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  • SIR: ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की मनशा पर उठाए सवाल

    SIR: ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की मनशा पर उठाए सवाल

    SIR: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamta Banerjee ने संविधान दिवस के मौके पर एक बड़ा आरोप लगाया है। आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने एसआईआर पर केंद्र सरकार की मनशा पर सवाल उठाया है। संविधान दिवस के मौके पर भाजपा पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के जरिए सरकार एनआरसी लागू करना चाहती है। ममता ने आगे कहा कि वो चुनाव के बाद पूरे देश में यात्रा करेंगी। आइए एक नज़र डालते है पूरी खब पर।

    SIR: जाने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने क्या कहा

    जानकारी के लिए बता दे कि बुधवार को मुख्यमंत्री ने बड़ा दावा किया है। ममता ने दावा किया कि एसआईआर के पीछले असली मंसा कुछ और ही है। आगे Mamta Banerjee ने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी भाजपा लोगों के नागरिकता पर सवाल उठा रही है। एसआईआर के बहाने सरकार की असली मंशा एनआरसी लागू करने की है। बता दे कि ममता ने संविधान दिवस के मौके पर कोलकाता के रेड रोड स्थित बीआर अंबेडकर की प्रतिमा पर माला चढ़ाने के बाद कहा।

    पहले भी सोसश मीडिया पोस्ट के जरिए लगाए थे ये आरोप

    बता दे कि इससे पहले भी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जब लोकतंत्र दांव पर हो, धर्मनिरपेक्षता ‘खतरे में हो’ और संघवाद को ‘ध्वस्त किया जा रहा हो’, तो लोगों को संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यवान मार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए।अब Mamta Banerjee द्वारा SIR पर लगाए गए तमाम आरोपो पर ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भाजपा क्या जवाब देती है।

  • SIR पर हो रही है कंफ्यूजन.. तो यहाँ जाने पूरी जानकारी

    SIR पर हो रही है कंफ्यूजन.. तो यहाँ जाने पूरी जानकारी

    SIR: इन दिनों देश भर में एसआईआर चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में भी एसआईआर एक विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। जहाँ एक तरफ बीजेपी जो चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर को सपोर्ट कर रही है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष है। जो जो़रो शोर से इसके विरोध में लगा हुआ है। ऐसे मे लोगो के बीच ये सवाल उठना आम बात है कि आखिर क्या है एसआईआर। और क्यों इसपर लगातार सवाल उठ रहे है। तो आइए जानते है एसआईआर के बारे में और गहराई से। तो लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

    जाने क्या होता है SIR?

    जानकारी के लिए बता दे कि एसआईआर मतलब Special Intensive Revision, और ये मतदाता सूची अपडेट करने की एक खास प्रक्रिया है। इसे निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया जाता उन सभी राज्यों में जहाँ चुनाव होने वाला रहता है। अब आईए जानते है कि आखिर ये प्रक्रिया इतनी जरूरी क्यों है। और इसपर लगातार विवाद क्यों हो रहा है।

    एसआईआर की प्रक्रिया क्यों है जरूरी?

    बता दे कि ये प्रक्रिया मतदाता सूची की शुद्धता के लिए बेहद जरूरी है। इस प्रक्रिया के जरिए डुप्लिकेट वोटर, मृत मतदाता, या ऐसे लोग हो सकते हैं, जो किसी और इलाके में बस चुके हैं। SIR के ज़रिए इन गलत मदाताओं को हटाना संभव है। एसआईआर प्रक्रिया से निर्वाचण आयोग चुनाव के समय होने वाले हेर फेर को रोकने मेे संभव हो जाता है। जिस्से मतदान बेहद पार्दर्शिता से पूरा किया जाता है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि विपक्ष इस प्रक्रिया का क्यों विरोध क रहा है।

    इस कारण विपक्ष कर रहा विरोध

    विपक्ष का आरोप है कि यह सिर्फ एक तकनीकी “सूची सफाई” नहीं है, बल्कि SIR का इस्तेमाल वोट सूचियों में हेराफेरी करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही साथ विपक्ष का ये भी आरोप है कि निर्वाचण आयोग एसआईआर के इस्तेमाल से बीजेपी की वोट चोरी में मदद कर रही है। विपक्ष का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए एक खास समुदाय (जैसे माइनॉरिटी, मुसलमान, दलित) के मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाना हो सकता है, ताकि चुनावों में उनका प्रभाव कम हो जाए।

  • Mamta Banerjee: SIR पर अटका ममता का दिल! बीजेपी पर लगाए ये आरोप…

    Mamta Banerjee: SIR पर अटका ममता का दिल! बीजेपी पर लगाए ये आरोप…

    Mamta Banerjee: देश भर में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया कराई जा रही है। बिहार के बाद अब चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया शुरु कर चुकी है। प्रक्रिया शुरु होने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न को अयोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक बताया है। साथ ही बीजेपी पर भर्जीवाड़ा का आरोप भी लगाया है। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर।

    Mamta Banerjee: ज्ञानेश कुमार को पत्र में ममता ने कही ये बात

    जानकारी के लिए बता दे कि पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया शुरु हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में हाकिमपुर समेत कई बॉर्डर पॉइंट्स पर रोज़ सैकड़ों लोग वापस लौट रहे हैं, जो खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वे पहले अवैध तरीके से भारत में घुसे थे और कई बार वोट भी डाल चुके हैं। अब इसी प्रक्रिया के वजह से ममता बनर्जी ने BJP पर आरोप लगाया है। आरोप लगाते हुए Mamta Banerjee ने कहा है कि BLOs को ठीक से ट्रेनिंग नहीं दी गई, सर्वर लगातार फेल हो रहा है और शिक्षकों व फ्रंटलाइन स्टाफ जैसे BLOs पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया है।

    जाने बीजेपी ने क्या दिया जवाब

    इसके अलावा टीएमसी ने भाजपा पर वोट चोरी का भी आरोप लगाया है। वहीं बात अगर BJP की करें तो, बीजेपी ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया की सराहना की है। बीजेपी ने कहा है कि इससे उन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाला जा सकेगा जिन्होंने स्थानीय कैंपों की मदद से फर्जी वोटर आईडी बनवा ली थी। जानकारी के लिए बता दे कि जल्द ही पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव होने वाले। जिसकी तैयारी राज्य में अभी से दिखाई दे रही है।

  • पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधा पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने इसे “खतरनाक, बिना तैयारी और अमानवीय” करार दिया है।

    तीन साल का काम तीन महीने में?

    ममता का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो काम हर तीन साल में होता था, उसे अचानक तीन महीने में पूरा करने का दबाव क्यों? इसका सबसे ज्यादा असर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर पड़ रहा है। राज्य भर में हजारों BLO दिन-रात सर्वर फेल होने, अप्रशिक्षित होने और अव्यवहारिक डेडलाइन के बीच कुचले जा रहे हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आम लोग परेशान हैं।

    जलपाईगुड़ी में आंगनवाड़ी वर्कर ने की आत्महत्या

    सबसे दर्दनाक घटना जलपाईगुड़ी के माल इलाके की है। एक आंगनवाड़ी वर्कर, जो BLO का काम भी देख रही थी, मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली। ममता ने दावा किया कि ऐसी कई और घटनाएं सामने आ रही हैं। कई BLO को धमकियां मिल रही हैं, नोटिस थमाए जा रहे हैं।

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    किसान खेत में, फॉर्म कौन भरेगा?

    मुख्यमंत्री ने कृषि मौसम का भी हवाला दिया। अभी बंगाल में धान की कटाई और आलू की बुआई का पीक सीजन चल रहा है। लाखों किसान खेतों में डटे हैं। ऐसे में उनसे ऑनलाइन फॉर्म भरने की उम्मीद रखना व्यावहारिक नहीं है। अगर जल्दबाजी में प्रक्रिया चली तो लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट जाएंगे, जिससे लोकतंत्र को गहरा नुकसान होगा।

    ममता की चार बड़ी मांगें

    1. SIR को तुरंत रोका जाए
    2. BLO को पूरी और सही ट्रेनिंग दी जाए
    3. समय सीमा को यथार्थवादी बनाया जाए
    4. पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो

    राज्य के कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस इसे चुनाव से पहले मतदाताओं को डराने-हटाने की साजिश बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पारदर्शिता का कदम मानता है।

    फिलहाल पूरा बंगाल और चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया पर नजर टिकी है। क्या SIR रुकेगा या और तेज होगा? यह सवाल अब 2026 के रण को प्रभावित करने वाला है।

  • संसद शीतकालीन सत्र: 1-19 दिसंबर, 15 बैठकें; विपक्ष बोला- छोटा सत्र, सरकार भाग रही?

    संसद शीतकालीन सत्र: 1-19 दिसंबर, 15 बैठकें; विपक्ष बोला- छोटा सत्र, सरकार भाग रही?

    सत्र की तारीखें घोषित: 15 बैठकें निर्धारित

    केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों का ऐलान कर दिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें होंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर सत्र की अवधि बढ़ाई या घटाई जा सकती है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब विपक्ष लगातार सत्र बुलाने की मांग कर रहा था। रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “हम एक रचनात्मक और सार्थक सत्र की उम्मीद करते हैं, जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।” यह सत्र दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – में एक साथ चलेगा।

    विपक्ष का हमला: ‘विलंबित और छोटा सत्र’

    विपक्ष ने सत्र की तारीखों पर तीखा प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे “असामान्य रूप से विलंबित और छोटा” बताया। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या सरकार किसी बहस से भाग रही है?” रमेश के अनुसार, परंपरागत रूप से शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है और दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक चलता है। इस बार मात्र 15 बैठकें रखकर सरकार संसदीय चर्चा को सीमित करना चाहती है। कांग्रेस का आरोप है कि महंगाई, बेरोजगारी, विदेश नीति और चुनावी अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर बहस टालने की कोशिश हो रही है। अन्य विपक्षी दलों जैसे TMC, SP और DMK ने भी सत्र की छोटी अवधि पर असंतोष जताया है।

    सरकार का पलटवार: ‘बाधा न डालें, बहस करें’

    किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को संसद की कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए। संसद को चलने दें और बहस में भाग लें।” सरकार का दावा है कि 15 बैठकें पर्याप्त हैं और सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो सकेगी। पिछले सत्रों में विपक्षी हंगामे के कारण कई विधेयक बिना बहस पारित हुए, जिसे सरकार कम समय का कारण बता रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में वित्तीय विधेयक, महिला आरक्षण संशोधन और डिजिटल इंडिया से जुड़े बिल पेश हो सकते हैं।

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    संभावित मुद्दे: महंगाई से मतदाता सूची तक हंगामा

    इस सत्र में विपक्ष सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी में है। महंगाई और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे रहेंगे। विदेश नीति, खासकर चीन सीमा विवाद और मणिपुर हिंसा पर सवाल उठाए जाएंगे। ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर भारी हंगामा है। विपक्ष दावा कर रहा है कि SIR के जरिए मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। Adani मामले और समान नागरिक संहिता पर भी बहस की मांग हो सकती है। यदि विपक्ष एकजुट रहा तो सदन में गतिरोध लंबा खिंच सकता है।

  • बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट में ECI का जवाब, 65 लाख मतदाताओं का मुद्दा

    बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट में ECI का जवाब, 65 लाख मतदाताओं का मुद्दा

    बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव आयोग (ECI) ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल किया है, जिसमें उसने स्पष्ट किया कि वह ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों की अलग सूची प्रकाशित करने या उनके बहिष्करण के कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है। यह जवाब एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका के जवाब में आया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को करेगा।

    ECI का पक्ष

    चुनाव आयोग ने 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों का हवाला देते हुए कहा कि नियम 10 और 11 के तहत उसे ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों की अलग सूची तैयार करने या उनके बहिष्करण के कारणों को प्रकाशित करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। ECI ने तर्क दिया कि चूंकि कानून या दिशानिर्देश ऐसी सूची तैयार करने का प्रावधान नहीं करते, इसलिए याचिका के माध्यम से इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता। आयोग ने यह भी बताया कि उसने राजनीतिक दलों को बूथ-स्तर पर उन व्यक्तियों की सूची प्रदान की है, जिनके नामांकन प्रपत्र विभिन्न कारणों से प्राप्त नहीं हुए। इन सूचियों में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, या गुमशुदा मतदाताओं के नाम शामिल हैं।

    ADR की याचिका

    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया गया कि बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची से बाहर रखा गया है। ADR ने मांग की कि ECI इन मतदाताओं के नाम, उनके बहिष्करण के कारण (जैसे मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लीकेट, या गुमशुदा), और बूथ-स्तरीय विवरण विधानसभा क्षेत्रवार प्रकाशित करे। साथ ही, उन मतदाताओं की सूची भी सार्वजनिक की जाए जिनके नामांकन प्रपत्र बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा “अनुशंसित नहीं” के रूप में चिह्नित किए गए।

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    ECI की प्रक्रिया और जवाब

    ECI ने बताया कि 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक दावा और आपत्ति की अवधि के दौरान, ड्राफ्ट सूची में शामिल न हुए व्यक्ति प्रपत्र 6 के माध्यम से SIR आदेश के तहत घोषणा-पत्र जमा कर मतदाता सूची में शामिल होने का दावा कर सकते हैं। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। ECI ने यह भी जोड़ा कि बहिष्करण के कारण बताने का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं है, क्योंकि मृत, स्थानांतरित, या गुमशुदा मतदाताओं के लिए प्रक्रिया एकसमान है।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    6 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने ECI से इस मामले में जवाब मांगा था और पूछा था कि क्या ड्राफ्ट मतदाता सूची को राजनीतिक दलों के साथ साझा किया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि याचिकाकर्ताओं की दलीलों में कोई अवैधता पाई गई, तो वह तुरंत कार्रवाई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमारी शक्ति को कम मत आंकिए। अगर कोई गलती पाई गई, तो हम सब कुछ रद्द कर देंगे।”