Jhooth Ki Goonj Website: राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन के जवाब में आई नई वेबसाइट
Jhooth Ki Goonj Website
Jhooth Ki Goonj Website इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ ‘छात्रों की गूंज’ नाम से एक कैंपेन शुरू किया है। इसी के जवाब में ‘झूठ की गूंज’ नाम की एक वेबसाइट सामने आई है, जो राहुल गांधी के कार्यक्रमों में किए गए दावों का फैक्ट-चेक करने का दावा करती है। हालांकि, वेबसाइट को किसने बनाया है, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
वेबसाइट के समर्थन पर बीजेपी का रुख
Jhooth Ki Goonj Website को सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ समर्थकों का समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। हालांकि, बीजेपी ने वेबसाइट से किसी भी तरह के आधिकारिक संबंध से इनकार किया है। वेबसाइट पर भी इसे बनाने वाले व्यक्ति या संगठन की स्पष्ट पहचान का उल्लेख नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे ‘राष्ट्रवादी रिसर्चर्स’ और Gen Z से जुड़ी पहल बता रहे हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
चार कार्यक्रमों के 40 दावों की जांच का दावा
Jhooth Ki Goonj Website के अनुसार, राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के चार कार्यक्रमों के दौरान कुल 40 दावे किए। वेबसाइट का दावा है कि इनमें 29 दावे गलत और 11 दावे गुमराह करने वाले थे। वेबसाइट पर लिखा गया है कि वह राहुल गांधी के बयानों के लिए एक तरह की ‘answer key’ पेश कर रही है। हालांकि, वेबसाइट के इन निष्कर्षों को स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग संस्थाओं द्वारा सत्यापित किया गया है या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रोजगार और महिला हिंसा के आंकड़ों पर सवाल
Jhooth Ki Goonj Website ने राहुल गांधी के रोजगार और महिला हिंसा से जुड़े कुछ दावों को चुनौती दी है। वेबसाइट ने PLFS यूनिट-लेवल डेटा का हवाला देते हुए युवाओं की रोजगार स्थिति पर अलग आंकड़े पेश किए हैं। वहीं, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर वेबसाइट ने NFHS के विभिन्न दौर के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए समय के साथ कमी आने का दावा किया है। इन आंकड़ों और उनकी व्याख्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पक्षों के बीच बहस की संभावना बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस, वेबसाइट की पहचान बनी सवाल
Jhooth Ki Goonj Website के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान और सरकार की नीतियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ वेबसाइट राहुल गांधी के दावों को चुनौती दे रही है, वहीं दूसरी तरफ इसे बनाने वालों की पहचान अब भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वेबसाइट पर किए गए दावों और आंकड़ों को स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोतों से जांचना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस वेबसाइट को लेकर राजनीतिक दलों और राहुल गांधी की ओर से क्या
प्रतिक्रिया सामने आती है।
