Ayodhya Fish Feast Row: अयोध्या में मछली भोज पर क्यों मचा बवाल? जानिए पूरा विवाद और भारत में मांसाहार के आंकड़े
Ayodhya Fish Feast Row
Ayodhya Fish Feast Row ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अयोध्या के तारुन क्षेत्र में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम के बाद कथित मछली भोज को लेकर संत समाज और भाजपा नेताओं ने सवाल उठाए हैं। वायरल वीडियो में मछली परोसे जाने की तैयारी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि कार्यक्रम सावन और एकादशी के दिन होने की बात कही गई। संत समाज ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कांग्रेस से स्पष्टीकरण और माफी की मांग की है।
अजय राय ने दी सफाई, निषाद समाज की परंपरा का दिया हवाला
विवाद के बीच अजय राय ने कहा कि वह अयोध्या में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद निषाद समाज के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि मछली पकड़ना, बेचना और खाना निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका का हिस्सा रहा है। अजय राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी मछली खाते हुए तस्वीर सामने आती है तो वह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। वहीं यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी इस आयोजन को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर कथित दोहरे आचरण का आरोप लगाते हुए अजय राय पर निशाना साधा।
पहली बार नहीं, पहले भी मछली और मांस पर हुई सियासत
Ayodhya Fish Feast Row से पहले भी भारतीय राजनीति में खान-पान को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं। 2023 में राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव का चंपारण मटन पकाने का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने निशाना साधा था। 2024 में तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी का हेलिकॉप्टर में मछली खाते हुए वीडियो भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बना। चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं के ऐसे वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा था कि धार्मिक अवसरों पर इस तरह की चीजों को सार्वजनिक करने के पीछे मंशा क्या है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का भोजन करने की आजादी है।
भारत में मांसाहार को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?
NFHS-5 के 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की उम्र के 83.4 प्रतिशत पुरुष और 70.6 प्रतिशत महिलाएं मछली, चिकन या मांस का सेवन करती थीं। वहीं कम से कम सप्ताह में एक बार मांसाहार करने वालों की हिस्सेदारी पुरुषों में 57.3 प्रतिशत और महिलाओं में 45.1 प्रतिशत थी। राज्यों में यह आंकड़ा काफी अलग है। लक्षद्वीप में 98.4 प्रतिशत पुरुष सप्ताह में कम से कम एक बार मांसाहार करते हैं, जबकि राजस्थान में यह आंकड़ा 14.1 प्रतिशत है। इससे साफ है कि भारत में खान-पान की आदतें क्षेत्र और संस्कृति के हिसाब से काफी अलग हैं।
मांसाहार पर राजनीति क्यों बन जाता है मुद्दा?
Ayodhya Fish Feast Row ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि नेताओं का खान-पान चुनावी राजनीति में इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन जाता है। भारत जैसे विविधता वाले देश में अलग-अलग समुदायों की अपनी भोजन परंपराएं हैं। कहीं मछली और मांस रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हैं, तो कई समुदायों में धार्मिक अवसरों पर शाकाहार को प्राथमिकता दी जाती है। यही अंतर कई बार राजनीतिक बयानबाजी का आधार बन जाता है। अयोध्या का ताजा विवाद भी अब सिर्फ कथित मछली भोज तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं, सामाजिक परंपराओं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बड़ा सियासी मुद्दा बन चुका है।
