Nepal Electricity Imports: 83 हजार मेगावाट क्षमता के बावजूद भारत से बिजली क्यों खरीदता है नेपाल?
Nepal Electricity Imports
Nepal Electricity Imports: भारत नेपाल में बिजली की कमी को दूर करने के लिए अतिरिक्त बिजली की सप्लाई बढ़ाने पर विचार कर रहा है। भारतीय अधिकारी मौजूदा नियमों और व्यवस्थाओं के तहत नेपाल के अतिरिक्त बिजली अनुरोध पर काम कर रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब नेपाल बाढ़ की गंभीर मार भी झेल रहा है। सवाल यह है कि 6 हजार से अधिक नदियों और धाराओं वाले नेपाल को आखिर भारत से बिजली आयात करने की जरूरत क्यों पड़ती है। इसके पीछे नेपाल की जल विद्युत क्षमता और वास्तविक उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है।
83 हजार मेगावाट क्षमता
नेपाल को जल विद्युत उत्पादन के लिए दुनिया के सबसे उपयुक्त देशों में गिना जाता है। पहाड़ी भूगोल और नदियों के कारण देश में करीब 83 हजार मेगावाट जल विद्युत क्षमता होने का अनुमान है। हालांकि, यह क्षमता वास्तविक स्थापित उत्पादन क्षमता से अलग है। नेपाल में फिलहाल करीब 4,300 मेगावाट के आसपास ही स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता है। बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए भारी निवेश, उन्नत तकनीक, मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और कई वर्षों के निर्माण कार्य की जरूरत होती है। यही कारण है कि नेपाल अपने विशाल नदी संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है।
सर्दियों में 60 से 70 फीसदी तक घट सकता है उत्पादन
नेपाल की बिजली व्यवस्था काफी हद तक रन ऑफ द रिवर हाइड्रो प्रोजेक्ट पर निर्भर है। मानसून और गर्मियों में नदियों का बहाव बढ़ने से बिजली उत्पादन अधिक होता है और नेपाल अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात भी कर सकता है। लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच सर्दियों में नदियों का जल प्रवाह कम होने लगता है और उत्पादन में लगभग 60 से 70 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। नेपाल के पास पर्याप्त जलाशय आधारित स्टोरेज प्रोजेक्ट भी कम हैं, जिससे सालभर स्थिर बिजली उत्पादन चुनौती बना रहता है।
बाढ़ और ग्लेशियर घटनाओं ने बढ़ाई मुश्किल
नेपाल की हिमालयी भौगोलिक स्थिति ऊर्जा ढांचे को बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। अगस्त 2026 में तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई भीषण बाढ़ और ग्लेशियर फटने की घटना से हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और सोलर प्लांट प्रभावित हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 550 मेगावाट उत्पादन क्षमता, यानी देश की कुल क्षमता का लगभग 8 फीसदी हिस्सा अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। इस अचानक कमी के कारण नेपाल की तत्काल बिजली जरूरत बढ़ गई और उसे भारत से अतिरिक्त सप्लाई की आवश्यकता पड़ी।
भारत-नेपाल के बीच दोनों तरफ से होता है बिजली व्यापार
भारत और नेपाल के बीच बिजली व्यापार केवल आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों तरफ से होने वाला ऊर्जा कारोबार है। बारिश और मानसून के दौरान नेपाल अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर भारत को निर्यात करता है, जबकि सर्दियों में उत्पादन घटने पर भारत से बिजली खरीदता है। 2025-26 वित्त वर्ष के दौरान नेपाल ने भारत को करीब 3,299 मिलियन यूनिट बिजली निर्यात की। वहीं इसी वित्त वर्ष में भारत ने नेपाल को लगभग 1,451 मिलियन यूनिट बिजली निर्यात की। यही मौसमी जरूरत और उत्पादन का अंतर दोनों देशों के बिजली व्यापार को महत्वपूर्ण बनाता है।
