August 27, 2026

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26/11 आरोपी तहव्वुर राणा की याचिका पर 9 जून को सुनवाई, परिवार से बातचीत की मांग

2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले में शामिल माने जाने वाले आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा की एक याचिका पर दिल्ली की एक विशेष अदालत में 9 जून, 2025 को सुनवाई तय की गई है। यह याचिका राणा की ओर से तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए अपने परिवार से बातचीत की अनुमति मांगने के लिए दाखिल की गई थी।

तहव्वुर राणा, जो पाकिस्तानी मूल का एक कनाडाई व्यापारी है, अमेरिका से प्रत्यर्पित होकर भारत लाया गया है। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और तिहाड़ जेल में बंद है। उस पर आरोप है कि वह 26/11 हमले के मुख्य साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी रहा है।

कोर्ट ने जेल प्रशासन से मांगा जवाब

विशेष न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपना विस्तृत जवाब कोर्ट में पेश करें। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के रुख को रिकॉर्ड पर लेते हुए जेल प्रशासन को उसकी एक प्रति भी सौंपने का आदेश दिया है ताकि वे इस पर जवाब दाखिल कर सकें।

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NIA ने फिर जताई सुरक्षा पर आपत्ति

एनआईए ने इससे पहले भी राणा की इसी तरह की मांग का विरोध किया था, जिसमें उसने आशंका जताई थी कि आरोपी अपने परिवार के सदस्यों के साथ गोपनीय या संवेदनशील जानकारी साझा कर सकता है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एजेंसी ने कहा कि इस तरह की अनुमति से जेल के भीतर से बाहरी संपर्क बन सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

राणा की ओर से यह दलील दी गई थी कि उसके परिवार वाले उसकी मौजूदा स्थिति को लेकर काफी चिंतित हैं और वह उनसे सिर्फ सामान्य बातचीत करना चाहता है। हालांकि, इससे पहले अदालत ने सुरक्षा चिंताओं को आधार बनाकर उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। इस बार भी एनआईए ने उसका विरोध किया है, लेकिन अदालत अब तिहाड़ प्रशासन के जवाब के बाद ही कोई निर्णय लेगी।

प्रत्यर्पण भारत के लिए बड़ी कामयाबी

4 अप्रैल 2025 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राणा की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अंतिम समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उसे भारत लाया गया। यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत मानी जा रही है, क्योंकि राणा पर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों की साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। इन हमलों में 166 लोग मारे गए थे और देश को गहरा आघात पहुंचा था।

अब फैसले पर टिकी नजरें

अदालत की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि तहव्वुर राणा को अपने परिवार से बात करने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। यह मामला केवल एक बंदी की व्यक्तिगत मांग नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। अब 9 जून की सुनवाई पर देश की नजरें टिकी हैं।

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