उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल ट्रैक इन दिनों एक रहस्यमयी घटना को लेकर सुर्खियों में है। यहां 23 वर्षीय MBA छात्रा Babita Pandey पिछले 10 दिनों से लापता है। 29 मई को वह अपने दो दोस्तों के साथ नैनीताल के रामनगर से ट्रैकिंग के लिए निकली थीं। यह ट्रैक करीब 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 29 मई की रात बबीता अपने टेंट में मौजूद थीं, लेकिन देर रात वह अचानक बाहर निकलीं और फिर वापस नहीं लौटीं। सुबह जब उनके साथी जागे तो वह गायब थीं, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
150 से ज्यादा रेस्क्यू टीम, ड्रोन और हेलीकॉप्टर से तलाश जारी
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और आपदा राहत दल हरकत में आ गए और बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। सेना, SDRF और स्थानीय रेस्क्यू टीमों समेत 150 से अधिक लोग लगातार पहाड़ों और खतरनाक रास्तों में बबीता की तलाश कर रहे हैं। ड्रोन कैमरों और हेलीकॉप्टर की मदद से भी पूरे इलाके को स्कैन किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बर्फीले इलाकों की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द छात्रा का पता लगाया जा सके।
परिवार का आरोप और दोस्तों पर उठे सवाल
इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब बबीता के परिवार ने उनके साथ गए दो दोस्तों—हरमनप्रीत सिंह और हरमनपाल—पर सवाल उठाए। परिजनों का कहना है कि घटना के पीछे किसी अनहोनी या संदिग्ध परिस्थिति की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पुलिस ने अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की है और दोनों दोस्तों से पूछताछ जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी एंगल से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह केवल एक हादसा है या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है। फिलहाल जांच एजेंसियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही हैं।
क्या यह हादसा है या किसी बड़ी साजिश की आशंका?
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे यह मामला और अधिक रहस्यमयी होता जा रहा है। एक ओर पहाड़ों में भटकने या दुर्घटना की संभावना जताई जा रही है, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे संदिग्ध घटना मानकर किसी साजिश की आशंका भी जता रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई भी ठोस सबूत सामने नहीं आया है जो किसी निष्कर्ष तक पहुंचा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ऊंचाई वाले ट्रैकिंग क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां बेहद खतरनाक होती हैं, जिससे कई बार हादसे हो सकते हैं।
देशभर की नजरें सर्च ऑपरेशन पर, जवाब का इंतजार
फिलहाल पूरा देश इस मामले पर नजर बनाए हुए है और सभी की उम्मीदें सिर्फ एक ही खबर पर टिकी हैं कि Babita Pandey सुरक्षित मिल जाएं। लगातार 10 दिनों से जारी सर्च ऑपरेशन अब एक बड़े रहस्य में बदल चुका है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ट्रैकिंग के दौरान ऐसा क्या हुआ कि एक युवा छात्रा अपने साथियों से अलग हो गई? क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना है या मामला इससे कहीं ज्यादा जटिल है? इन सभी सवालों के जवाब अभी भी अनसुलझे हैं, और जांच एजेंसियां हर संभव दिशा में अपनी कोशिशें जारी रखे हुए हैं।