Nepal Flood Tragedy: विदेश मंत्री बोले- दुनिया के पाप की कीमत चुका रहा नेपाल
Nepal Flood Tragedy
Nepal Flood Tragedy: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में करीब 1000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 4 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के छह दिन बाद भी प्रभावित इलाकों में लोगों की अपनों को तलाश जारी है। इस बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस आपदा को सामान्य बाढ़ नहीं, बल्कि ‘हिमालयन सुनामी’ करार दिया है।
’20 से 30 मीटर ऊंची थीं लहरें’
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने दावा किया कि यह कोई सामान्य बाढ़ नहीं थी। उनके मुताबिक, आपदा के दौरान लहरों की ऊंचाई 20 से 30 मीटर तक पहुंच गई, जबकि पानी की गति 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। उन्होंने इसे बवंडर जैसी रफ्तार वाली आपदा बताते हुए कहा कि कई लोग इसे सही मायने में हिमालयन सुनामी कह रहे हैं।
वैश्विक संकट की कीमत चुका रहा नेपाल
शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन लगभग नगण्य है, लेकिन इसके बावजूद देश उस वैश्विक संकट की भारी कीमत चुका रहा है, जिसे उसने पैदा नहीं किया। उन्होंने ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और विनाशकारी पहाड़ी बाढ़ को वैश्विक जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम बताया। विदेश मंत्री के मुताबिक, दुनिया के पाप की कीमत नेपाल चुका रहा है।
नेपाल ने मांगी तत्काल आर्थिक सहायता
विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने नुकसान और क्षति से निपटने के लिए तत्काल आर्थिक सहायता की मांग की है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले और वन एवं कृषि मंत्री गीता चौधरी के संयुक्त हस्ताक्षर वाले पत्र में फ्लैश फ्लड के मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है। शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल क्षतिपूर्ति का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठा रहा है। यह सहायता उस ग्लोबल क्लाइमेट फाइनेंस मैकेनिज्म से जुड़ी है, जिसे COP27 में बनाया गया और COP28 में लागू किया गया।
काठमांडू अस्पताल में तस्वीरों के बीच अपनों की खोज
बाढ़ के छह दिन बाद भी नेपाल में दर्दनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। काठमांडू के अस्पतालों में लोग हाथों में मोबाइल लेकर तस्वीरों और मृतकों की सूची में अपने परिजनों को तलाश रहे हैं। अस्पताल परिसर की मिसिंग वॉल पर हर तरफ लापता लोगों की तस्वीरें लगी हुई हैं। लोग दिन-रात किसी सूचना का इंतजार कर रहे हैं, जबकि दूरदराज के इलाकों से घायल लोगों को इलाज के लिए काठमांडू लाया जा रहा है। नेपाल की यह त्रासदी अब जलवायु संकट पर दुनिया के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
