Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। CEO पद के लिए 5,500 से ज्यादा आवेदन आने के बाद चयन प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। 16 अभ्यर्थियों के फेस-टू-फेस इंटरव्यू पूरे हो चुके हैं और अब तीन सदस्यीय चयन समिति मेरिट के आधार पर तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। हालांकि, यह पैनल अभी राम मंदिर ट्रस्ट को नहीं सौंपा गया है। सूत्रों के मुताबिक, अभ्यर्थियों के प्रशासनिक अनुभव, इंटरव्यू में प्रदर्शन और राम मंदिर की भविष्य की व्यवस्थाओं को संभालने की क्षमता को चयन का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। माना जा रहा है कि चयन समिति जल्द ही तीन नामों को अंतिम रूप देकर ट्रस्ट के महासचिव को सौंप सकती है।
राम मंदिर के नए CEO को लेकर जिन तीन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, पूर्व आईएएस दिनेश चंद्र और पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय शामिल हैं। योगेश्वर राम मिश्र अयोध्या के जिलाधिकारी रह चुके हैं, जबकि दिनेश चंद्र जौनपुर के जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वहीं, पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय का नाम इस पूरी रेस में सबसे ज्यादा चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, अभी किसी भी नाम को अंतिम नहीं माना जा सकता, क्योंकि चयन समिति के पैनल के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की मंजूरी जरूरी होगी। यानी आखिरी फैसला ट्रस्ट की बैठक में विचार-विमर्श और सहमति के बाद ही होगा।
नए CEO के चयन पर अंतिम मुहर 2 सितंबर को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक में लगने की संभावना है। यह बैठक केवल CEO की नियुक्ति के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि मंदिर के प्रवक्ता की नियुक्ति और उसकी भूमिका से जुड़ी गाइडलाइन पर भी फैसला हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, राज परिवार के सदस्य यतींद्र मोहन मिश्र को ट्रस्टी बनाए जाने के साथ प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। ऐसे में राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी दिखाई दे रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन नामों के पैनल में किसे जगह मिलती है और 2 सितंबर को ट्रस्ट किस नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगाता है।