अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा राष्ट्रपति हेलिकॉप्टर ‘मरीन वन’ उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब वॉशिंगटन के ऊपर उसकी दूरी एक पैसेंजर विमान से कथित तौर पर तय सुरक्षा मानकों से कम हो गई। यह घटना उस वक्त हुई जब ट्रंप व्हाइट हाउस से एंड्रयूज एयर फोर्स बेस के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान अमेरिकन एयरलाइंस की एक रीजनल फ्लाइट रोनाल्ड रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट (DCA) से उड़ान भर रही थी। अमेरिकी अधिकारियों ने इस घटना को ‘लॉस ऑफ सेपरेशन’ (Loss of Separation) बताया है, जिसका मतलब है कि दोनों विमानों के बीच आवश्यक सुरक्षित दूरी नहीं रह गई थी। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा को किसी भी समय प्रत्यक्ष खतरा नहीं था।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल की भूमिका भी जांच के दायरे में
घटना के बाद अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने पुष्टि की कि वह 4 अगस्त को रोनाल्ड रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले कमर्शियल विमान और राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर मरीन वन के बीच सुरक्षित दूरी कम होने की घटना की पड़ताल कर रही है। वहीं, फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने भी इस मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना के समय एयर ट्रैफिक कंट्रोलर दोनों विमानों के पायलटों के साथ लगातार संपर्क में था, लेकिन इसके बावजूद दूरी निर्धारित मानकों से कम हो गई।
व्हाइट हाउस का दावा- राष्ट्रपति को कभी कोई खतरा नहीं था
घटना सामने आने के बाद व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की आशंका से इनकार किया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि मरीन वन को दुनिया के सबसे प्रशिक्षित और अनुभवी पायलट उड़ाते हैं तथा पूरी उड़ान के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुरक्षित थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को किसी भी समय कोई खतरा नहीं था और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया। प्रशासन का कहना है कि यह एक तकनीकी और संचालन संबंधी घटना थी, जिसकी समीक्षा की जा रही है।
रिपोर्ट में एयर ट्रैफिक कंट्रोल से जुड़ी बातचीत पर उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के पीछे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के साथ हुई कथित अस्पष्ट बातचीत भी एक कारण हो सकती है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि सभी उपलब्ध रडार डेटा, संचार रिकॉर्ड और फ्लाइट ट्रैकिंग की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर दोनों विमानों के बीच सुरक्षित दूरी क्यों नहीं बनी रह सकी। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
क्या कहते हैं सुरक्षा नियम, कितनी दूरी जरूरी होती है?
एविएशन सुरक्षा नियमों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में दो विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील की क्षैतिज (Horizontal) और 500 फीट की ऊर्ध्वाधर (Vertical) दूरी बनाए रखना अनिवार्य माना जाता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में दोनों विमानों के बीच की दूरी कथित तौर पर एक मील से भी कम रह गई थी, जिसके कारण इसे सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की श्रेणी में जांचा जा रहा है। अब NTSB और FAA की संयुक्त जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह केवल संचार में हुई चूक थी या फिर एयर ट्रैफिक प्रबंधन में कोई बड़ी तकनीकी या प्रक्रियागत कमी सामने आती है।