गुजरात के अहमदाबाद शहर में एक भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट AI171 टेकऑफ के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। विमान में चालक दल के सदस्यों सहित कुल 242 लोग सवार थे। इस त्रासदी में कई देशों के नागरिकों की जान गई है, जिनमें भारत, ब्रिटेन, पुर्तगाल और कनाडा के लोग शामिल हैं। इस घटना से पूरी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है और कई देशों के शीर्ष नेताओं ने संवेदना व्यक्त की है।

    दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने जताया दुख

    दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि दक्षिण अफ्रीका की संवेदनाएं भारत सहित उन सभी देशों के साथ हैं जिन्होंने इस हादसे में अपने नागरिकों को खोया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए गहरी संवेदना प्रकट की और भारत के साथ एकजुटता जताई।

    यह भी पढ़ें : अहमदाबाद विमान दुर्घटना: 265 की मौत, पीएम मोदी ने घटनास्थल का दौरा किया

    इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का संदेश

    इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने लिखा कि वे अहमदाबाद विमान हादसे से अत्यंत दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इटली की जनता और सरकार इस कठिन समय में भारतीय लोगों के साथ खड़ी है।

    यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की संवेदना

    यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि हम भारत के लोगों के दर्द को महसूस कर सकते हैं और इस मुश्किल घड़ी में यूरोप उनके साथ खड़ा है।

    बांग्लादेश और श्रीलंका से भी आए सहानुभूति संदेश

    बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादसे को “स्तब्ध कर देने वाला” बताया और सभी पीड़ितों के लिए प्रार्थना की। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमरा दिसानायके ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया और कहा कि यह केवल एक विमान हादसा नहीं, बल्कि कई युवाओं के सपनों का अंत भी है।

    ईरानी दूतावास और अजरबैजान ने भी जताया दुख

    भारत स्थित ईरानी दूतावास ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और भारत सरकार व नागरिकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। वहीं अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने लिखा कि वे भारत में हुए इस हादसे से बहुत दुखी हैं और शोक संतप्त परिवारों के लिए शक्ति और धैर्य की कामना करते हैं।

  • अहमदाबाद विमान दुर्घटना: 265 की मौत, पीएम मोदी ने घटनास्थल का दौरा किया

    अहमदाबाद विमान दुर्घटना: 265 की मौत, पीएम मोदी ने घटनास्थल का दौरा किया

    गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने से 265 लोगों की मौत हो गई। विमान में 242 लोग सवार थे, जिनमें 230 यात्री और 12 चालक दल के सदस्य शामिल थे। हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की भी मौत हो गई है, जो विमान में सवार थे ।

    घटनास्थल पर पीएम मोदी का दौरा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे के अगले दिन अहमदाबाद पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया। उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू भी थे। पीएम मोदी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और राहत कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद, उन्होंने अहमदाबाद सिविल अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।

    यह भी पढ़ें : अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान हादसा: 20 मेडिकल छात्रों की मौत की आशंका

    एकमात्र जीवित यात्री से मुलाकात

    इस भीषण दुर्घटना में एकमात्र जीवित यात्री रमेश विश्वास कुमार हैं, जिनका इलाज अहमदाबाद सिविल अस्पताल में चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे भी मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। रमेश की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

    राहत और बचाव कार्य

    दुर्घटना के बाद, भारतीय सेना, वायुसेना, तटरक्षक बल और NDRF समेत 500 से अधिक कर्मियों ने राहत और बचाव कार्य में भाग लिया। डीएनए जांच के माध्यम से मृतकों की पहचान की जा रही है, और मृतकों के परिजनों से नमूने एकत्र किए जा रहे हैं ।

    पीएम मोदी का शोक संदेश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना को “शब्दों से परे दिल दहला देने वाली” बताया और शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।

    यह हादसा न केवल गुजरात, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा आघात है। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस गंभीर घटना को लेकर गंभीर है और प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन: ऑपरेशन सिंदूर की गूंज

    महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन: ऑपरेशन सिंदूर की गूंज

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में आयोजित ‘महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन’ में हिस्सा लिया, जो रानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर आयोजित हुआ था। इस दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और नारी शक्ति की अदम्य हिम्मत को सराहा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नारी शक्ति को चुनौती देना आतंकियों की सबसे बड़ी भूल थी, जिसने उन्हें तबाही के रास्ते पर ला खड़ा किया।

    पहलगाम हमले का जवाब: ऑपरेशन सिंदूर

    प्रधानमंत्री ने कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें 22 अप्रैल को 26 पर्यटकों की नृशंस हत्या की गई थी। उन्होंने कहा, “यह हमला केवल खूनखराबा नहीं था, बल्कि हमारी संस्कृति और मूल्यों पर प्रहार था। आतंकियों ने हमारे समाज को तोड़ने और नारी शक्ति को ललकारने की कोशिश की, लेकिन यह उनके लिए काल बन गया।” इस हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसका नाम उन विधवाओं के सम्मान में रखा गया, जिनके पति इस हमले में शहीद हुए। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में सैकड़ों किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। पीएम मोदी ने इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल आतंकवाद-रोधी मिशन बताया।

    पाकिस्तान में हाहाकार, टूटी दुश्मन की कमर

    ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने न केवल आतंकी शिविरों को, बल्कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। इस कार्रवाई ने दुश्मन की रीढ़ तोड़ दी और अंततः एक सीजफायर समझौते पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा, “भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। जरूरत पड़ी तो हम दुश्मन के घर में घुसकर मारेंगे। जो भी आतंकियों की मदद करेगा, उसे भारी कीमत चुकानी होगी।” इस ऑपरेशन ने भारत की सैन्य ताकत और दृढ़ संकल्प को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।

    यह भी पढ़ें :कोरोना मामलों में उछाल: केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली सबसे प्रभावित

    बीएसएफ की बेटियों की वीरता

    प्रधानमंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम की बहादुरी को भी खूब सराहा। सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी के नेतृत्व में महिला जवानों ने सीमा पर तीन दिनों तक दुश्मन का डटकर मुकाबला किया। पीएम ने कहा, “आज दुनिया भारत की बेटियों की ताकत देख रही है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारी बेटियों ने सीमा पर डटकर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने पासआउट किया है, जो सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है।

    नारी शक्ति का नया युग

    इस महासम्मेलन में पीएम मोदी ने नारी शक्ति को देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं, चाहे वह रक्षा हो, शिक्षा हो या विज्ञान। ऑपरेशन सिंदूर न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीत है, बल्कि यह नारी शक्ति के साहस और समर्पण का भी प्रतीक है। यह आयोजन रानी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत को सम्मान देने का एक अवसर था, जिन्होंने अपने समय में नारी शक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया था।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत अब न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर और महिला सशक्तिकरण के इस उत्सव ने यह साबित कर दिया कि भारत की नारी शक्ति और सैन्य शक्ति मिलकर किसी भी चुनौती को परास्त कर सकती हैं।