वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विवाद: तमिलनाडु सरकार का कड़ा विरोध

हाल ही में लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे धार्मिक सद्भाव पर प्रहार बताते हुए डीएमके की ओर से इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की। तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु इस कानून के खिलाफ लड़ेगा और इसमें सफल होगा।”

डीएमके का विरोध और विधानसभा में प्रदर्शन

लोकसभा में विधेयक पारित होने के विरोध में डीएमके विधायकों ने तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान काली पट्टियां बांधकर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने सदन में कहा कि 27 मार्च को तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर इस विधेयक को वापस लेने की मांग की थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि यह कानून न केवल धार्मिक सद्भाव को कमजोर करता है, बल्कि अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

लोकसभा में विवादास्पद पारित प्रक्रिया

लोकसभा में 12 घंटे लंबी बहस के बाद 3 अप्रैल की तड़के वक्फ (संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया गया। कुल 288 सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद, उनके द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, “देशभर के ज्यादातर राजनीतिक दलों ने इस विधेयक का विरोध किया, फिर भी इसे पारित कर दिया गया। यह बेहद निंदनीय है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि 232 सांसदों का विरोध कोई छोटा आंकड़ा नहीं है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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विपक्ष की तीखी आलोचना

एम. के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस विधेयक को पारित करने का तरीका और समय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जब देश के अधिकांश राजनीतिक दल इस विधेयक का विरोध कर रहे थे, तब रात 2 बजे इसे पारित करना भारत के संविधान पर सीधा हमला है। यह कदम सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष और अधिक संगठित होता, तो इस विधेयक को रोकने में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभाई जा सकती थी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस कानून को पूरी तरह से वापस लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

डीएमके ने घोषणा की है कि वह इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। मुख्यमंत्री स्टालिन ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार न केवल कानूनी स्तर पर, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी इस कानून के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

तमिलनाडु सरकार और डीएमके का मानना है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन करता है और इससे देश के सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

क्या है वक्फ (संशोधन) विधेयक?

वक्फ (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़ी मौजूदा प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है। हालाँकि, विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक कई ऐसे प्रावधानों को शामिल करता है जो अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस कानून को पारित करने में जल्दबाजी की और इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और भविष्य की राह

विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस विधेयक को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस बीच, डीएमके और अन्य क्षेत्रीय दल इसे कानूनी मोर्चे पर चुनौती देने की रणनीति बना रहे हैं।

तमिलनाडु में इस कानून के विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन होने की संभावना है। डीएमके का रुख स्पष्ट है कि वह इस कानून के खिलाफ किसी भी हद तक जाकर लड़ाई लड़ेगी।

वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इसे धार्मिक सद्भाव पर हमला करार देते हुए डीएमके की ओर से इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। इस मामले पर आगे क्या निर्णय आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

अब सवाल यह है कि केंद्र सरकार विपक्ष के इस भारी विरोध को कैसे संभालती है और क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगा? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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