February 13, 2026

एशिया कप भारत-पाकिस्तान मैच पर विवाद, शहीद परिवारों ने बहिष्कार की अपील

मैच से ज्यादा भावनाओं का मुद्दा

एशिया कप का आज का भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीति और संवेदनाओं का बड़ा मुद्दा बन चुका है। पाँच महीने पहले, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में कानपुर के व्यापारी शुभम समेत कई लोगों की जान चली गई। अब जब भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मुकाबला हो रहा है, तो इसकी टाइमिंग को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है।

विपक्षी दलों का आरोप

इस मैच के आयोजन को लेकर विपक्षी पार्टियाँ लगातार केंद्र सरकार और बीसीसीआई पर सवाल उठा रही हैं। शिवसेना, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों का कहना है कि यह फैसला शहीदों और पीड़ित परिवारों के बलिदान का अपमान है। उनका तर्क है कि जब देश शोक और गुस्से के माहौल से गुजर रहा हो, तब पाकिस्तान के खिलाफ मैच आयोजित करना संवेदनशीलता के खिलाफ है।

शहीद परिवार की भावुक अपील

सबसे भावुक अपील सामने आई है शुभम की पत्नी की ओर से। उन्होंने कहा कि “बीसीसीआई के लिए शायद हमारी शहादत की कोई कीमत नहीं है, क्योंकि उन्होंने अपने किसी को नहीं खोया।उन्होंने जनता से सीधी अपील की—“इस मैच का बहिष्कार कीजिए और इसे टीवी पर मत देखिए।उनका यह बयान पीड़ित परिवारों की पीड़ा को सामने लाता है और लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसे हालात में क्रिकेट खेलना उचित है।

राजनीति बनाम संवेदनाएँ

यह विवाद केवल एक खेल आयोजन का नहीं, बल्कि एक बड़ी बहस का हिस्सा है—क्या भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच सिर्फ खेल हैं या फिर यह दोनों देशों के रिश्तों और राजनीतिक परिस्थितियों से भी गहराई से जुड़ा है? विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही, जबकि जनता का एक वर्ग मानता है कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मिसालें

इतिहास गवाह है कि जब-जब हालात बिगड़े हैं, खेलों का बहिष्कार भी हुआ है। कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों का विरोध किया है, ताकि एक राजनीतिक संदेश दुनिया के सामने रखा जा सके। भारत में भी बार-बार यह सवाल उठता रहा है कि पाकिस्तान से रिश्ते बिगड़े होने के बावजूद क्रिकेट मैच क्यों खेले जाते हैं।

बड़ा सवाल

आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले खेल से ज्यादा राजनीति और भावनाओं का खेल बन चुके हैं?क्या शहीदों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस मैच को टाल देना चाहिए?या फिर क्रिकेट को खेल की तरह ही खेला जाना चाहिए, बिना राजनीति और संवेदनाओं के बोझ के?

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