Tag: public unrest

  • इमरान खान की मौत की अफवाहें: पाकिस्तान में सनसनीखेज खबरें, जेल में क्या अनहोनी?

    इमरान खान की मौत की अफवाहें: पाकिस्तान में सनसनीखेज खबरें, जेल में क्या अनहोनी?

    पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, जिन्होंने ‘नया पाकिस्तान’ का सपना दिखाकर लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई, अब मौत की भयावह अफवाहों के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया और कुछ अफगान व बलूच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रावलपिंडी की अदियाला जेल में उन्हें रहस्यमयी परिस्थितियों में मार दिया गया। ये खबरें आग की तरह फैल रही हैं, जिससे पूरे देश में हंगामा मच गया है। लेकिन क्या ये सच्चाई है या सियासी साजिश? आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।

    अफवाहों का जन्म: तालिबान और बलूच दावों ने मचाई सनसनी

    पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में इमरान खान की मौत की अफवाहें तेज हो गई हैं। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार समर्थित मीडिया और बलूचिस्तान के विदेश मामलों के मंत्रालय ने दावा किया है कि इमरान खान को जेल में यातनाएं देकर हत्या कर दी गई। एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया, “असिम मुनीर और आईएसआई ने इमरान को ठंडे खून से मार डाला।” ये दावे 26 नवंबर 2025 को शुरू हुए, जब अफगान टाइम्स जैसे हैंडल्स ने जेल के अंदर ‘रहस्यमयी हत्या’ की खबरें फैलाईं। बलूचिस्तान एमएफए ने ट्वीट किया, “पंजाब की जेलों से खबरें आ रही हैं कि इमरान खान को मार दिया गया। अगर ये सच साबित हुआ, तो पाकिस्तान का अंतिम वैधता का पतन हो जाएगा।”

    ये अफवाहें तब और तेज हुईं जब इमरान की बहनें – नूरीन निया जी, अलीमा खान और डॉ. उजमा खान – जेल पहुंचीं। उन्होंने अदियाला जेल के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया, लेकिन पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें घसीटा, थप्पड़ मारे और भगा दिया। परिवार का आरोप है कि तीन हफ्तों से इमरान से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा। नूरीन निया जी ने कहा, “हमने सिर्फ भाई से मिलने की मांग की, लेकिन पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा। ये लोकतंत्र के खिलाफ अपराध है।” सोशल मीडिया पर #NationWorriedForImranKhan ट्रेंड करने लगा, और हजारों पीटीआई समर्थक जेल के बाहर जमा हो गए। वीडियो वायरल हुए, जिनमें भीड़ के नारे और पुलिस की लाठीचार्ज दिखाई दे रही थी।

    यह भी पढ़ें : Bigg Boss 19: Ashnoor Kaur ने Tanya Mittal को मारी लकड़ी की पट्टी!

    सरकार की चुप्पी: शहबाज शरीफ का मौन क्या छिपा रहा है?

    इन सबके बीच पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की खामोशी ने सवालों को जन्म दे दिया है। न तो प्रधानमंत्री ने कोई बयान दिया, न ही आधिकारिक स्तर पर खंडन किया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बाद में कहा कि इमरान को जेल में ‘पांच सितारा सुविधाएं’ मिल रही हैं, लेकिन ये बयान अफवाहों को दबाने में नाकाम रहा। पीटीआई ने मांग की कि अफवाह फैलाने वालों की जांच हो और इमरान की ‘लाइफ प्रूफ’ दिखाई जाए। उनके बेटे ने वैश्विक हस्तक्षेप की अपील की। क्या सरकार कुछ छिपा रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि ये अफवाहें सियासी अस्थिरता बढ़ाने की साजिश हो सकती हैं, खासकर जब इमरान की लोकप्रियता सेना के खिलाफ खड़ी हो रही है।

    जेल प्रशासन का खंडन: इमरान स्वस्थ, अफवाहें बेबुनियाद

    27 नवंबर को अदियाला जेल प्रशासन ने साफ कर दिया कि इमरान खान पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। न्यूज के अनुसार, “वह जेल में ही हैं, कोई ट्रांसफर नहीं। उन्हें पूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।” सरकार ने अफवाहों को ‘झूठा प्रोपगैंडा’ बताया, जो भारत और अफगानिस्तान से फैलाया जा रहा। पीटीआई नेताओं ने भी कहा कि इमरान स्थिर हैं, लेकिन परिवार को मिलने की अनुमति दो हफ्ते में दो बार दी जानी चाहिए। अदियाला जेल, जो आतंकी और राजनेताओं के लिए कुख्यात है, में इमरान अगस्त 2023 से बंद हैं – भ्रष्टाचार और आतंकवाद के मामलों में।

    राजनीतिक निहितार्थ: क्या ये संकट पाकिस्तान को तोड़ देगा?

    ये अफवाहें पाकिस्तान की गहरी राजनीतिक खाई को उजागर करती हैं। इमरान खान, जो 2022 में अविश्वास प्रस्ताव से हटाए गए, सेना और शरीफ परिवार के लिए खतरा बने हुए हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि मौत की खबरें फैलाकर समर्थकों को भड़काया जा रहा, ताकि अराजकता फैले। लेकिन जेल प्रशासन के खंडन से सस्पेंस कम हुआ है। फिर भी, परिवार की चिंताएं बरकरार हैं – एक महीने से मिलने पर रोक। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे कवर किया, जहां कहा गया कि ये अफवाहें पाकिस्तान को ‘एज पर’ ले आई हैं।

  • PoJK में विरोध प्रदर्शन तेज, पाक सरकार उच्चस्तरीय वार्ता के लिए मजबूर

    PoJK में विरोध प्रदर्शन तेज, पाक सरकार उच्चस्तरीय वार्ता के लिए मजबूर

    पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 10 लोग मारे गए और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हुए। इस हिंसा और अराजक स्थिति के बाद पाक सरकार को उच्चस्तरीय वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा।


    उच्चस्तरीय वार्ता समिति का गठन

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निर्देश पर आठ सदस्यीय समिति मुज़फ्फराबाद पहुंची और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से बैठक की। इस समिति में केंद्रीय मंत्री अहसान इकबाल, आमिर मुक़म, सरदार मोहम्मद यूसुफ, राणा सना उल्लाह और डॉ. तारिक फज़ल चोधरी के साथ PPP नेताओं राजा परवेज़ अशरफ़ और क़मर ज़मान कैरा, तथा पूर्व PoJK अध्यक्ष सरदार मसूद खान शामिल थे। इसके साथ ही PoJK के प्रधानमंत्री चौधरी अनवरुल हक़ भी बैठक में मौजूद रहे।

    JKJAAC की भूमिका और मांगें

    जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने इस क्षेत्र में लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए नेतृत्व किया। बैठक में प्रतिनिधि शौकत नवाज़ मीर, राजा अमजद अली खान और अंजुम ज़मान अवान ने मुख्य मांगों को उठाया। इनमें 12 शरणार्थी सीटों का खात्मा, विशेषाधिकारों की समाप्ति, जून 2019 के हाईकोर्ट निर्णय का पालन, और स्वास्थ्य कार्ड की व्यवस्था शामिल है।

    सुरक्षा और शटरडाउन

    विरोध प्रदर्शन के दौरान पूरे PoJK में चौथी लगातार शटरडाउन और व्हील-जैम स्ट्राइक लागू रही। कम्युनिकेशन ब्लॉकडाउन सोमवार से जारी है। सुरक्षा बल पूरे क्षेत्र में तैनात किए गए और विरोध मार्च को रोकने के लिए पुलों को खाली कराया गया।

    वार्ता की शर्तें और जनता की प्रतिक्रिया

    JKJAAC ने साफ कहा कि वार्ता तभी होगी जब हत्याओं के जिम्मेदारों को गिरफ्तार कर सजा दी जाए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया कि लोगों के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हजारों लोग दक्षिणी PoJK से कोहाला पहुंचे और JKJAAC के निर्देश का पालन करते हुए आगे की बैठक तक प्रतीक्षा कर रहे हैं।

    पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया

    पाक पीएम कार्यालय ने कहा कि शहबाज शरीफ ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और पारदर्शी जांच के आदेश दिए। उन्होंने वार्ता समिति को तुरंत मुज़फ्फराबाद भेजने का निर्देश दिया। इस कदम को पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक दबाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया माना जा रहा है।