Parliament Protest
Parliament Protest: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन का एक अनोखा तरीका अपनाया। दिल्ली स्थित संसद परिसर में कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी सांसदों ने हाथों में खिलौना बंदर लेकर विरोध जताया। इस दौरान सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शन का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गईं। विपक्ष ने इसे सरकार के खिलाफ अपने विरोध का प्रतीक बताया, जबकि बीजेपी नेताओं और समर्थकों की ओर से इस प्रदर्शन की आलोचना की गई।
56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर
प्रदर्शन के दौरान सांसदों और समर्थकों के बीच ‘56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर’ जैसे नारे सुनाई दिए। यह नारा इससे पहले जंतर-मंतर पर हुए विपक्षी प्रदर्शनों के दौरान भी सुनने को मिला था। प्रदर्शनकारियों ने खिलौना बंदर दिखाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक विरोध का रचनात्मक तरीका बताया गया, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से इस तरह के प्रदर्शन को संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं माना गया।
पवन खेड़ा ने खिलौना बंदर के साथ किया प्रदर्शन
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। सामने आए वीडियो में वह हाथ में खिलौना बंदर लेकर प्रदर्शन करते और नारे लगाते नजर आए। इस दौरान अन्य प्रदर्शनकारी सांसद भी उनके साथ मौजूद रहे। प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हुए। कांग्रेस की सांसद डॉ. रागिनी नायक ने भी इस प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर अपनी राजनीतिक नाराजगी जाहिर की।
मानसून सत्र में लगातार टकराव
संसद का मानसून सत्र इस बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव का गवाह रहा। कई मुद्दों पर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और सदन में चर्चा की मांग उठाई। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही भी कई बार प्रभावित हुई। सत्र के अंतिम दिन भी सदन की कार्यवाही समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। संसद परिसर में हुआ यह प्रदर्शन इसी राजनीतिक तनाव की अगली कड़ी माना जा रहा है।
प्रदर्शन पर बंटी सोशल मीडिया की राय
खिलौना बंदर लेकर किए गए इस विरोध प्रदर्शन पर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विपक्ष समर्थकों ने इसे सरकार के खिलाफ रचनात्मक और प्रतीकात्मक विरोध बताया, जबकि बीजेपी समर्थकों ने इसे गंभीर संसदीय मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला प्रदर्शन करार दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को सामने ला दिया है। मानसून सत्र के आखिरी दिन हुआ यह प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।