Rahul Gandhi
Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर किसी दिन RSS की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश की गई, तो वह उस दिन RSS के लोगों की भी रक्षा करेंगे, क्योंकि उन्हें भी अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी की आवाज दबाने के पक्ष में नहीं है और देश में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। राहुल के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया
राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां छात्र अपनी समस्याएं और अपनी बात सरकार के सामने रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोका जा रहा है। राहुल ने दावा किया कि सरकार व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर लोगों को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने एक महिला का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके पास आई थी और अपनी बेटी के साथ चार साल पहले उत्तराखंड में हुई कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर अपनी बात रखना चाहती थी। राहुल ने कहा कि पीड़ित परिवारों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार मिलना चाहिए।
‘RSS की रक्षा मैं करूंगा’- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में लोगों को अपनी बात रखने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति जरूरी है और किसी विचारधारा से असहमति होने के बावजूद उसके अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अगर RSS की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश शुरू हुई तो वह उसकी भी रक्षा करेंगे। राहुल ने कहा कि हर व्यक्ति और संगठन को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके इस बयान को कांग्रेस की ओर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
पीएम मोदी और अमित शाह पर भी राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में उन्होंने दावा किया कि सरकार को अब समझ आ गया है कि देश अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेगा। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर तीखी टिप्पणी की और कहा कि उनके सामने कई चुनौतियां हैं। अमित शाह का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि उन्हें चाणक्य कहा जाता था, लेकिन वह संसद से 20 दिनों तक गायब रहे। इन टिप्पणियों के जरिए राहुल ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
अभिव्यक्ति की आजादी पर फिर तेज हुई सियासी बहस
राहुल गांधी के बयान के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक असहमति का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। राहुल का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करने और अपनी समस्याएं उठाने की आजादी सभी को मिलनी चाहिए। वहीं, RSS को लेकर उनका बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस और RSS के बीच वैचारिक मतभेद लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। अब राहुल गांधी के इस बयान से संसद और राजनीतिक मंचों पर अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।